उत्तराखण्ड
उमेश कुमार का इस्तीफे का ऐलान, सियासत में मचा भूचाल! विपक्ष से मोहभंग, कांग्रेस से साफ इनकार
**साढ़े चार साल साथ चलने के बाद विपक्ष पर ही बरसे खानपुर विधायक, किसानों के मुद्दे पर साथ नहीं मिलने का आरोप; बोले—कांग्रेस में नहीं जाऊंगा, अगली बार दो-चार और लोगों को लेकर सदन पहुंचूंगा!**
**गैरसैंण।** उत्तराखंड की सियासत में खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने ऐसा दांव चला है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। उमेश कुमार ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि बुधवार को सदन में अपना इस्तीफा सौंपेंगे। लेकिन उनके इस ऐलान के साथ ही सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—आखिर साढ़े चार साल तक विपक्ष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले उमेश कुमार का अपने ही साथियों से मोहभंग क्यों हो गया?
उमेश कुमार ने विपक्ष पर किसानों की समस्याओं और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर साथ छोड़ने का आरोप लगाते हुए अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उनका कहना है कि जब विपक्ष के मुद्दों पर संघर्ष की जरूरत थी, तब वह पीछे नहीं हटे। सदन की वेल में बैठने से लेकर रात में सदन के भीतर साथ देने तक उन्होंने विपक्ष का साथ निभाया, लेकिन जब हरिद्वार के किसानों और भ्रष्टाचार से जुड़े सवालों पर मजबूती से खड़े होने की बारी आई, तो उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
### किसानों के बकाये से लेकर भ्रष्टाचार तक, विपक्ष पर सीधा हमला
मीडिया से बातचीत में उमेश कुमार ने कहा कि खानपुर की जनता ने उन्हें निर्दलीय विधायक के रूप में चुनकर विधानसभा भेजा था। उनका दावा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन विपक्ष ने उनके मुद्दों को वह गंभीरता नहीं दी जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
हरिद्वार के किसानों की दुर्दशा का जिक्र करते हुए उमेश कुमार ने इकबालपुर शुगर मिल पर करीब 118 करोड़ रुपये का भुगतान दो साल से बकाया होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि गन्ने का भुगतान नहीं होने से किसान आर्थिक संकट झेल रहे हैं। कुछ किसानों को बीमारी के दौरान इलाज के लिए भी पैसों की परेशानी उठानी पड़ी। उन्होंने वर्ष 2023 की बाढ़ और आपदा से बर्बाद हुई फसलों, किसानों की आरसी काटे जाने, किसान क्रेडिट कार्ड के ब्याज में राहत नहीं मिलने और बिजली के बकाया बिल माफ नहीं होने जैसे मुद्दों को भी उठाया।
उमेश कुमार ने सवाल उठाया कि जब किसानों के सामने इतने गंभीर संकट हों, तब उनकी आवाज बुलंद करने के लिए राजनीतिक दलों को आगे क्यों नहीं आना चाहिए? उनके आरोपों ने एक बार फिर किसानों के बकाये और विपक्ष की भूमिका को लेकर बहस छेड़ दी है।
### ‘हर कोई चाहता है कि भगत सिंह पड़ोसी के घर पैदा हों’
उमेश कुमार की नाराजगी सिर्फ मुद्दों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि हर कोई चाहता है कि भगत सिंह पड़ोसी के घर पैदा हों। उनके इस बयान को विपक्ष के रवैये पर सीधी चोट के तौर पर देखा जा रहा है।
उन्होंने साफ किया कि वह कांग्रेस में नहीं जाएंगे। उमेश कुमार का कहना है कि वह उन नेताओं के नारे नहीं लगा सकते, जिनके खिलाफ वह पहले आवाज उठाते रहे हैं। भाजपा में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनके इस रुख ने उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलों को और तेज कर दिया है।
### इस्तीफे के ऐलान के पीछे अगली सियासी चाल?
उमेश कुमार ने भविष्य की राजनीति को लेकर भी संकेत दिया। उन्होंने कहा कि यदि ईश्वर ने चाहा तो अगली बार वह अपने साथ दो-चार और लोगों को लेकर सदन में पहुंचेंगे, ताकि किसानों, भ्रष्टाचार और जनहित के मुद्दों को अधिक मजबूती से उठाया जा सके।
इस बयान को उनकी भावी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। उनकी पत्नी हाल ही में जन निर्माण पार्टी का गठन कर चुकी हैं। ऐसे में चर्चा है कि उमेश कुमार आगामी विधानसभा चुनाव में इसी पार्टी के बैनर तले मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने अभी अपने अगले राजनीतिक कदम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
फिलहाल उमेश कुमार के इस्तीफे के ऐलान ने उत्तराखंड की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह विपक्ष से नाराजगी का अंतिम फैसला है या फिर आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नई राजनीतिक जमीन तैयार करने की शुरुआत? क्या जन निर्माण पार्टी आने वाले चुनाव में कोई नया समीकरण बनाएगी? इन सवालों के जवाब उनकी अगली रणनीति और इस्तीफे की औपचारिक प्रक्रिया के बाद ही साफ होंगे।
