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उत्तराखण्ड

हरेला पर्व पर महिला महाविद्यालय में हरियाली का संकल्प, छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश फलदार और छायादार पौधों के रोपण पर दिया जोर, प्राचार्य डॉ. आमा शर्मा बोलीं— प्रकृति का संरक्षण ही आने वाली पीढ़ियों का सबसे बड़ा उपहार

 

हरेला पर्व पर महिला महाविद्यालय में हरियाली का संकल्प, छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

फलदार और छायादार पौधों के रोपण पर दिया जोर, प्राचार्य डॉ. आमा शर्मा बोलीं— प्रकृति का संरक्षण ही आने वाली पीढ़ियों का सबसे बड़ा उपहार

 

 

हल्द्वानी। उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर गुरुवार को इंदिरा प्रियदर्शिनी राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय, हल्द्वानी में पर्यावरण संरक्षण और हरित उत्तराखंड के संकल्प के साथ भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के ईको क्लब, ग्रीन कैंपस, क्लीन कैंपस, एनएसएस, एनसीसी एवं नमामि गंगे के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के फलदार, छायादार एवं औषधीय पौधों का रोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया।

 

 

 

कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आभा शर्मा, वरिष्ठ प्राध्यापक, विभिन्न समितियों के संयोजक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। सभी ने पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए पौधों की देखभाल का भी संकल्प लिया।

 

 

 

इस अवसर पर छात्राओं को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. आभा शर्मा ने कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, संस्कृति और जिम्मेदारी का प्रतीक है। उत्तराखंड की पहचान उसके जंगल, जलस्रोत और जैव विविधता से है। यदि हम आज पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और सुरक्षित पर्यावरण उपलब्ध कराना कठिन हो जाएगा।

 

 

 

उन्होंने कहा कि एक पौधा लगाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक आवश्यक उसकी नियमित देखभाल करना है। प्रत्येक छात्रा यदि अपने जीवन में कम से कम एक पौधे को वृक्ष बनने तक संरक्षित करने का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह सबसे बड़ी जनभागीदारी होगी। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे अपने घर, गांव और आसपास के क्षेत्रों में भी अधिक से अधिक फलदार, छायादार एवं स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाएं, ताकि पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ जैव विविधता भी सुरक्षित रह सके।

 

डॉ. शर्मा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण और लगातार घटते वन क्षेत्र पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय हैं। ऐसे समय में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना भी है। उन्होंने छात्राओं से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने तथा प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, जल संरक्षण और स्वच्छता को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।हरेला पर्व पर महिला महाविद्यालय में हरियाली का संकल्प, छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश  फलदार और छायादार पौधों के रोपण पर दिया जोर, प्राचार्य डॉ. आमा शर्मा बोलीं— प्रकृति का संरक्षण ही आने वाली पीढ़ियों का सबसे बड़ा उपहार

 

कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय परिसर में विभिन्न स्थानों पर पौधरोपण किया गया। उपस्थित सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्राओं ने लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने तथा परिसर को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाए रखने का संकल्प लिया। हरेला पर्व के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने और हरित भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

 

इस मौके पर डॉ.ए.के.श्रीवास्तव, डॉ.देवकी गिरी गोस्वामी, डॉ.आशा तिवारी, प्रो.नरेंद्र कुमार, डॉ.शरद मिश्रा, डॉ.दिनेश जोशी, डॉ.रश्मि पंत, डॉ.विवेक, डॉ.विजय बिष्ट, योग शिक्षिका डॉ. ज्योति चुफाल आदि मौजूद थे।

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