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कांग्रेस का कार्यक्रम है कहां? मेरी यात्रा से पार्टी कैसे कमजोर हो रही?’—हरीश रावत का हाईकमान से सीधा सवाल

 

 

‘कांग्रेस का कार्यक्रम है कहां? मेरी यात्रा से पार्टी कैसे कमजोर हो रही?’—हरीश रावत का हाईकमान से सीधा सवाल

 

7 अक्टूबर को दिल्ली में देंगे स्पष्टीकरण, यात्रा को लेकर कांग्रेस नेतृत्व से आमने-सामने होगी बात

 

देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर पार्टी के भीतर शुरू हुआ विवाद अब हाईकमान तक पहुंच गया है। यात्रा को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की ओर से स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद हरीश रावत ने अब सीधे पार्टी हाईकमान की सक्रियता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका सबसे बड़ा सवाल है कि जब प्रदेश में कांग्रेस का कोई बड़ा संगठित जनसंपर्क अभियान चल ही नहीं रहा है, तो उनकी यात्रा से कांग्रेस कैसे कमजोर हो रही है।

 

रावत ने कहा कि दिनभर चली यात्रा में हजारों कांग्रेसजन शामिल हुए। दूर-दराज के गांवों से बुजुर्ग और ऐसे लोग भी उनसे मिलने पहुंचे, जो अब सक्रिय राजनीति या सामाजिक जीवन में सक्रिय नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि यात्रा ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है। कांग्रेस के कई प्रमुख नेता भी किसी न किसी रूप में इस यात्रा में शामिल हुए हैं। कुछ सहयोगियों के अपनी बाध्यताओं के चलते शामिल नहीं हो पाने की बात भी उन्होंने कही।

 

दरअसल, हरीश रावत की धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा शुरू होने के बाद से ही कांग्रेस संगठन के स्तर पर इसे लेकर सवाल उठने लगे थे। यात्रा के स्वरूप और पार्टी के समानांतर कार्यक्रम के तौर पर देखे जाने को लेकर कांग्रेस नेतृत्व ने रावत से स्पष्टीकरण मांगा। प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की ओर से उन्हें पत्र भी भेजा गया। इसके बाद रावत को दिल्ली तलब किया गया है।

 

 

 

 

हरीश रावत के मुताबिक, उन्होंने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात कर यात्रा को लेकर पूरी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि पार्टी कोई समन्वित कार्यक्रम तैयार कर रही है तो उनके द्वारा आगे की प्रस्तावित 8-10 यात्राओं को स्थगित किया जा सकता है। हालांकि, मौजूदा यात्रा पहले से तय होने के कारण इसे बीच में रोकना सैकड़ों कार्यकर्ताओं के मनोबल पर प्रतिकूल असर डाल सकता था।

 

अब कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने रावत को मिलने का समय दिया है। रावत के अनुसार वह 7 अक्टूबर की शाम दिल्ली पहुंचकर कांग्रेस हाईकमान के सामने अपना स्पष्टीकरण देंगे। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी को उनसे स्पष्टीकरण लेने का पूरा अधिकार है और वह पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे।

 

 

 

हालांकि, इसी के साथ रावत ने कांग्रेस संगठन की सक्रियता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि इन दिनों कांग्रेस का कोई बड़ा कार्यक्रम प्रदेश में चल नहीं रहा है। कहीं-कहीं प्रदर्शन जरूर हो रहे हैं और वह स्वयं भी उन कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, लेकिन जिलों, ब्लॉकों, सड़कों और ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से कोई संगठित जनसंपर्क अभियान दिखाई नहीं दे रहा है।

 

यही सवाल अब रावत के बयान का सबसे अहम राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में कांग्रेस का कोई संगठित जनसंपर्क कार्यक्रम चल ही नहीं रहा है, तो उनकी धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा से कांग्रेस के कार्यक्रमों में कमजोरी आखिर कहां आ रही है?

 

रावत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के दौर में है। ऐसे में उनकी यात्रा को लेकर हाईकमान की आपत्ति और रावत का पलटकर संगठन की सक्रियता पर सवाल उठाना प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को और चर्चा में ले आया है। अब निगाहें 7 अक्टूबर की उस मुलाकात पर टिकी हैं, जहां रावत कांग्रेस नेतृत्व के सामने अपनी यात्रा और उसके उद्देश्य को लेकर स्पष्टीकरण देंगे।

 

हरीश रावत का बयान हूबहू….

“दिन भर की यात्रा, जिसमें हज़ारों कांग्रेसजन, दूर-दूर गांवों से भी आकर के बुज़ुर्ग लोग, जो अब राजनीति और सामाजिक जीवन में सक्रिय नहीं हैं, वो भी मुझसे आकर के मिले हैं। यात्रा ने हमारे कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आज की धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा ने भी मनोबल बहुत बढ़ाया है। कांग्रेस का प्रत्येक महत्वपूर्ण ‘हुज़ हू’ (Who’s Who) इस यात्रा में किसी न किसी रूप में शरीक हुआ है। दो-चार हमारे सहयोगियों की कुछ बाध्यता रही होगी, वो नहीं आ पाए। लेकिन बाकी सब लोग सम्मिलित हुए।

अभी-अभी देखा कि दिल्ली में फिर से मेरी “धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा” को गलत समझा जा रहा है। कल मैं आदरणीय वेणुगोपाल जी से मिला था, उनको मैंने सारी बातें एक्सप्लेन कर दी थीं और यह भी कह दिया था, ठीक है, आप यदि कोई को-ऑर्डिनेटेड प्रोग्राम बना रहे हैं, तो मैं आगे की जो 8-10 यात्राएं मैंने प्लान की थीं, मैंने उनको कहा मैं स्थगित कर देता हूं। लेकिन आज की यात्रा के लिए मैंने उनसे माफी मांगी। मैंने कहा कि यह यात्रा पहले से तय है, अब इस समय इसको स्थगित करना सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मनोबल पर इसका दुष्प्रभाव पड़ेगा।

हो सकता है मैं ठीक से अपनी बात न समझा पाया हूं। शैलजा जी ने मुझे मिलने का समय दिया है, 7 अक्टूबर को शाम 7 बजे और पार्टी को स्पष्टीकरण लेने का हक है।

मैं स्पष्टीकरण दूंगा। मगर एक बात मैं समझ पाने में असमर्थ हूं। इन दिनों कांग्रेस का कोई कार्यक्रम तो चल नहीं रहा है। एकाध कहीं प्रदर्शन आदि और उन प्रदर्शनों में मैं भाग लेता हूं। कोई संगठित जनसंपर्क अभियान ज़िलों, ब्लॉकों, सड़कों व ग्रामीण क्षेत्रों में तो दिखाई नहीं दे रहा है और बड़े लंबे समय से नहीं दिखाई दे रहा है, तो मेरी इस धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा से कांग्रेस के कार्यक्रमों में कहां पर कमज़ोरी आ रही है ?

 

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