उत्तराखण्ड
जिस पार्टी में आने पर विरोध के स्वर उठे उसी पार्टी में मंत्री बनकर दिखा दिया कैड़ा ने
आंदोलनों से उभरे राम सिंह कैड़ा: विरोध से लेकर मंत्री पद तक का सफर
नैनीताल जिले की भीमताल विधानसभा सीट से उभरे राम सिंह कैड़ा का राजनीतिक जीवन संघर्ष, आंदोलनों और अलग पहचान बनाने की कहानी है। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे कैड़ा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार जनहित के मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरते रहे।
राम सिंह कैड़ा ने बहुत कम उम्र में ही राजनीतिक महत्वाकांक्षा को अपने भीतर जगह दे दी थी। छात्र राजनीति के दौर में ही उन्होंने आंदोलनों को अपना हथियार बना लिया। कॉलेज के दिनों में छात्रसंघ की राजनीति करते हुए वे कई बार आंदोलन की अगुवाई करते नजर आए। यही नहीं, उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान भी उनकी सक्रिय भूमिका रही, जहां उन्होंने क्षेत्रीय मुद्दों को मजबूती से उठाया।
छात्र जीवन के बाद उनका सफर कांग्रेस संगठन तक पहुंचा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में रहते हुए भी उन्होंने केवल संगठनात्मक जिम्मेदारियां ही नहीं निभाईं, बल्कि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर लगातार आंदोलन करते रहे। सड़क, पानी, बिजली और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर उनका संघर्ष जारी रहा। इसी वजह से वे एक जमीनी नेता के रूप में पहचाने जाने लगे।
राम सिंह कैड़ा के आंदोलनों की एक खास बात उनका अनोखा अंदाज रहा है। वे पारंपरिक धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने विरोध दर्ज कराने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए। कई बार उन्होंने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया, तो कभी जूते साफ कर प्रशासन और सरकार का ध्यान खींचा। उनका “10 दिन, 10 तरह के आंदोलन” वाला अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। यही कारण रहा कि उनके आंदोलन केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर भी सुर्खियों में रहे।
राजनीतिक जीवन में एक बड़ा मोड़ तब आया जब कांग्रेस से टिकट न मिलने पर उन्होंने बगावत का रास्ता चुना। 2017 में निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल करना उनके मजबूत जनाधार का प्रमाण था। निर्दलीय विधायक रहते हुए भी उनका रुख भारतीय जनता पार्टी की ओर नरम रहा। वे सरकार के कार्यक्रमों में शामिल होते रहे और मंत्रियों से लगातार संपर्क में रहकर क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान कराते रहे।
दिलचस्प बात यह रही कि जिस भाजपा में उनके शामिल होने का कभी विरोध हुआ था, उसी पार्टी ने समय के साथ उनकी राजनीतिक ताकत को पहचाना। अंततः उन्होंने भाजपा का दामन थामा और पार्टी ने भी उन पर भरोसा जताया। आज हालात ऐसे हैं कि विरोध करने वाले भी चौंक गए, जब भाजपा ने उन्हें मंत्री बनाकर उनकी राजनीतिक हैसियत को और ऊंचा कर दिया।
राम सिंह कैड़ा का सफर इस बात का उदाहरण है कि जमीनी संघर्ष, लगातार सक्रियता और अलग पहचान बनाने का जज्बा किसी भी नेता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। आंदोलनों से निकले इस नेता ने न सिर्फ अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि जनता के बीच रहकर की गई राजनीति ही असली ताकत होती है।