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महिला दरोगा विवाद: आरोपों के बीच अधिवक्ता का पलटवार, जांच का हवाला देकर बताया मामला भ्रामक

महिला दरोगा विवाद: आरोपों के बीच अधिवक्ता का पलटवार, जांच का हवाला देकर बताया मामला भ्रामक

हल्द्वानी। पुलिस विभाग में तैनात एक महिला दरोगा पर लगे फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आरोपों ने बीते दिनों सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा कर दी थी। इन आरोपों को लेकर जहां उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर सवाल उठाए थे, वहीं अब दरोगा पक्ष की ओर से भी जोरदार पलटवार सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल हो रहा है जो की कथित तौर पर एक पत्रकार और आरोपी दारोगा के अधिवक्ता के बीच का है। हालांकि कस्तूरी न्यूज़ इस बात की पुष्टि नहीं करता है।

दरोगा की ओर से पेश अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह मामला नया नहीं है, बल्कि पहले ही कई स्तरों पर इसकी जांच हो चुकी है। उन्होंने बताया कि राजस्थान हाई कोर्ट के निर्देशों के तहत इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जा चुकी है, जिसमें कोई भी गड़बड़ी साबित नहीं हुई। इसके अलावा विभागीय स्तर पर भी एक से अधिक बार जांच पूरी की जा चुकी है।

अधिवक्ता के अनुसार, दरोगा के सभी शैक्षणिक दस्तावेज पहले से ही विभाग के पास उपलब्ध हैं और उनकी सत्यता की पुष्टि भी की जा चुकी है। इसके बावजूद अधूरी और भ्रामक जानकारी के आधार पर इस मुद्दे को बार-बार उछाला जा रहा है, जिससे अनावश्यक विवाद खड़ा हो रहा है।

उन्होंने बेरोजगार संघ पर निशाना साधते हुए कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है, जिससे आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति बन रही है। अधिवक्ता ने आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताते हुए कहा कि यदि किसी के पास ठोस साक्ष्य हैं, तो उन्हें सक्षम मंच पर प्रस्तुत करना चाहिए, न कि मीडिया ट्रायल के जरिए माहौल खराब करना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने हाल ही में “ऑपरेशन थंडर ब्लास्ट” अभियान के तहत हल्द्वानी में तैनात महिला दरोगा पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने का आरोप लगाया था। संघ के पदाधिकारियों का दावा था कि दरोगा की 10वीं, 12वीं और स्नातक की पढ़ाई अलग-अलग राज्यों से संदिग्ध तरीके से दर्शाई गई है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी हलचल देखी गई थी, जबकि सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हुआ।

अब आगे क्या?

एक तरफ जहां बेरोजगार संघ इस मामले की दोबारा स्वतंत्र जांच की मांग पर अड़ा हुआ है, वहीं दरोगा पक्ष पहले से हो चुकी जांचों का हवाला देकर इसे बेवजह का विवाद बता रहा है।

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