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उत्तराखण्ड

मैं हूं अभी मैदान में….भगत ने बजाई चुनाव की बंशी! कालाढूंगी से ताल ठोकने का दिया संदेश, बोले- चुनाव लड़ने से इनकार की खबरें निराधार

 

 

सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों पर बंशीधर भगत का पलटवार, चुनावी तैयारी में जुटे होने का किया दावा; टिकट पर बोले- पार्टी का फैसला सर्वोपरि

 

हल्द्वानी/कालाढूंगी। उत्तराखंड की सियासत में बंशी की धुन एक बार फिर सुनाई देने लगी है। कालाढूंगी से भाजपा के वरिष्ठ नेता बंशीधर भगत ने आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने से इनकार करने की खबरों को खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि वह चुनावी मैदान से बाहर होने के मूड में नहीं हैं। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में भगत ने कहा कि चुनाव लड़ने से मना करने की बात पूरी तरह निराधार है। साथ ही उन्होंने कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रहने और आगामी चुनाव की तैयारियों में जुटे होने का भी ऐलान किया।

 

भगत के इस बयान के बाद कालाढूंगी की सियासत में उनके चुनावी रुख को लेकर चल रही चर्चाओं को नया मोड़ मिल गया है। सवाल यह है कि जब उनके चुनाव लड़ने से पीछे हटने की खबरें सामने आ रही थीं, तो भगत ने खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट करना क्यों जरूरी समझा? उनके संदेश का सीधा जवाब है कि वह अपनी चुनावी सक्रियता को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं रहने देना चाहते।

 

बंशी की धुन में चुनावी संदेश, मैदान छोड़ने की बात खारिज

 

बंशीधर भगत ने अपने संदेश में स्पष्ट कहा कि उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने से इनकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि वह जनता के बीच रहकर जनसंवाद, जनसेवा और विकास कार्यों के लिए लगातार सक्रिय हैं। उनके इस बयान को अपनी राजनीतिक सक्रियता और चुनावी मंशा सार्वजनिक करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

 

चुनाव से पहले किसी नेता के मैदान में बने रहने या पीछे हटने की चर्चाएं राजनीतिक माहौल को प्रभावित करती हैं। ऐसे में भगत ने खुद सामने आकर अपना पक्ष रखा है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि चुनाव नहीं लड़ने की खबरें कहां से शुरू हुईं या इन्हें किसने प्रसारित किया।

 

टिकट पर बंशीधर का सुर अलग, पार्टी का फैसला सर्वोपरि

 

भगत के बयान का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू टिकट को लेकर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा का अनुशासित कार्यकर्ता होने के नाते पार्टी का निर्णय उनके लिए सर्वोपरि है और संगठन जो भी फैसला करेगा, उसे वह सहर्ष स्वीकार करेंगे।

 

यानी एक तरफ भगत ने चुनाव लड़ने से इनकार की खबरों को खारिज किया, तो दूसरी तरफ टिकट के मामले में पार्टी के निर्णय को अंतिम प्राथमिकता देने की बात भी कही। उनके इस रुख को अपनी चुनावी तैयारी का संदेश देने के साथ संगठन के प्रति निष्ठा जताने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

 

कालाढूंगी में सक्रियता पर जोर, अब आगे क्या?

 

भगत ने अपने संदेश में राजनीति को केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि जनता के बीच रहना, उनकी समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए प्रयास करना उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है। उन्होंने कालाढूंगी के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार काम करते रहने का संकल्प भी दोहराया।

 

कुल मिलाकर, बंशीधर भगत ने अपनी बंशी से चुनावी धुन तो छेड़ दी है, लेकिन अगला सुर भाजपा के टिकट पर होने वाले फैसले से ही तय होगा। फिलहाल उनका संदेश साफ है—चुनाव लड़ने से इनकार नहीं, क्षेत्र में सक्रियता बरकरार और टिकट पर पार्टी का निर्णय स्वीकार।

 

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