उत्तराखण्ड
संजय नेगी युवाओं को बड़ी संख्या में पार्टी से जोड़ने का माध्यम बन सकता है: रावत, खुलकर नेगी के समर्थन में पूर्व सीएम…आनंद रावत समेत लंबी चौड़ी पोस्ट से दिए कई सवालों के जवाब
पोस्ट हूबहू….
प्रिय गजेंद्र भाई, शीशपाल भाई, गुणानंद जखमोला भाई!
मैं आप सब लोगों की लेखनी और भावनाओं का कदरदान हूँ। उत्तराखंड की वर्तमान स्थिति और कांग्रेस के सामने चुनौती आदि को लेकर आपकी पोस्ट ने मुझे बहुत उद्वेलित किया है। अर्जित अवकाश लेने के निर्णय के दौरान मैं श्री संजय नेगी तथा ऐसे कुछ और नौजवान, जो मेरे संपर्क में हैं, कांग्रेस में आना चाहते हैं या उभरना चाहते हैं, उनको यह संदेश देना चाहता था कि धैर्य रखो, मैं तुम्हारे लिए प्रयासरत हूँ। मैंने कांग्रेस में सम्मिलित हुए चार साथियों को अपने ढंग से कांग्रेस का दामन थामने के लिए प्रेरित और उत्साहित किया और ये लोग निरंतर मेरे संपर्क में भी थे। जब भी पिछले दिनों ये लोग मुझसे भेंट करने आए, तो मैंने इन लोगों को यह राय दी कि आप अमुख-अमुख नेता से भी मिलिए। स्थानीय नेताओं के कुछ स्वाभाविक सवाल थे। मैंने यथासंभव उनके निदान में सहयोग दिया। श्री तिलक राज बेहड़ जी, श्रीमती मीना शर्मा, श्री मोहन खेड़ा आदि मेरे प्रयासों के साक्षी हैं। यही प्रयास मैंने सितारगंज और घनसाली में भी किया। इन साथियों की जॉइनिंग के बाद मैं इन्हें बधाई दे चुका हूँ।
मैं अपने अर्जित अवकाश से उत्पन्न अनचाहे विवाद से दुःखी हूँ। मुझे कष्ट है कि मेरी पार्टी के लोगों को सार्वजनिक रूप से मुझसे यह कहना पड़ रहा है कि (किसी व्यक्ति को यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि वह नहीं रहेंगे तो पार्टी नहीं रहेगी)। मेरे मन में कभी भी यह अहंकार पैदा नहीं हुआ। मैं उन लाखों कांग्रेसजनों में से हूँ, जिन्होंने पार्टी और पार्टी नेतृत्व के इतर न कुछ देखा है और न समझा है।
मेरे कारण शीर्ष में स्थापित किसी भी साथी का उत्साहपूर्ण योगदान कुप्रभावित न हो, इसीलिए मैंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि मैं 2027 का चुनाव नहीं लड़ूँगा और पार्टी का ढोल बजाकर विजय के लिए काम करूँगा। पार्टी में एक लंबे अंतराल से काम करते-करते बहुत सारे लोग मुझसे जुड़े हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों व अन्य स्तरों पर पार्टी में अपना योगदान दे रहे हैं। मैं अपने को तो समेट सकता हूँ, मगर पार्टी के हित में इन लोगों के योगदान को पार्टी से जोड़ने के लिए मुझे प्रयास करना चाहिए, जो मैं करता रहता हूँ। कांग्रेस की सेवा के इस लंबे अंतराल में मुझसे जुड़े व्यक्तियों ने शायद ही कभी दूसरी पार्टियों में झाँका हो। अपनी प्रतिष्ठा के लिए स्वभावतः वे मुझसे अपेक्षा करते हैं और करनी भी चाहिए, तथा मुझे उनके लिए प्रयास भी करना चाहिए।
श्री संजय नेगी ने 2022 में मेरे चुनाव लड़ने को लेकर उत्पन्न परिस्थितियों के कारण भावावेश में चुनाव लड़ा। हमें आगे 20-25 साल के लिए काम करने वाले लोग भी तो तैयार करने हैं। संजय नेगी एक ऐसा नौजवान हो सकता है और युवाओं को बड़ी संख्या में पार्टी से जोड़ने का माध्यम बन सकता है। मैंने अपने राजनीतिक जीवन के प्रारंभ से ही लोगों को पार्टी में जोड़ने का काम किया है। आज सामान्य घरों से आए जिन लोगों को मैंने आगे बढ़ाया, वे अपने-अपने क्षेत्रों या राज्य में कांग्रेस की पहचान हैं।
मैं 2027 के महत्व को समझता हूँ। निश्चय ही यह चुनाव मेरे लिए कांग्रेस को विजयी बनाने के अभियान में प्रभावी योगदान देने का अंतिम अवसर है। आखिर निरंतर बढ़ती उम्र में शरीर कब तक साथ देगा! मैं लालायित हूँ कि उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बने। मेरे योगदान के स्वरूप को तय करना पार्टी की राज्य इकाई का दायित्व है; वह जिस रूप में भी मेरे योगदान की अपेक्षा करे, मैं तत्पर हूँ। मैं पार्टी में बोझ भी नहीं बनना चाहता हूँ। स्वभाव से मुझमें चलने-फिरने, लोगों से संपर्क करने और कहीं कुछ अनहोनी हो जाए तो लोगों के दर्द में सम्मिलित होने की आदत है और वर्षों से पड़ी इस आदत को न मैं छोड़ सकता हूँ। वर्षों से सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता हूँ, विभिन्न विषयों पर कुछ निश्चित राय भी रखता हूँ। प्रेस के दोस्तों से भी मेरे अच्छे संबंध हैं; वे भी गाहे-बगाहे, मैं जब भी दिल्ली या कहीं जाता हूँ, तो समसामयिक विषयों पर मेरी राय लेने आ जाते हैं—उनकी कृपा है। मुझे अनावश्यक विवादों में घसीटने के बजाय मेरे दोस्तों को यह मान लेना चाहिए कि यह एक ऐसा बूढ़ा है, जो गलत होने पर खाँसेगा ही।
मेरे कई दोस्त बार-बार 2017 और 2022 की चुनावी हारों का जिक्र करते हैं! उत्तरी भारत में इस दौर में जहाँ भी चुनाव हुए, वहाँ कांग्रेस सहित विपक्ष को हार का मुँह देखना पड़ा है। मत प्रतिशत में भी भारी गिरावट आई है। हिमाचल में हम अवश्य 2022 में जीते और झारखंड में हम एक पार्टनर के रूप में जीत के सहभागी बने। उत्तराखंड में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अथक प्रयास से विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कांग्रेस 35 प्रतिशत और उससे ऊपर मत प्रतिशत बनाए रखने में सफल हुई है। हम हारे, मगर हमारे वोट बढ़े हैं। आपकी अपेक्षा उचित है कि इस वोट प्रतिशत के साथ हम थोड़ा और प्रयास करें, तो भाजपा को पराजित कर सकते हैं। मुझ पर टिप्पणी करने वाले मेरे छोटे व बड़े भाइयों को इस तथ्य को याद रखना चाहिए कि मोर्चे पर लड़ने वाला सिपाही हार जाता है, तो उसे गाली नहीं दी जाती; कहा जाता है—आगे प्रयास करो। ऐसे सभी साथी जानते हैं, जब युद्ध का बाजा बजेगा, तो हरीश रावत फिर युद्धभूमि में दिखाई देगा।
यदि मुझे हतोत्साहित किया जाएगा, सोशल मीडिया और मीडिया में मेरा सार्वजनिक ट्रायल किया जाएगा, तो फिर मेरे पास घर बैठने के अलावा विकल्प क्या बचेगा? मैं जानता हूँ, मेरे साथियों में से प्रत्येक व्यक्ति चुनावी रणभूमि में मुझे अपने साथ देखना चाहेगा। मैं किसी से नाराज नहीं हूँ और मेरी उपेक्षा हो रही है, ऐसी कोई स्थिति नहीं है। मैं पार्टी की शीर्ष संस्था कार्यसमिति में हूँ; नेतृत्व के साथ यदा-कदा लोग मेरे फोटो भी देखते होंगे। मैं अब 2002, 2007, 2012, 2017 व 2022 का हरीश रावत नहीं हो सकता हूँ। फिर भी मैं संपूर्ण शक्ति से कार्य करूँगा, आप निश्चिंत रहें। मेरे अर्जित अवकाश और इसके आगे-पीछे के प्रसंगों का समाधान पार्टी के लिए आवश्यक है। मैं उस पर पार्टी हित में जोर देता रहूँगा।
मैं संतान मोह में बँधा व्यक्ति नहीं हूँ। यदि ऐसा मोह होता, तो अच्छे अवसर पर मैं उन्हें चुनाव लड़वाता। मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान भी मेरे पुत्र, पुत्री, भाई, दामाद या निकटस्थ रिश्तेदार मुख्यमंत्री आवास में बहुत कम ही दिखाई दिए होंगे। किसी ठेके, भूखंड जैसे आवंटनों से उन्हें दूर रखा। बेटी उस क्षेत्र से चुनाव लड़ी, जहाँ 40-45 वर्षों से विधानसभा में कभी कांग्रेस नहीं जीती। लोकसभा के चुनाव में भी कोई स्थानीय व्यक्ति उम्मीदवार नहीं था, इसीलिए बेटे को उम्मीदवार बनाया।
मेरा उन्हें स्पष्ट निर्देश है कि यदि राजनीति में रहना और चुनाव लड़ना आवश्यक है, तो ऐसे क्षेत्रों को चुनें, जहाँ कांग्रेस लगातार पराजित हो रही हो। मेरी संतान को आपने कभी आडंबर और दिखावा करते नहीं देखा होगा। आपका विश्लेषण तार्किक है, अच्छा लगा और मैं आपकी टिप्पणियों को एक सलाह के रूप में ग्रहण कर रहा हूँ।