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विवाद की कुंडली : ज्योतिष बनाम तांत्रिक को लेकर प्रकाश जोशी फिर आए सामने…. अब आखिर क्या कोशिश है उनकी देखें इस खबर के साथ

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कांग्रेस नेता प्रकाश जोशी का विगत दिनों स्वराज आश्रम में तांत्रिक शब्दों को लेकर किया गया भाषण अभी चर्चा नहीं है और लोग उनके इस बात का मतलब किसी ऐसे नेता से लगा रहे हैं जिसे वह तांत्रिक कहना चाह रहे थे। अब प्रकाश जोशी ने इस पूरे प्रकरण में सोशल मीडिया में सामने आकर यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष को लेकर नहीं बल्कि किसी अन्य लिहाज से यह बात कही थी। यहां पहले पड़े प्रकाश जोशी की फेसबुक पोस्ट और उसके बाद समझने की कोशिश करते हैं कि वहां आखिर कहना क्या चाह रहे हैं अभी भी….

 

पोस्ट

“लीडर बनाम पॉलिटिशियन “ ज्योतिष बनाम तांत्रिक”

परसों स्वराज आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में अपने संबोधन में मैंने “लीडर एवं पॉलिटिशियन” तथा “ज्योतिष एवं तांत्रिक” के बीच फर्क को समझाने की कोशिश की। सोशल मीडिया पर बवाल मच गया, चर्चा चलने लगी कि मेरा ईशारा किसकी तरफ़ है। पूरा दिन “तांत्रिक” की खोज में लगे रहे, ख़ुद ही क़यास लगाते रहे…

थोड़ा बुद्धि, विवेक का इस्तेमाल किया होता तो समझ पाते की मेरा ईशारा किसी “व्यक्ति” की तरफ़ नहीं बल्कि “प्रवृत्ति” की तरफ़ था…

आइये जरा विस्तार से समझते हैं…

 

लीडर बनाम पॉलिटिशियन

 

लीडर – टीम गेम में मानता है और खुला खेलता है ।

अपने साथियों के लिये अवसर जुटाता है । उनके हित की सोचता है।

अपने साथियों को अपनी Asset/ पूँजी समझता है।

अपने साथियों के लिये प्रेरणा का स्रोत बनता है।

अपने हर फ़ैसले को न्याय और अन्याय के तराज़ू से तोलता है।स्पष्टवादी होता है।

कुल मिलाकर एक आदर्श चरित्र एवं विश्वसनीय व्यक्तित्व का मालिक होता है।

 

पॉलिटिशियन- अकेला खेलता है, वो क्या खेल रहा है इस ब्रह्मांड में उसके स्वयं के अलावा किसी को पता नहीं होता । सारी योजनाएँ स्वयं पर केंद्रित रहती हैं

स्वयं के साथी हमेशा कंफ्यूज रहते हैं ।

अपने साथियों को हथियार समझकर अपने विरोधियों पर खर्च कर देता है।

न्याय और अन्याय से फ़र्क़ नहीं पड़ता, सिर्फ़ अपने समीकरण कैसे सधेंगे, इस पर फोकस रहता है।

झूठ, छल कपट इनके व्यक्तित्व का हिस्सा होते हैं।

अपने हित साधने हेतु किसी भी षड्यंत्र को रच सकने की मानसिकता वाला होता है।

 

ज्योतिष बनाम तांत्रिक,

 

ज्योतिष – जब आप किसी ज्योतिष से परामर्श लेते हैं तो वह आपकी कुंडली का अध्ययन करके, आपके मज़बूत और सकारात्मक ग्रहों के बारे में वर्णन कर उन्हें और मजबूत करने के उपाय बताता है । आपके कमजोर ग्रहों का वर्णन कर दैविक विधि से उनके बारे में उपाय बताता है।

आपसे आपके अच्छे एवं कठिन समय का उल्लेख करता है।

किसी भी वैदिक विधि के बाद पुण्य का भागीदार होता है ।

 

तांत्रिक- सुनने में ही नेगेटिव और डर उत्पन्न कर देने वाला भाव लाता है।

आपको आपके विरोधियों के विनाश का उपाय बताता है। और उसके लिये तांत्रिक विधियों का प्रयोग करता है। जिसमें आपका फायदा कम और विरोधियों के नुकसान की बात अधिक होती है ।

अंततः पाप का भागी होता है।

 

खैर उपरोक्त विश्लेषण में , लीडर और ज्योतिष “एक केटेगरी” है तथा पॉलिटिशियन और तांत्रिक “एक केटेगरी” है । और ये किसी को लक्ष्य में रखकर नहीं बल्कि एक सामान्य बात है। हम सबको भी स्वयं को तोलने के लिए एक तराज़ू है।

 

मुझे विश्वास है उपरोक्त विश्लेषण काफ़ी है मेरे वक्तव्य को समझने के लिये, लेकिन फिर भी अगर “कुछ लोग” “कुछ और” ही समझ रहे हों तो फिर शायद वहीं लोग सहीं हों।

 

अंत में, हम अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुये स्वयं आकलन करें कि हम स्वयं या हम जिस नेता से जुड़े हैं, किस केटेगरी के क़रीब हैं।

 

हर सिम्त (दिशा) से लगेंगे तुझे पत्थर आकर,

ये झूठ की दुनिया है, यहाँ सच ना कहा कर!

:- प्रकाश जोशी

पूर्व राष्ट्रीय सचिव

अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस…….

 

क्या हैं उनके मनोभाव….

कांग्रेस नेता प्रकाश जोशी का यह पूरा पोस्ट दरअसल एक डैमेज कंट्रोल और नैरेटिव सेट करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। स्वराज आश्रम में दिए गए उनके भाषण के बाद जिस तरह “ज्योतिष बनाम तांत्रिक” और “लीडर बनाम पॉलिटिशियन” की तुलना पर विवाद खड़ा हुआ, उसने यह साफ कर दिया कि उनका संदेश लोगों तक एकरेखीय (linear) तरीके से नहीं पहुंचा, बल्कि अलग-अलग अर्थों में लिया गया।

क्या कहना चाहते थे?

जोशी अपने पोस्ट में बार-बार यह स्पष्ट करने की कोशिश करते हैं कि उनका निशाना किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं, बल्कि प्रवृत्तियों (mindsets) पर था।

उन्होंने “लीडर” को आदर्श, पारदर्शी और टीम-ओरिएंटेड बताया, जबकि “पॉलिटिशियन” को स्वार्थी, चालाक और षड्यंत्रकारी प्रवृत्ति के रूप में पेश किया।

इसी तरह “ज्योतिष” को सकारात्मक मार्गदर्शक और “तांत्रिक” को भय व नकारात्मकता फैलाने वाला बताया।

विवाद क्यों हुआ?

असल समस्या यहीं से शुरू होती है। उनकी तुलना भले ही सैद्धांतिक रही हो, लेकिन भाषा और उदाहरण इतने तीखे थे कि लोगों ने इसे सीधे-सीधे समकालीन नेताओं या स्थानीय राजनीतिक समीकरणों से जोड़ दिया।

राजनीति में “पॉलिटिशियन” शब्द का इस तरह नकारात्मक इस्तेमाल खुद उनके ही वर्ग पर सवाल खड़ा करता है—यही कारण है कि सोशल मीडिया पर लोग “इशारा किसकी तरफ़ है” खोजने लगे।

सफाई या रणनीति?

उनका यह लंबा पोस्ट तीन स्तरों पर काम करता है:

सफाई (Clarification): यह बताने के लिए कि उन्होंने किसी पर व्यक्तिगत हमला नहीं किया

रक्षा (Defensive positioning): विवाद से खुद को अलग दिखाने की कोशिश

पलटवार (Subtle counter): “अगर कुछ लोग कुछ और ही समझ रहे हैं…” जैसे वाक्य उनके आलोचकों पर ही सवाल खड़े करते हैं

राजनीतिक संदेश क्या है?

गहराई से देखें तो यह पोस्ट एक मोरल पोजिशनिंग (नैतिक आधार बनाने) की कोशिश है। जोशी खुद को “लीडर” वाली श्रेणी के करीब और विरोधियों को “पॉलिटिशियन/तांत्रिक प्रवृत्ति” में अप्रत्यक्ष रूप से रख देते हैं—बिना नाम लिए।

 

प्रकाश जोशी ने भले ही इसे वैचारिक बहस के रूप में पेश किया हो, लेकिन उनके उदाहरण इतने धारदार थे कि विवाद होना लगभग तय था। आख़िर में उनका यह संदेश सही है कि यह “तराज़ू” सबके लिए है—लेकिन राजनीति में हर तराज़ू को लोग पहले दूसरों पर ही रखकर तौलते हैं, खुद पर बाद में।

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