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उत्तराखण्ड

दुःखद: करंट की चपेट में आने से मामा भांजे की मौत

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दिनेशपुर। जंगल से सटे चंडीपुर गांव में जानवरों से फसल की सुरक्षा के लिए खेत में लगाए गए बिजली के तार में करंट आने से उसकी चपेट में आकर मामा-भांजे की मौत हो गई। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

ग्राम चंडीपुर निवासी किसान राजबिहारी राय (55) लोगों के खेत बटाई पर लेकर खेती करते थे। वर्तमान में उन्होंने गांव के ही शेर सिंह की चार एकड़ जमीन पर धान की फसल लगाई थी। परिजनों के अनुसार शनिवार रात खेत में ट्यूबवेल से सिंचाई की जा रही थी। राजबिहारी गांव के ही अपने सगे मामा मनीपद मंडल (50) को साथ लेकर खेत का निरीक्षण करने गए थे। इस दौरान दोनों खेत में जानवरों से फसल के बचाव के लिए लगाई गई बिजली के तार-बाड़ में करंट आने से उसकी चपेट में आ गए और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। रातभर दोनों के शव खेत में ही पड़े रहे।रविवार तड़के एक ग्रामीण ने दोनों के शव खेत के पास पड़े देखे तो अन्य ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। सूचना पर एसआई प्रदीप भट्ट पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। उधर दोनों की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। पोस्टमार्टम के बाद शाम को दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

मौसमी फसल और सब्जी की खेती करते थे

दिनेशपुर। करंट की चपेट में आकर जान गंवाने वाले राजबिहारी कई लोगों के खेतों को बटाई पर लेकर खेती करते थे। वह मौसमी फसल के साथ ही सब्जी की खेती भी करते थे। इसके लिए वह कई बार रात में खेत में बनाए गए मचान में ही रुक जाते थे। शनिवार देर रात जब वह घर नहीं लौटे तो परिजनों ने सोचा कि वे खेत में ही रुक गए होंगे। ग्रामीणों का कहना था कि परिजनों ने शायद इसलिए रात को राजबिहारी की खोजबीन नहीं की। कुछ ऐसा ही सोचना मनीपद के परिजनों का भी था।

मामा-भांजे नहीं जिगरी दोस्त की तरह रहते थे राजबिहारी और मनीपददिनेशपुर। खेत में तारबाड़ में आए करंट की चपेट में आकर जान गंवाने वाले राजबिहारी और मनीपद वैसे तो मामा-भांजे थे लेकिन वह जिगरी दोस्त की तरह रहते थे। दिनभर मेहनत मजदूरी के बाद घर लौटने पर दोनों अक्सर जरूर मिलते थे। उठना-बैठना, खाना-पीना एक साथ होता था। रविवार तड़के जब चंडीपुर के लोगों को दोनों मौत की खबर मिली तो ग्रामीण स्तब्ध रह गए। पूरे गांव में एकाएक मातम पसर गया। हर कोई घटना स्थल की ओर दौड़ पड़ा। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं।राजबिहारी मनीपद का सगा भांजा था। दोनों का घर गांव में ही सड़क पार कुछ दूरी पर है। दोनों के परिवार देश विभाजन के बाद विस्थापित होकर इस गांव में आकर बसे थे। सरकार ने तब गुजर-बसर के लिए उन्हें जमीन का आवंटन किया था। वर्तमान में मामा मनीपद के पास मात्र आधा एकड़ जमीन बची है जबकि राजबिहारी की जमीन उसके पिता वर्षों पहले बेच चुके हैं। राजबिहारी वर्तमान में लघु किसान के रूप में बटाई का काम कर का गुजर-बसर करता था। उसके परिवार में पत्नी चंपा के अलावा दो पुत्र विजय और संजीव हैं जो सिडकुल की फैक्टरी में काम करते हैं। उसकी दोनों बेटियाें की शादी हो चुकी है।मनीपद के पास पुस्तैनी आधा एकड़ जमीन है। इसके अलावा वह आजीविका के लिए ई-रिक्शा चलाता था। परिवार में पत्नी ज्योतिका के अलावा दो पुत्र अमित और वासुदेव है। दोनों सिडकुल में श्रमिक हैं। दोनों की शादी हो चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार शनिवार की रात भी दोनों मिले और खेत जाने का कार्यक्रम तय हुआ। अपने-अपने घर खाना खाने के बाद दोनों गांव के पूर्वी छोर की ओर स्थित खेत की तरफ निकल गए लेकिन दोनों को शायद यह नहीं मालूम था कि यह उनका आखिरी सफर है। संवादफसल को बचाने के लिए छोड़ते हैं करंटदिनेशपुर। जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा के लिए खेत में लगाई गई बिजली की तार में बह रही करंट की चपेट में आकर मामा भांजे की मौत के बाद जंगल से सटे ग्रामीण क्षेत्र में किसानो के चेहरे उतरे हुए हैं। किसानों का कहना है क़ि अब आगे उन्हें सुरक्षा के और कड़े इंतजाम करने होंगे। उनका कहना है कि वन विभाग की उदासीनता के चलते उन्हें अपने-अपने खेत में जमीन से डेढ़ फुट तक बिजली के तार लगाकर रात को उसमें करंट छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि वन विभाग से वार्ता कर समस्या का समाधान करने की मांग की गई थी। इसके बाद कुछ समय तक धीमरी ब्लॉक क्षेत्र के जंगल किनारे खेतों में वन विभाग ने अभियान भी चलाया था लेकिन कुछ दिन बाद अभियान को बंद कर दिया गया।

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संपादक - कस्तूरी न्यूज़

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