उत्तराखण्ड
असम-त्रिपुरा से हरियाणा और अब उत्तराखंड… फणीन्द्रनाथ शर्मा का संगठन सफर, जानिए कौन हैं भाजपा के नए संगठन महामंत्री
देहरादून। उत्तराखंड भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले संगठन के सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक पर नई नियुक्ति की है। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने फणीन्द्रनाथ शर्मा को उत्तराखंड का प्रदेश महामंत्री (संगठन) नियुक्त किया है। इससे पहले वे करीब तीन वर्ष तक हरियाणा भाजपा में इसी जिम्मेदारी को संभाल रहे थे। अब उनका संगठनात्मक सफर उत्तराखंड पहुंचा है।
शर्मा की खासियत यह है कि उनकी राजनीतिक पहचान किसी चुनावी जनप्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि संगठन के भीतर लंबे समय तक काम करने वाले नेता के रूप में बनी है। भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री का पद आम तौर पर आरएसएस पृष्ठभूमि वाले पूर्णकालिक संगठन कार्यकर्ताओं को दिया जाता है और यह पद भाजपा तथा संघ के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।
2018 तक असम के संगठन में सक्रिय भूमिका
फणीन्द्रनाथ शर्मा 2018 में असम भाजपा के संगठन महामंत्री रहे। जून 2018 में असम भाजपा की 13 सदस्यीय चुनावी टीम में उनका नाम संगठन महामंत्री के रूप में दर्ज था। उस समय पार्टी 2019 लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिए संगठनात्मक स्तर पर काम कर रही थी।
इसके बाद दिसंबर 2019 में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मंजूरी से शर्मा को असम के साथ त्रिपुरा में भी प्रदेश महामंत्री (संगठन) की जिम्मेदारी दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक वे असम में इससे पहले वाली प्रदेश समिति में भी संगठन महामंत्री रह चुके थे।
2018 से 2023 तक शर्मा का संगठनात्मक कार्यक्षेत्र बड़े पैमाने पर पूर्वोत्तर से जुड़ा रहा। त्रिपुरा में भी वे भाजपा के संगठनात्मक कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों से जुड़े रहे।
2023 में बदली जिम्मेदारी, पहुंचे हरियाणा
जुलाई 2023 में भाजपा ने संगठनात्मक फेरबदल किया। इसी फेरबदल में फणीन्द्रनाथ शर्मा को हरियाणा का प्रदेश महामंत्री (संगठन) बनाया गया। उस समय वे असम में संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। दूसरी ओर हरियाणा में यह जिम्मेदारी संभाल रहे जी.आर. रविंद्र राजू को असम और त्रिपुरा भेजा गया। यानी दोनों संगठन नेताओं की जिम्मेदारियों की अदला-बदली हुई।
इसके बाद लगभग तीन वर्षों तक शर्मा हरियाणा भाजपा के संगठन की कमान संभालते रहे। 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान वे पार्टी की संगठनात्मक तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका में रहे। हरियाणा विधानसभा चुनाव के समय जिला स्तर से आए टिकट संबंधी पैनलों और संगठनात्मक रिपोर्टों की समीक्षा में भी उनकी भूमिका का उल्लेख मिलता है।
हरियाणा में बूथ से लेकर चुनावी रणनीति तक सक्रिय
हरियाणा में शर्मा की सार्वजनिक गतिविधियों को देखें तो उनका जोर लगातार बूथ संगठन, कार्यकर्ता सक्रियता और संगठन के विस्तार पर रहा। जून 2026 में भिवानी के एक संगठनात्मक कार्यक्रम में उन्होंने कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीढ़ बताते हुए बूथ सशक्तीकरण को संगठन की मजबूती का आधार बताया था।
हरियाणा में वे प्रदेश की कोर कमेटी और भाजपा-आरएसएस समन्वय से जुड़ी बैठकों का हिस्सा भी रहे। 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और संघ के बीच हुई महत्वपूर्ण समन्वय बैठक में भी उनकी मौजूदगी दर्ज हुई थी।
इस दौरान उनकी भूमिका केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। लोकसभा चुनाव के बाद सोनीपत में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा बैठक में भी वे मौजूद थे और संगठन के स्तर पर चुनावी परिणामों की समीक्षा से जुड़े रहे।
अब उत्तराखंड की बारी
24 सितंबर 2026 को भाजपा ने संगठनात्मक फेरबदल करते हुए शर्मा को उत्तराखंड का प्रदेश महामंत्री (संगठन) नियुक्त कर दिया। इसके साथ ही हरियाणा में पवन राणा को नया संगठन महामंत्री बनाया गया। शर्मा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब भाजपा ने एक दिन पहले राम माधव को उत्तराखंड का प्रदेश प्रभारी तथा बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन को सहप्रभारी नियुक्त किया था।
उत्तराखंड में उनका आगमन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब उनके सामने केवल संगठन चलाने की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखने, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय, चुनावी तैयारियों और प्रदेश नेतृत्व के साथ संगठनात्मक तालमेल की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
तीन राज्यों का अनुभव, अब चौथा पड़ाव
उत्तराखंड में नई भूमिका का असली मतलब
शर्मा के उत्तराखंड आने को केवल एक पदस्थापना के तौर पर देखने के बजाय उनके पिछले संगठनात्मक अनुभव के संदर्भ में देखा जा सकता है। पूर्वोत्तर में संगठनात्मक काम, हरियाणा जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में चुनावी संगठन और अब उत्तराखंड में 2027 की तैयारी—उनके सामने तीन अलग-अलग राजनीतिक-संगठनात्मक अनुभवों को उत्तराखंड की परिस्थितियों में इस्तेमाल करने की चुनौती होगी।
उत्तराखंड में उन्हें एक ऐसे संगठन की कमान मिली है, जहां पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की अलग-अलग राजनीतिक-सामाजिक परिस्थितियां, बूथ स्तर का संगठन और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी एक साथ महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शर्मा अपने पिछले राज्यों में काम करने के अनुभव को उत्तराखंड के संगठनात्मक ढांचे में किस तरह लागू करते हैं।

