अपराध
पिंजरे में कब होगा पंछी…. पत्नी के मंत्री पद का हवाला देकर गिरफ्तारी की आशंका, गिरधारी लाल साहू को कोर्ट से नहीं मिली राहत
पत्नी के मंत्री पद का हवाला देकर गिरफ्तारी की आशंका, गिरधारी लाल साहू को कोर्ट से नहीं मिली राहत
**एससी-एसटी एक्ट के मामले में अग्रिम जमानत याचिका खारिज, बंद कमरे में घटना होने की दलील पर भी नहीं मिली राहत; 210 करोड़ की कथित संपत्ति का मामला भी चर्चा में**
**देहरादून।** उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी को अग्रिम जमानत के मामले में अदालत से राहत नहीं मिली है। एससी-एसटी एक्ट से जुड़े प्रकरण में उनकी याचिका पांचवें अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) अंजलि बेंजवाल की अदालत ने सुनवाई के शुरुआती चरण में ही खारिज कर दी। याचिका में गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए दलील दी गई थी कि उनकी पत्नी मंत्री हैं और उनके राजनीतिक पद व प्रभाव के कारण उन्हें गिरफ्तार कराया जा सकता है।
यह मामला कई कारणों से चर्चा में है। एक ओर शिकायत के आधार पर दर्ज मुकदमे में गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर बचाव पक्ष ने विवाद को घरेलू और आर्थिक प्रकृति का बताते हुए अग्रिम जमानत की मांग की। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें रखी गईं, लेकिन आरोपी को इस स्तर पर राहत नहीं मिल सकी।
**बचाव पक्ष ने रखी बंद कमरे में घटना होने की दलील**
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि शादी को 22 साल हो चुके हैं और विवाद घरेलू तथा आर्थिक प्रकृति का है। जातिसूचक टिप्पणी कथित तौर पर निजी बंद कमरे में किए जाने की दलील भी दी गई। बचाव पक्ष ने घटना की परिस्थितियों का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत देने का अनुरोध किया।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक गोविंद सिंह ने याचिका का विरोध किया। अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई कि मंत्री के सरकारी आवास पर स्टाफ के सामने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
**शिकायत में लगाए गए हैं कई गंभीर आरोप**
मामले में गिरधारी लाल साहू के खिलाफ उनकी पत्नी की शिकायत पर कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज होने की बात सामने आई है। शिकायत से जुड़े प्रकरण में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, प्रताड़ना, जालसाजी और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की सच्चाई का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने को आरोपी की दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। अदालत का यह निर्णय अग्रिम राहत की मांग से संबंधित है। मामले में आगे की जांच और न्यायिक कार्यवाही महत्वपूर्ण रहेगी।
**210 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति को लेकर भी जांच की मांग**
इस प्रकरण से अलग, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से जुड़ी करीब 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति को लेकर भी जांच की मांग उठी है। अधिवक्ता एवं कानूनराज के संस्थापक पंकज सिंह क्षेत्री ने सतर्कता अधिष्ठान में शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में संबंधित संपत्तियों और आय के स्रोतों की पड़ताल करने का अनुरोध किया गया है।
हालांकि, संपत्ति से संबंधित आरोपों और शिकायत को लेकर जांच की वास्तविक स्थिति तथा निष्कर्ष आधिकारिक तौर पर स्पष्ट होना जरूरी है। शिकायत दर्ज होने या जांच की मांग उठने मात्र से आरोप साबित नहीं हो जाते।
**बैकग्राउंड: कानूनी मामला और राजनीतिक प्रभाव पर सवाल**
उत्तराखंड की राजनीति में किसी कैबिनेट मंत्री के परिवार से जुड़ा विवाद सामने आने पर राजनीतिक चर्चा तेज होना स्वाभाविक है। इस मामले में भी मंत्री के पद और राजनीतिक प्रभाव का उल्लेख अग्रिम जमानत याचिका में किया गया। लेकिन कानूनी तौर पर फैसला आरोपों, उपलब्ध तथ्यों और संबंधित कानून के आधार पर होता है।
अब इस मामले में आगे की जांच, साक्ष्यों की स्थिति और अदालत में होने वाली कार्यवाही पर नजर रहेगी। वहीं, कथित 210 करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर उठाए गए सवालों पर भी संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल दोनों मामलों में आरोपों और शिकायतों को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम का इंतजार करना होगा।