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हीटवेव: तो गर्मी के मामले में अब दिल्ली, शिमला में कोई फर्क नहीं, पहाड़ भी अब उतने ही गर्म

हीटवेव: तो गर्मी के मामले में अब दिल्ली, शिमला में कोई फर्क नहीं, पहाड़ भी अब उतने ही गर्म

नई दिल्ली। देश के मैदानी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में भीषण गर्मी का प्रकोप साल दर साल बढ़ रहा है। ग्रीनपीस इंडिया ने हीटवेब को लेकर किए एक विश्लेषण में यह दावा किया है कि इस साल अप्रैल महीने में दिल्ली और शिमला में गर्मी का प्रकोप करीब-करीब एक जैसा रहा। शुक्रवार को रिपोर्ट जारी करते हुए ग्रीनपीस ने कहा कि देश के 10 शहरों में गर्मी के आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल में दिल्ली का औसत तापमान 40-44 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा, जबकि पिछले साल यह 40-42 डिग्री के बीच रहा था। इतना ही नहीं, गर्मी जल्दी ही भयावह रूप धारण कर रही है। दिल्ली में इस साल 6 अप्रैल के बाद पारा 40 डिग्री को पार कर गया था, जबकि पिछले साल ऐसी स्थिति 12 अप्रैल के बाद पैदा हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, शिमला में इस साल अप्रैल में औसत तापमान 40-44 डिग्री रहा। यह दिल्ली के बराबर है, जबकि पिछले साल अधिकतम तापमान 42 डिग्री तक ही पहुंचा था। दिल्ली की तरह ही शिमला का पारा भी छह अप्रैल के बाद 40 डिग्री पार कर गया था। पिछले साल ऐसी नौबत 13 अप्रैल के बाद पैदा हुई थी।

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रिपोर्ट के अनुसार जयपुर में 40 डिग्री से अधिक तापमान एक अप्रैल 2022 से ही शुरू हो गया था, जबकि पिछले साल यह 12 अप्रैल के बाद हुआ था। 2022 में जयपुर में 26 दिन ऐसे थे जब पारा 40 से ऊपर रहा, जबकि 2021 में ऐसे दिन महज 11 थे।
लखनऊ में अप्रैल 2022 में तापमान 40-45 डिग्री के बीच रहा, जबकि पिछले साल यह 40-42 डिग्री के बीच था। 2022 में एक अप्रैल को ही पारा 40 डिग्री पार कर गया था, जबकि पिछले साल 5 अप्रैल के बाद यह स्थिति आई थी।

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भोपाल और पटना में गर्मी का प्रकोप अपेक्षाकृत कम रहा। इसी प्रकार मुंबई, कोलकात्ता, हैदराबाद, चेन्नई में भी तापमान अपेक्षाकृत कम रहा है। इसकी वजह इन शहरों के समुद्र तटों के करीब होना माना गया है। रिपोर्ट पर ग्रीन पीस इंडिया के विशेषज्ञ अविनाश कुमार चंचल ने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि हमें गर्मी के खतरों से बचने के लिए प्रभावी चेतावनी प्रणाली तत्काल विकसित करनी होगी। साथ ही खतरों को न्यूनतम करने के लिए वन क्षेत्रफल बढ़ाने तथा पेयजल इकाइयों के संरक्षण के लिए भी कदम उठाने होंगे।

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