उत्तराखण्ड
जानिए कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा के छात्र जीवन से लेकर के अब तक का सफर
भीमताल से निर्दलीय विधायक बने राम सिंह कैड़ा, भाजपा ने 2022 में जताया था भरोसा
नैनीताल जिले की भीमताल विधानसभा सीट से राम सिंह कैड़ा का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव जीतने वाले कैड़ा पर वर्ष 2022 में भारतीय जनता पार्टी ने भरोसा जताते हुए उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया।
राम सिंह कैड़ा का जन्म 15 मार्च 1974 को ओखलकांडा ब्लॉक के कैड़ा गांव में हुआ। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की। वर्ष 1993 में एमबी इंटर कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष बने। इसके बाद 1994 में एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में उप सचिव, 1997 में सचिव और 1999 में अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए। वर्ष 2001 में कुमाऊं यूनिवर्सिटी नैनीताल के छात्र महासंघ अध्यक्ष और उसी साल उत्तराखंड संयुक्त छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष भी रहे।
राज्य आंदोलन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। बाद में वे कांग्रेस से जुड़े और लंबे समय तक पार्टी में सक्रिय रहे। वर्ष 2008 में जिला पंचायत सदस्य बने और क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में भी काम किया। 2012 में उन्होंने भीमताल सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली।
2017 में जब कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो उन्होंने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। मजबूत जनाधार के दम पर उन्होंने चुनाव जीतकर सभी को चौंका दिया। निर्दलीय विधायक रहते हुए भी उनका झुकाव भाजपा की ओर रहा। वे सरकार के कार्यक्रमों में सक्रिय रहे और क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर मंत्रियों से लगातार संपर्क में बने रहे।
विधानसभा कार्यकाल समाप्ति के करीब आते-आते उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा का दामन थाम लिया। पार्टी नेतृत्व से बढ़ती नजदीकियों के चलते पहले से ही उनके टिकट को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, जो अंततः सही साबित हुए और भाजपा ने उन्हें 2022 के चुनाव में भीमताल से प्रत्याशी घोषित किया।
राम सिंह कैड़ा का यह सफर छात्र राजनीति से लेकर निर्दलीय विधायक बनने और फिर भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी बनने तक, उनके मजबूत जनसंपर्क और राजनीतिक समझ का उदाहरण माना जाता है।