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टैंक-रोधी हथियार ‘एटी-4’ से लैस होगी सेना और एयरफोर्स, स्वीडन की रक्षा उपकरण निर्माता कंपनी ‘साब’ से हुआ अनुबंध

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स्वीडन की रक्षा उपकरण निर्माता कंपनी ‘साब’ (Swedish defence company Saab) का कहना है कि उसने भारतीय सशस्त्र बलों के लिए टैंक-रोधी हथियार ‘एटी-4’ की आपूर्ति करने का एक अनुबंध किया है। स्वीडिश कंपनी की ओर से जारी बयान के मुताबिक ‘साब’ को प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से गुजरने के बाद इस हथियार की आपूर्ति का अनुबंध मिला है। एटी-4 का उपयोग भारतीय थल सेना और भारतीय वायुसेना करेगी। इस हथियार ने हेलिकाप्टर, बख्तरबंद वाहनों एवं सैन्य कर्मियों के खिलाफ अपनी क्षमता साबित की है। एकल सैनिक संचालित हथियार है।  

हाल ही में भारतीय सेना को नई लड़ाकू वर्दी को मंजूरी दी गई है। बता दें कि सेना दिवस के मौके पर बीते शनिवार भारतीय सेना की एक टुकड़ी नई यूनिफार्म को पहनकर परेड मे शामिल हुई थी। यही नहीं हाल ही में सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने पूर्वी कमान क्षेत्र की यात्रा के दौरान नई लड़ाकू वर्दी (कांबैट यूनिफार्म) पहनी थी। भारतीय सेना की नई कांबैट पैटर्न यूनिफार्म को नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फैशन टेक्नोलाजी की मदद से 15 पैटर्न, आठ डिजाइन और चार फैब्रिक के विकल्पों के माध्यम से विकसित किया गया है। इससे अलग-अलग इलाकों के लिए अलग-अलग वर्दी रखने की जरूरत खत्‍म हो गई है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार सेना में आधुनिकीकरण पर तेजी से काम कर रही है। देश की सेनाओं को तेजी के साथ मजबूती देने का काम हो रहा है। इन्‍हीं कवायदों के बीच भारत ने गुरुवार को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के एक और नए संस्करण का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। गुरुवार को रक्षा अनुसंघान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बालेश्वर के चांदीपुर परीक्षण रेंज से सुबह 10 बजकर 45 मिनट पर इस मिसाइल का परीक्षण किया। इस मौके पर डीआरडीओ तथा आइटीआर से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों और विज्ञानियों का दल मौजूद था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मिसाइल के सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ के विज्ञानियों को बधाई दी है। यह मिसाइल कई अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। साथ ही सतह से वायु और समुद्र के दुश्मनों का सफाया करने में सक्षम है। कुछ दिन पहले ही 11 जनवरी को डीआरओ ने ब्रह्मोस के समुद्री नौसैनिक संस्करण का भी परीक्षण किया था। लगातार नई तकनीक से लैस कर इसे और भी उन्नत व क्षमतावान बनाया जा रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना अधिक तेज गति से उड़ान भरती है। वहीं मोडिफाइड कंट्रोल सिस्टम की मदद से मिसाइल की मारक क्षमता बढ़ाई गई है।

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