उत्तराखण्ड
चाय के कप में उतर आई राजनीति, चीनी गायब, महंगाई हाजिर: कांग्रेस ने पिलाई ‘फीकी चाय’, सरकार को याद दिलाई मिठास
चाय के कप में उतर आई राजनीति, चीनी गायब, महंगाई हाजिर: कांग्रेस ने पिलाई ‘फीकी चाय’, सरकार को याद दिलाई मिठास
हल्द्वानी। महंगाई की मार अब इतनी गहरी हो गई है कि चाय के कप में भी राजनीति उतर आई है। चीनी के बढ़ते दामों के विरोध में हल्द्वानी महानगर कांग्रेस ने तिकोनिया चौराहे पर अनोखा प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आमजन और राहगीरों को बिना चीनी की फीकी चाय पिलाई और इसे महंगाई के खिलाफ अपना ‘स्वादहीन’ लेकिन सियासी संदेश बताया।
कार्यक्रम का संदेश साफ था—चीनी महंगी है, इसलिए चाय फीकी है और अगर हालात ऐसे ही रहे तो त्योहारों की मिठास भी फीकी पड़ सकती है।

हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार महंगाई के आंकड़ों में भले ही राहत ढूंढ ले, लेकिन रसोई में पहुंचते ही ये आंकड़े आम आदमी को काफी कड़वे लगते हैं। चाय में चीनी कम होने से लेकर खाने के तेल की कीमत बढ़ने तक, घरेलू बजट पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि मुद्दा सिर्फ एक कप चाय में चीनी का नहीं है। असली चिंता उस परिवार की है जो महीने का बजट बनाते समय हर सामान की कीमत जोड़ने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन और जन्माष्टमी जैसे त्योहार सामने हैं। ऐसे में चीनी और खाद्य तेल महंगे होने का सीधा असर मिठाइयों और घर में बनने वाले पकवानों पर पड़ेगा। यानी त्योहार आएंगे तो सही, लेकिन मिठाई का डिब्बा खरीदने से पहले जेब शायद दो बार सोचने लगेगी।
उन्होंने सरकार से महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण की मांग करते हुए कहा कि केवल आंकड़ों से जनता की परेशानी नहीं समझी जा सकती। सरकार को उस मां की चिंता समझनी होगी जो त्योहार पर बच्चों के लिए मिठाई खरीदना चाहती है और उस बहन की भी, जो रक्षाबंधन पर भाई का मुंह मीठा कराना चाहती है।
महानगर कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट गोविंद सिंह बिष्ट ने कहा कि चीनी, खाद्य तेल और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में बढ़ोतरी से आम आदमी की कमर टूट रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बाजार में पर्याप्त स्टॉक है तो फिर चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? यदि जमाखोरी और कालाबाजारी जिम्मेदार है तो सरकार इस पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?
कप में चाय कम, संदेश ज्यादा था
प्रदर्शन की खास बात यह रही कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहगीरों को चाय तो दी, लेकिन चीनी के बिना। चाय का स्वाद भले ही फीका रहा हो, मगर कांग्रेस का राजनीतिक संदेश काफी ‘मीठा’ था—महंगाई कम करो, वरना जनता की चाय से लेकर त्योहारों की मिठाई तक सब फीका पड़ जाएगा।
कार्यकर्ताओं ने “महंगी चीनी, फीकी चाय”, “महंगाई पर लगाम लगाओ” और “आम जनता को राहत दो” जैसे नारे लगाए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि फीकी चाय महंगाई के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध है। जब रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर त्योहारों की खुशियों तक पर महंगाई का असर दिखाई देने लगे तो सरकार को जनता की आवाज सुननी चाहिए।
कार्यक्रम में ललित जोशी, मलय बिष्ट, जया कर्नाटक, मधु सांगूड़ी, नीमा भट्ट, राधा आर्य, विमला सांगूड़ी, भागीरथी बिष्ट, कमला सनवाल, दीपा खत्री, हेम पांडे, किरन माहरा, हेमंत बगड़वाल, गिरीश पांडे, महेश कांडपाल, राजेंद्र बिष्ट, दीप पाठक, बहादुर बिष्ट, राकेश बृजवासी, विनोद कुमार, हिमांशु जोशी, महेशानंद, जीवन कार्की, अवध बिहारी शर्मा, गोविंद बगड़वाल, जगमोहन चिलवाल, राजू रावत, शंकर कोहली, प्रदीप नेगी, खीमानंद पांडे, संदीप भैसोड़ा, संजू उप्रेती, हेम जोशी, राजू सुयाल, मनोज टम्टा, कैलाश साह, संदीप पांडे, मनोज शर्मा, जीत सिंह, मनोहर सांगुड़ी, बंटू रहमान, प्रदीप बिष्ट, एडवोकेट कोमल जायसवाल, बबलू बिष्ट, उदित करायत समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
फिलहाल तिकोनिया में चाय फीकी थी, लेकिन सियासत गर्म थी। अब देखना यह है कि कांग्रेस की यह ‘फीकी चाय’ महंगाई के मुद्दे पर सरकार के लिए कितनी कड़वी साबित होती है।

