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संघर्षों से शिखर तक: दायित्वधारी ध्रुव रौतेला की कहानी, जिसने हर मुश्किल को बना दिया अपनी ताकत

 

संघर्षों से शिखर तक: ध्रुव रौतेला की कहानी, जिसने हर मुश्किल को बना दिया अपनी ताकत

हल्द्वानी। कुछ कहानियां सिर्फ सफलता की नहीं होतीं, बल्कि उन जज्बातों, संघर्षों और टूटकर फिर खड़े होने की मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी है ध्रुव रौतेला की।

बचपन में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। एक मासूम के लिए यह सिर्फ एक कमी नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी को बदल देने वाला हादसा होता है। लेकिन उनकी मां राधा रौतेला ने हार नहीं मानी। विषम परिस्थितियों में उन्होंने अपने बेटे को न सिर्फ पाला-पोसा, बल्कि उसे मजबूत भी बनाया। हर कठिनाई में मां की ममता और संघर्ष ने ध्रुव को आगे बढ़ने की ताकत दी।

युवावस्था में कदम रखते ही ध्रुव रौतेला ने छात्र राजनीति से अपने सफर की शुरुआत की। यहां से उन्होंने समाज को समझा, लोगों के बीच अपनी पहचान बनाई और संघर्षों के असली मायने सीखे। लेकिन यह रास्ता आसान नहीं था—कई उतार-चढ़ाव आए, कई बार हालात ने परखा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

संघर्षों के बीच उन्होंने पत्रकारिता का रास्ता चुना। अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने देश के प्रतिष्ठित चैनल आज तक में करीब 10 वर्षों तक काम किया। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ खबरों को समझा, बल्कि समाज की नब्ज को भी करीब से जाना।

लेकिन उनका सफर यहीं नहीं रुका। पत्रकारिता के अनुभव और समाज की समझ को साथ लेकर वे सक्रिय राजनीति में उतर गए। यह कदम उनके जीवन का नया अध्याय था—जहां चुनौतियां भी थीं और जिम्मेदारियां भी।

करीब 30 वर्षों के लंबे संघर्ष, मेहनत और धैर्य का फल आज उन्हें मिला है। देहरादून में उन्होंने मुख्यमंत्री की मीडिया सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। यह पद न केवल प्रतिष्ठा का प्रतीक है, बल्कि सरकार और मीडिया के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी भी माना जाता है।

जब उन्हें यह दायित्व सौंपा गया, तो सचिव शैलेश बगौली ने उन्हें जिम्मेदारी दी—यह पल सिर्फ एक पद ग्रहण करने का नहीं, बल्कि एक संघर्षशील जीवन की जीत का था।

ध्रुव रौतेला ने दिखा दिया कि संघर्षों से शिखर तक: दायित्वधारी ध्रुव रौतेला की कहानी, जिसने हर मुश्किल को बना दिया अपनी ताकत संघर्षों से शिखर तक: दायित्वधारी ध्रुव रौतेला की कहानी, जिसने हर मुश्किल को बना दिया अपनी ताकत संघर्षों से शिखर तक: दायित्वधारी ध्रुव रौतेला की कहानी, जिसने हर मुश्किल को बना दिया अपनी ताकतहालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है। यह सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि उस मां के त्याग, संघर्ष और विश्वास की भी जीत है, जिसने हर मुश्किल में अपने बेटे को संभाला।

— यह कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है, जो संघर्षों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखते हैं।

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