उत्तराखण्ड
शायद प्याज से चांदी निकल आए….काल्पनिक व्यंग्य इंटरव्यू – “नेता जी और आलू से सोना बनाने का सपना”
शायद प्याज से चांदी निकल आए….
काल्पनिक व्यंग्य इंटरव्यू – “नेता जी और आलू से सोना बनाने का सपना”
(पूरी तरह काल्पनिक व्यंग्य)
सवाल: नेता जी, आपने कहा था कि आलू से सोना निकलेगा, जनता आज भी इंतजार कर रही है।
जवाब: देखिए, हमने वादा तो किया था… लेकिन आलू ने अभी तक अपना राजनीतिक प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है।
सवाल: क्या मतलब?
जवाब: मतलब ये कि पहले आलू को समझना होगा कि देश की अर्थव्यवस्था में कैसे योगदान देना है। हर आलू सोना नहीं बन सकता, कुछ को सब्जी बनकर ही संतोष करना पड़ता है।
सवाल: किसान पूछ रहा है कि सोना कब निकलेगा?
जवाब: किसान बहुत धैर्यवान है… उसने सदियों से मौसम का इंतजार किया है, थोड़ा सोने का भी कर लेगा।
सवाल: अगर आलू से सोना नहीं निकला तो?
जवाब: तो हम नया शोध शुरू करेंगे… शायद प्याज से चांदी निकल आए।
सवाल: जनता कहती है कि महंगाई में आलू भी अब किसी खजाने से कम नहीं।
जवाब: यही तो हमारी उपलब्धि है… बिना सोना निकाले आलू की कीमत सोने जैसी हो गई।
सवाल: नेता जी, आपके वादों की गारंटी क्या है?
जवाब: गारंटी तो मोबाइल की भी होती है, लेकिन कभी-कभी चार्जर अलग से खरीदना पड़ता है।
सवाल: आखिरी सवाल—राजनीति में सबसे कीमती चीज क्या है?
जवाब: भरोसा… क्योंकि वही चीज है जो हर चुनाव में नई पैकिंग में मिलती है। 😄
(व्यंग्य किसी व्यक्ति विशेष के समर्थन या विरोध में नहीं है)
