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तुंगनाथ मंदिर को लेकर बीते दिनों एक खबर आई, जिसने हर किसी को चिंता में डाल दिया। ये खबर तुंगनाथ मंदिर के झुकाव से जुड़ी थी।

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क्या उत्तराखंड के तुंगनाथ मंदिर पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा? अब ASI द्वारा सामने आया पूरा सच

रुद्रप्रयाग: तुंगनाथ…दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर। रुद्रप्रयाग जिले में समुद्रतल से 3460 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर को लेकर बीते दिनों एक खबर आई, जिसने हर किसी को चिंता में डाल दिया।

ये खबर तुंगनाथ मंदिर के झुकाव से जुड़ी थी। कहा गया कि मंदिर में 10 डिग्री तक का झुकाव आया है, अब आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों ने इन खबरों का खंडन किया है। देहरादून सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् मनोज कुमार सक्सेना ने कहा कि मंदिर कितना झुका है, इसका किसी स्ट्रक्चरल इंजीनियर से अध्ययन नहीं हुआ है।

विशेषज्ञों ने ये जरूर कहा है कि सबसे ज्यादा ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर के कुंड अपने स्थान से खिसक रहे हैं। ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने प्राथमिक सर्वेक्षण के बाद इस बात को स्वीकार करते हुए इसे संरक्षित करने के लिए अधिसूचना जारी की है।

इस अधिसूचना पर आपत्तियां लेने को दो माह का समय दिया गया है। तुंगनाथ मंदिर एक हजार साल पुराना मंदिर है। वर्ष 2017 में राज्य सरकार ने केंद्र को तुंगनाथ मंदिर के संरक्षण के संबंध में प्रस्ताव भेजा था। केंद्र सरकार (संस्कृति मंत्रालय) के निर्देश पर साल 2018 में मंदिर का निरीक्षण किया गया।

तब विशेषज्ञों ने मंदिर की स्थिति में सुधार की जरूरत बताई थी। संस्कृति मंत्रालय ने 29 मार्च को तुंगनाथ मंदिर को संरक्षित करने के लिए अधिसूचना जारी की थी, जो कि भारतीय पुरातत्व विभाग को अप्रैल माह में मिली। अब विभाग ने इस पर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।

एएसआई मंदिर को अपने संरक्षण में लेना चाहती है, हालांकि बदरी केदार मंदिर समिति इसके विरोध में है। समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय का कहना है कि मंदिर के संरक्षण में वह सक्षम हैं। संरक्षण की अधिसूचना पर मंदिर समिति कड़ा विरोध जताएगी।

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