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उत्तराखण्ड

अग्निवीर योजना पर यशपाल आर्य का केंद्र पर बड़ा हमला, बोले– सेना प्रयोगशाला नहीं, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद करे सरकार

 

 

दो साल का सेवा विस्तार युवाओं की चिंता का समाधान नहीं, अग्निपथ योजना खत्म कर नियमित भर्ती बहाल करने की उठाई मांग

 

देहरादून। अग्निवीर योजना को लेकर उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अग्निपथ योजना को देश की सुरक्षा, सेना के गौरव और युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की है। आर्य ने कहा कि चार साल की सेवा के बाद अग्निवीरों को दो वर्ष का अतिरिक्त सेवा विस्तार देने की चर्चा समस्या का समाधान नहीं है। युवाओं को अस्थायी सेवा विस्तार नहीं, बल्कि सेना में स्थायी नियुक्ति और सम्मानजनक भविष्य चाहिए।

 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चार वर्ष पहले केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना लागू कर लाखों युवाओं के सैन्य सेवा से जुड़ने के सपनों को अनिश्चितता में डाल दिया था। कांग्रेस शुरुआत से ही इस योजना का विरोध करती रही है। राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी ने सड़क से संसद तक इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने कहा कि देश की सेना कोई प्रयोगशाला नहीं है, जहां राजनीतिक फैसलों के आधार पर प्रयोग किए जाएं। राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों के मनोबल को किसी भी राजनीतिक प्रयोग से ऊपर रखा जाना चाहिए।

 

आर्य ने कहा कि अग्निवीर योजना के पहले बैच के चार साल पूरे होने के साथ ही अब 75 प्रतिशत जवानों की सेवा समाप्त होने का सवाल सामने है। ऐसे में दो वर्ष के अतिरिक्त सेवा विस्तार की चर्चा ने योजना की मूल व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने 4 नवंबर को सीडीएस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आई जानकारी का उल्लेख करते हुए पूछा कि यदि चार साल की सेवा के बाद भी जवानों को भविष्य की सुरक्षा नहीं मिल पा रही है तो दो साल का विस्तार आखिर किस समस्या का समाधान करेगा? छह साल बाद भी चयन के आधार पर कुछ जवानों को ही स्थायी करने और बाकी को बाहर करने की व्यवस्था युवाओं के साथ न्याय कैसे कर सकती है?

 

उन्होंने सवाल उठाया कि जिस अग्निपथ योजना को सरकार ने सेना में ऐतिहासिक सुधार बताया था, अब उसी में बदलाव की जरूरत क्यों महसूस हो रही है? क्या इसे लागू करने से पहले सेना की जरूरतों, जवानों के मनोबल और युवाओं के भविष्य का समुचित आकलन किया गया था? सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इतनी महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू करने का निर्णय किन परिस्थितियों और आधारों पर लिया गया।

 

नेता प्रतिपक्ष ने अग्निवीरों की आत्महत्या के 40 से अधिक मामलों से जुड़ी खबरों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सेवा की शर्तों, कथित भेदभाव और भविष्य की अनिश्चितता से जुड़ी चिंताएं बेहद गंभीर हैं। ये महज आंकड़े नहीं, बल्कि उन परिवारों का दर्द हैं जिन्होंने अपने बच्चों को देश की रक्षा के लिए सेना में भेजा। उन्होंने अपने सैन्य सेवाकाल का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की परिस्थितियों को लेकर सामने आ रही खबरें पूरे देश के लिए चिंता का विषय हैं।

 

आर्य ने सेना में नियमित जवानों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि करीब सवा दो लाख जवानों की कमी को लेकर लगातार सवाल सामने आ रहे हैं। वहीं, लगभग डेढ़ लाख ऐसे युवा भी प्रभावित हुए, जिन्होंने सेना और वायुसेना की भर्ती प्रक्रिया में सफलता हासिल की थी और नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे। इन युवाओं ने वर्षों तक शारीरिक और लिखित परीक्षाओं की तैयारी की, कठिन मेहनत की और देश की सेवा का सपना देखा, लेकिन सरकार के फैसले ने उनके भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया।

 

उन्होंने अग्निपथ योजना को लागू किए जाने के समय सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों की भूमिका और सलाह को लेकर उठे सवालों का भी जिक्र किया। आर्य ने कहा कि सार्वजनिक चर्चाओं में यह बात सामने आई थी कि सेना प्रमुखों ने इस योजना को लाने की पहल नहीं की थी। केंद्र सरकार को बताना चाहिए कि सेना से जुड़े इतने बड़े फैसले के पीछे वास्तविक आधार क्या थे और इसे लागू करने से पहले किन पहलुओं पर विचार किया गया था।

 

कांग्रेस की ओर से चलाए गए विरोध अभियानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग और पार्टी के कार्यकर्ताओं ने देशभर में ‘जय जवान कैंपेन’ चलाकर अग्निवीरों और भर्ती से प्रभावित युवाओं की आवाज बुलंद की है। कांग्रेस की मांग स्पष्ट है कि अग्निपथ योजना समाप्त हो और सेना में पहले की तरह नियमित सैनिक भर्ती व्यवस्था बहाल की जाए।

 

आर्य ने केंद्र सरकार से अग्निपथ योजना तत्काल रद्द करने, नियमित भर्ती शुरू करने, अग्निवीरों को स्थायी सेवा और समान अधिकार देने, भर्ती प्रक्रिया से प्रभावित युवाओं को न्याय दिलाने तथा सेना के रिक्त पदों को नियमित भर्ती से भरने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने जवानों के लिए पेंशन, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित करने तथा अग्निवीरों की आत्महत्या से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कर प्रभावित परिवारों को उचित सहायता देने की भी मांग उठाई।

 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि देश की सुरक्षा केवल आधुनिक हथियारों से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि इसके लिए मजबूत मनोबल, अनुभवी सैनिक और सेना के प्रति अटूट विश्वास जरूरी है। जो जवान देश की सीमाओं की रक्षा करता है, उसके अपने भविष्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार की है। दो साल का एक्सटेंशन देकर युवाओं की चिंताओं को टाला नहीं जा सकता। सरकार को अस्थायी व्यवस्था के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

 

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