उत्तराखण्ड
राम माधव की फिर बड़ी वापसी, अब उत्तराखंड की कमान; 2027 से पहले भाजपा के इस फैसले के मायने क्या…
नई दिल्ली/देहरादून। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की कमान को लेकर बड़ा फैसला किया है। पार्टी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव को उत्तराखंड का प्रभारी नियुक्त किया है। उनके साथ अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज को सहप्रभारी बनाया गया है। खास बात यह है कि राम माधव लंबे संगठनात्मक अनुभव के बाद भाजपा की राष्ट्रीय टीम में दोबारा प्रमुख भूमिका में लौटे हैं और अब उन्हें उत्तराखंड जैसे चुनावी राज्य की जिम्मेदारी दी गई है।
राम माधव का राजनीतिक सफर भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण चुनावी और रणनीतिक जिम्मेदारियों से जुड़ा रहा है। वह 2014 से 2020 तक भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रहे और जम्मू-कश्मीर तथा पूर्वोत्तर राज्यों में पार्टी के विस्तार से जुड़े रहे। 2020 में राष्ट्रीय महासचिव पद से हटने के बाद वह कुछ समय पार्टी की सक्रिय राष्ट्रीय भूमिका से अपेक्षाकृत दूर रहे। 2024 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें फिर पार्टी की चुनावी जिम्मेदारी दी गई।
यहीं से उत्तराखंड की नई जिम्मेदारी का राजनीतिक संदर्भ महत्वपूर्ण हो जाता है। राम माधव को दोबारा संगठन की राष्ट्रीय टीम में जगह मिलने के बाद अब किसी राज्य की जिम्मेदारी मिलना बताता है कि पार्टी उनके पुराने संगठनात्मक अनुभव का इस्तेमाल चुनावी राज्यों में करना चाहती है। हालांकि उत्तराखंड की जिम्मेदारी को लेकर पार्टी ने नियुक्ति का कोई अलग कारण सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।
जम्मू-कश्मीर में भाजपा के लिए गठबंधन और चुनावी रणनीति से लेकर पूर्वोत्तर में संगठन विस्तार तक राम माधव की भूमिका पहले चर्चा में रही है। 2015 में जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन तैयार करने में भी वह प्रमुख वार्ताकारों में शामिल थे।
अब सवाल उत्तराखंड का है। राज्य में भाजपा लगातार दूसरी बार सरकार चला रही है और 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने का लक्ष्य उसके सामने होगा। ऐसे समय में प्रदेश संगठन को चुनावी मोड में ले जाना, बूथ स्तर की मशीनरी को सक्रिय करना, सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाना तथा स्थानीय स्तर से मिलने वाले राजनीतिक फीडबैक को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाना नई टीम की प्रमुख जिम्मेदारियों में रहेगा।
राम माधव के साथ अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज की नियुक्ति से यह भी संकेत मिलता है कि उत्तराखंड की जिम्मेदारी को केवल नियमित संगठनात्मक कामकाज तक सीमित नहीं रखा गया है। आने वाले महीनों में प्रदेश संगठन, सरकार और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिखाई दे सकता है।
यानी 2027 की चुनावी बिसात पर भाजपा ने उत्तराखंड में एक अनुभवी संगठनात्मक चेहरे को आगे किया है। अब देखना यह होगा कि राम माधव की रणनीतिक शैली उत्तराखंड के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों, पहाड़-मैदान के मुद्दों और बूथ स्तर की चुनावी तैयारी के साथ किस तरह तालमेल बैठाती है।

