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‘जुमलाजीवी’ जैसे शब्द संसदीय भाषा से हटे तो महुआ मोइत्रा और प्रियंका चतुर्वेदी ने कसा तंज…..करें तो करें क्या, बोलें तो बोलें क्या?..वाह मोदी जी वाह…..

‘जुमलाजीवी’ जैसे शब्द संसदीय भाषा से हटे तो महुआ मोइत्रा और प्रियंका चतुर्वेदी ने कसा तंज…..करें तो करें क्या, बोलें तो बोलें क्या?..वाह मोदी जी वाह…..

संसद में संसदीय शब्द और असंसदीय शब्द को लेकर एक नई बहस छिड़ गयी है। लोकसभा सचिवालय ने असंसदीय शब्दों को लेकर नई बुकलेट जारी की है। जिसमें जुमलाजीवी, जयचंद, भ्रष्ट, जैसे शब्द असंसदीय माने जाएंगे। इसमें जुमलाजीवी, बाल बुद्धि, कोविड स्प्रेडर और स्नूपगेट, यहां तक आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले शर्म, दुर्व्यवहार, विश्वासघात, भ्रष्ट, ड्रामा, पाखंड और अक्षम जैसे शब्द अब लोकसभा और राज्यसभा में असंसदीय माने जाएंगे। इनके शब्दों के अलावा शकुनि, जयचंद, लॉलीपॉप, चांडाल चौकड़ी, गुल खिलाए, पिट्ठू जैसे आदि शब्दों का भी दोनों सदनों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। असंसदीय शब्दों में कुछ नए शब्द शामिल किए जाने पर तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने करारा तंज किया है।

‘जुमलाजीवी’ जैसे शब्द संसदीय भाषा से हटे तो महुआ मोइत्रा और प्रियंका चतुर्वेदी ने कसा तंज…..करें तो करें क्या, बोलें तो बोलें क्या?..वाह मोदी जी वाह…..

मोइत्रा और चतुर्वेदी ने आज ट्वीट कर इस सूची को लेकर केंद्र सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। मोइत्रा ने अपने ट्वीट में लिखा, बैठ जाएं। बैठ जाइये। प्रेम से बोलें। लोकसभा और राज्यसभा की नई असंसदीय शब्दों की सूची में संघी शब्द शामिल नहीं है। मूल रूप से सरकार ने विपक्ष द्वारा इस्तेमाल किए गए सभी शब्दों के इस्तेमाल को रोकने के लिए यह काम किया है। कैसे भाजपा भारत को नष्ट कर रही है और उन पर प्रतिबंध लगा रही है। शिवसेना की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने पुराने मीम का जिक्र कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट किया यह पुराना मीम याद आ गया। अगर करें तो करें क्या, बोलें तो बोलें क्या? सिर्फ वाह मोदी जी वाह! यह मीम अब हकीकत सा लगता है!।

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