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बिल्डर हत्या केस में बड़ा खुलासा, नौकर ने ऐशोआराम के लिए किया कत्ल, पढ़ें आरोपी का कबूलनामा

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राजधानी दिल्ली के सिविल लाइंस पॉश कॉलोनी में बिल्डर की हत्या मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. दिल्ली पुलिस ने बताया कि घर के अंदर काम कर चुके पुराने नाबालिग नौकर ने ऐशोआराम भरी लाइफ स्टाइल, अमीरों वाली जिंदगी जीने के लिए फुलप्रूफ प्लानिंग के तहत अपने पुलिस मालिक की हत्या कर दी. वारदात के बाद भागने के लिए वहीं से बाइक भी चुराई. आरोपियों ने मर्डर करने के गुर गूगल और यूट्यूब से सीखे.

स्पेशल सीपी लॉ एंड ऑर्डर दीपेंद्र पाठक ने बताया कि 1 मई को दिल्ली नार्थ जिले में एक 76 साल के बुजुर्ग राम किशोर अग्रवाल (बिल्डर) का मर्डर हुआ था, कई टीमों ने मिलकर मामले की जांच की, जिसमें क्राइम ब्रांच और दूसरी टीमें थीं. सर्विलांस, सैकड़ों सीसीटीवी फुटेजों को खंगाला गया. इन टीमों के जॉइंट प्रयास से 2 जुवेनाइल (नाबालिगों) को पकड़ा गया. दोनों को मृतक के घर की सारी जानकारी थी. एक जुवेनाइल मृतक के घर मे काम कर चुका है. उसके पिता भी बिल्डर के घर पर कई साल तक काम किया है.

बिल्डर की हत्या के मामले में पुलिस ने तेजी से जांच की और आरोपियों को पकड़कर मामले का खुलासा कर दिया है.

बिल्डर के घर पहुंचने के लिए किया मेट्रो का प्रयोग 

पुलिस के मुताबिक, बिल्डर के घर आने के लिए दोनों नाबालिगों ने मेट्रो का इस्तेमाल किया था. पुलिस ने दोनों के पास से 10 लाख 37 हजार रुपये बरामद किए हैं. दोनों आरोपियों ने बताया कि वह गेट फांदकर बिल्डर के घर में घुसे थे. दोनों एक ही गांव के रहने वाले हैं, स्कूल से हटकर ऐशोआराम की जिंदगी जीना चाहते थे. उन्होंने पुलिस को बताया कि उन्हें पता था कि बिल्डर के घर का दरवाजा साढ़े 5 बजे खुल जाता है, उस समय गार्ड सोए रहते हैं. किस जगह पैसा रखा रहता है सब पता था.

पहले भी एक नाबालिग साउथ दिल्ली में काम कर चुका है. एक ही गांव के थे. बुजुर्ग बिल्डर ने उनको पहचान कर विरोध किया. पूछताछ में सामने आया कि गूगल और यूट“यूब का इस्तेमाल किया था कि बाइक कैसे चोरी होती है, उसकी वायर कैसे तोड़ी जाती है. एक टैटू भी बनाया था.

केस को खोलने में सीसीटीवी कैमरों ने काफी मदद की 

स्पेशल सीपी क्राइम रविन्द्र यादव ने बताया कि क्राइम ब्रांच की टीम ने बेहतरीन काम किया. सीसीटीवी ने इस केस को खोलने में काफी मदद की. ये आरोपी एक दिन पहले भी आए थे, जिस बाइक से आए उस दिन वापस बाइक से नही गए. दूसरा फोन का इस्तेमाल हुआ था. तो उस पहलू पर काम करते हुए
2 दिन पहले बाइक चुराकर पहले ही भागने के लिए कॉलोनी के अंदर रख दिया. अगले दिन ई रिक्शा से आए. एक जुवेनाइल जिसने वहां काम किया था, उसे सब पता था कि दिनचर्या क्या है, कब कौन उठता है, कौन कहां जाता है. ये मर्डर करने के बाद बिहार भागना चाहते थे. पुलिस ने सभी मूवमेंट को ट्रैक किया.

सभी स्टेशनों पर टीम अलर्ट थी अगले दिन मेट्रो का इस्तेमाल नही किया लेकिन 3 तारीख को मेट्रो पकड़ी. तभी पुलिस टीम ने राजीव चौक पर जाते ही सतर्क हुई और पकड़ लिया. इन्होंने एक कमरा मुकुंदपुर में 1700 किराये का लिया, जिसमें 11 लाख रुपये नकद और कीमती घड़ियां रखी थीं.

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