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उत्तराखण्ड

उत्तराखंड फिल्म नीति के तहत 2024 और 2025 के फिल्म पुरस्कारों पर धामी सरकार की मुहर, नरेंद्र सिंह नेगी और हेमंत पांडे को मिलेगा विशेष सम्मान

 

 

देहरादून। उत्तराखंड में क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहित करने और प्रदेश की लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में धामी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड फिल्म नीति-2024 के तहत वर्ष 2024 और 2025 के लिए चयनित फिल्मों एवं कलाकारों को फिल्म पुरस्कार प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इन पुरस्कारों के माध्यम से उत्तराखंड के सिनेमा जगत में योगदान देने वाले कलाकारों, निर्देशकों, निर्माताओं, पटकथा लेखकों और तकनीकी विशेषज्ञों को सम्मानित किया जाएगा।

 

वर्ष 2024 के लिए प्रसिद्ध लोकगायक और गढ़वाली संस्कृति के प्रमुख संवाहक नरेंद्र सिंह नेगी को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार के लिए चुना गया है। वहीं, वर्ष 2025 के लिए अभिनेता हेमंत पांडे को इस सम्मान से नवाजा जाएगा। दोनों को दो-दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि के साथ प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।

 

**वर्ष 2024 के पुरस्कारों में इनका चयन**

 

वर्ष 2024 की उत्तराखंडी बोली की फिल्मों की श्रेणी में गढ़वाली फिल्म ‘घपरोल’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म चुना गया है। फिल्म के निर्माता अजय ढौंडियाल हैं। इसी फिल्म के लिए सिद्धार्थ शर्मा को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक एवं पटकथा लेखक और विनय चानना को सर्वश्रेष्ठ सिनेमेटोग्राफर के पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।

 

फिल्म ‘कारा एक प्रथा’ के लिए रमेश रावत को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, शिवानी भंडारी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और अजय सिंह बिष्ट को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार दिया जाएगा।

 

वहीं, फिल्म ‘मेरे गांव की बात’ के लिए मधुबाला को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री और अजब सिंह को सर्वश्रेष्ठ गायक के पुरस्कार के लिए चुना गया है।

 

**हिंदी फिल्मों में ‘मनु क्या करेगा’ और ‘केसरी चैप्टर-2’ का दबदबा**

 

वर्ष 2025 की हिंदी फिल्म श्रेणी में ‘मनु क्या करेगा’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार दिया जाएगा। इसके निर्माता शरद मेहरा हैं। वहीं, ‘केसरी चैप्टर-2’ को भी विभिन्न प्रमुख श्रेणियों में पुरस्कारों के लिए चयनित किया गया है।

 

‘मनु क्या करेगा’ के लिए करण सिंह त्यागी को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और पटकथा लेखक के पुरस्कार के लिए चुना गया है। अक्षय कुमार को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, अनन्या पांडे को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री, आर. माधवन को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता और जुबिन नौटियाल को सर्वश्रेष्ठ गायक के पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। पटकथा लेखन में करण सिंह त्यागी के साथ अमृत पाल भी शामिल हैं।

 

**गढ़वाली फिल्मों में ‘रैबार’ और ‘दि होला जब साथ’ को सम्मान**

 

वर्ष 2025 की उत्तराखंडी बोली की फिल्मों की श्रेणी में गढ़वाली फिल्म ‘रैबार’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिलेगा। इसके लिए भगत सिंह सैनी को निर्माता एवं पटकथा लेखक और सुशील उनियाल को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के रूप में चुना गया है। राजेश नौगाई को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता और धर्मेंद्र सिंह सिसोदिया को सर्वश्रेष्ठ सिनेमेटोग्राफर की श्रेणी में सम्मानित किया जाएगा।

 

इसके अलावा गढ़वाली फिल्म ‘दि होला जब साथ’ के लिए मनीष डिमरी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, कल्याणी गंगोला को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और विकास भारद्वाज को सर्वश्रेष्ठ गायक के पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।

 

**दो लाख से एक लाख रुपये तक मिलेगी पुरस्कार राशि**

 

सरकार की ओर से निर्धारित पुरस्कार राशि के अनुसार सर्वश्रेष्ठ फिल्म को दो लाख रुपये, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक को डेढ़ लाख रुपये और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, अभिनेत्री, पटकथा लेखक, सहायक अभिनेता-अभिनेत्री, गायक तथा सिनेमेटोग्राफर को एक-एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।

 

इसके साथ ही निर्माताओं और निर्देशकों को स्वर्ण ब्रह्मकमल के साथ प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा, जबकि अन्य कलाकारों एवं तकनीकी विशेषज्ञों को रजत ब्रह्मकमल और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कारों के लिए सभी नामों का चयन निर्णायक मंडल की संस्तुति के आधार पर किया गया है।

 

**स्थानीय सिनेमा और कलाकारों को मिलेगा नया मंच**

 

राज्य सरकार का कहना है कि उत्तराखंड में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने और स्थानीय कलाकारों को बेहतर मंच उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश की लोकसंस्कृति, भाषा, परंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार उत्तराखंड की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है। क्षेत्रीय फिल्मों और कलाकारों को प्रोत्साहन मिलने से स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही इससे प्रदेश में फिल्म निर्माण की गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और उत्तराखंड की संस्कृति को व्यापक पहचान हासिल करने में मदद मिलेगी।

 

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