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उत्तराखण्ड

कानपुर-काठगोदाम ट्रेन की उम्मीद बढ़ी, कुमाऊँ संघ ने सांसद रमेश अवस्थी से की मुलाकात

कानपुर-काठगोदाम ट्रेन की उम्मीद बढ़ी, कुमाऊँ संघ ने सांसद रमेश अवस्थी से की मुलाकात

कानपुर। कानपुर से काठगोदाम के बीच सीधी रेल सेवा शुरू होने की संभावना अब मजबूत होती नजर आ रही है। लंबे समय से उठ रही इस मांग को लेकर कानपुर में रह रहे उत्तराखंड मूल के लोगों ने एक बार फिर आवाज बुलंद की है। कुमाऊँ संघ के पदाधिकारियों ने सांसद रमेश अवस्थी से मुलाकात कर कानपुर-काठगोदाम ट्रेन संचालन की मांग पर चर्चा की और इस दिशा में प्रयासों के लिए उनका आभार जताया।

 

 

प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को बताया कि कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में उत्तराखंड के लोग निवास करते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों से रोजगार, शिक्षा और व्यापार के सिलसिले में वर्षों पहले लोग कानपुर में बस गए, लेकिन आज भी उनका अपने मूल गांवों और शहरों से गहरा जुड़ाव बना हुआ है। ऐसे में सीधी रेल सेवा न होने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

कुमाऊँ संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में यात्रियों को लखनऊ, बरेली या दिल्ली के रास्ते सफर करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों अधिक खर्च होते हैं। यदि कानपुर से काठगोदाम तक सीधी ट्रेन शुरू होती है तो हजारों यात्रियों को राहत मिलेगी। इससे पर्यटन, व्यापार और सामाजिक संपर्क भी मजबूत होंगे। नैनीताल, हल्द्वानी, रुद्रपुर और कुमाऊँ के अन्य क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो जाएगी।

 

 

मुलाकात के दौरान उत्तराखंड भवन के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग भी सांसद के सामने रखी गई। इस पर सांसद रमेश अवस्थी ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया कि इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों की सुविधाओं और उनकी भावनाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

 

 

कानपुर में रहने वाले उत्तराखंडी समाज के लोगों का मानना है कि यदि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसी तरह प्रयास जारी रहे तो आने वाले समय में कानपुर-काठगोदाम रेल सेवा को मंजूरी मिल सकती है। इससे न सिर्फ उत्तराखंड मूल के लोगों को फायदा होगा बल्कि दोनों राज्यों के बीच संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

मुलाकात करने वालों में संघ अध्यक्ष ललित मोहन पाठक, मंत्री मुकेश सिंह राणा सहित कुमाऊँ संघ के अन्य पदाधिकारी और उत्तराखंड समाज के लोग मौजूद रहे।

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