अपराध
बड़ा खेल : नगर पंचायत अध्यक्ष समेत 4 हिरासत में, बाजपुर में फर्जी प्रमाणपत्रों का खेल उजागर, 19 संदिग्ध मामलों की भी जांच
बाजपुर। उत्तराखंड के बाजपुर में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश और सरकारी सेवाओं के लिए फर्जी स्थानीय प्रमाणपत्र तैयार कराने के मामले का खुलासा हुआ है। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के पीलीभीत क्षेत्र के एक नगर पंचायत चेयरमैन, एक महिला समेत चार संदिग्धों को हिरासत में लिया है। सभी से पूछताछ कर प्रमाणपत्र तैयार कराने वाले नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।
प्रारंभिक जांच में प्रमाणपत्रों में गलत पते दर्ज किए जाने, फर्जी मकान मालिक और रिश्तेदारों को गवाह के रूप में प्रस्तुत करने तथा दस्तावेजों में कूटरचना किए जाने के संकेत मिले हैं। प्रशासन ने मामले में मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
एडीएम पंकज उपाध्याय ने बुधवार देर रात बताया कि शासन, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी के निर्देश पर मेडिकल, इंजीनियरिंग तथा सेवायोजन से संबंधित प्रमाणपत्रों का एसडीएम स्तर पर अनिवार्य भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। इसी क्रम में बाजपुर एसडीएम के समक्ष मेडिकल कॉलेज में प्रवेश से जुड़े कुछ प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए पहुंचे थे। मौके पर जांच के दौरान उनमें दर्ज कई पते संदिग्ध और फर्जी पाए गए।
पूछताछ आगे बढ़ी तो यह बात सामने आई कि प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए कुछ बाहरी लोगों को फर्जी मकान मालिक और चाचा-रिश्तेदार के रूप में अधिकारियों के सामने पेश किया गया था। जांच में उत्तर प्रदेश के बरेली और आसपास के क्षेत्रों के लोगों द्वारा बाजपुर के पते पर अवैध तरीके से उत्तराखंड के स्थानीय प्रमाणपत्र हासिल करने की कोशिश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
प्रशासन को आशंका है कि इस पूरे मामले में वोटर लिस्ट, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर, आधार कार्ड और शैक्षणिक प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेजों में हेरफेर कर कूटरचित कागजात तैयार किए गए। नगर पंचायत चेयरमैन की कथित भूमिका को लेकर भी जांच जारी है। एडीएम ने स्पष्ट किया कि पूछताछ और प्राथमिक जांच में महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, लेकिन चेयरमैन की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि विस्तृत जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम के साथ एसडीएम ऋचा सिंह, सीओ अखिलेश कुमार, कोतवाल नरेश चौहान, तहसीलदार प्रताप सिंह चौहान और राजस्व विभाग की टीम तहसील में मौजूद रही। हिरासत में लिए गए लोगों से प्रमाणपत्र तैयार कराने वाले नेटवर्क, दस्तावेज जुटाने वाले बिचौलियों और स्थानीय स्तर पर संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी ली जा रही है।
प्रशासन के अनुसार अब तक सामने आए मामलों में मेडिकल कॉलेजों में दाखिले से जुड़े प्रमाणपत्रों की संख्या सबसे अधिक है। जांच इस बिंदु पर भी केंद्रित है कि कहीं फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपात्र अभ्यर्थियों को राज्य कोटे की सीटों पर प्रवेश तो नहीं दिलाया गया और इससे स्थानीय पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित तो नहीं हुए।
अधिकारियों ने पुलिस को स्थानीय कार्यालयों के कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत के साथ-साथ पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क की भी जांच करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि यदि किसी अभ्यर्थी ने गलत दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश हासिल किया है तो उसका प्रवेश निरस्त करने और संबंधित सीट को रिक्त कराने की कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से सामने आए 19 अन्य संदिग्ध प्रकरण भी संबंधित उपजिलाधिकारियों को सौंप दिए गए हैं। इन मामलों में तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी गई है। जांच में फर्जी पाए जाने वाले प्रमाणपत्रों को निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

