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बिग ब्रेकिंग : विधानसभा से बर्खास्त कर्मचारियों को बड़ी राहत, सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक

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नैनीताल : विधानसभा भर्ती घोटोले मामले में पहले से ही तय माना जा रहा था कि निकाले गए कर्मचारियों को हाईकोर्ट से राहत मिल सकती है। पहली सुनवाई के साथ इस मामले में संकेत मिल गए थे कि सरकार के पास हटाने का कोई आधार नहीं है। इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि बैकडोरी भर्ती करने वाले पूर्व विधानसभा अध्यक्षों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया। हाईकोट में सुनवाई के बाद बर्खास्त कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।

नैनीताल हाईकोर्ट ने विधानसभा सचिवालय के सौ से अधिक कर्मचारियों की बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगा दी है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने पूर्व प्रमुख सचिव डीके कोटिया की अध्यक्षता में बनाई समिति की सिफारिशों के आधार पर इन कर्मचारियों की बर्खास्तगी का निर्णय लिया था। यह सब तदर्थ कर्मचारी हैं।

बीते दिवस न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने इन कर्मचारियों को सुनवाई का मौका नहीं देने पर नाराजगी जताई थी और विधानसभा से इस बिंदु पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।बर्खास्तगी आदेश के विरुद्ध 55 से अधिक कर्मचारियों की याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता में पर बबिता भंडारी, भूपेंद्र सिंह बिष्ठ व कुलदीप सिंह व 53 अन्य मुख्य थे।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि विधानसभा अध्यक्ष ने लोकहित को देखते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी, मगर बर्खास्तगी आदेश में उन्हें किस आधार पर किस कारण की वजह से हटाया गया, कहीं इसका उल्लेख नहीं किया गया न ही उन्हें सुना गया। जबकि उनके सचिवालय में नियमित कर्मचारियों की भांति कार्य किया है। एक साथ इतने कर्मचारियों को बर्खास्त करना लोकहित नही है। यह आदेश विधि विरुद्ध है। विधान सभा सचिवालय में 396 पदों पर बैकडोर नियुक्तियां 2002 से 2015 के बीच भी हुई है, जिनको नियमित किया जा चुका है।

याचिका में कहा गया है कि 2014 तक हुई तदर्थ रूप से नियुक्त कर्मचारियों को चार वर्ष से कम की सेवा में नियमित नियुक्ति दे दी गई । किन्तु उन्हें 6 वर्ष के बाद भी स्थायी नहीं किया, अब उन्हें हटा दिया गया। पूर्व में भी उनकी नियुक्ति को जनहित याचिका दायर कर चुनौती दी गयी थी, जिसमे कोर्ट ने उनके हित में आदेश दिया था जबकि नियमानुसार छह माह की नियमित सेवा करने के बाद उन्हें नियमित किया जाना था।

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