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आज मंच पर श्रीराम, कल मरीजों के लिए बनेंगे भगवान!हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं ने रामलीला का मंचन कर दिया संस्कृति, संस्कार और सेवा का संदेश; चिकित्सा शिक्षा के बीच अपनी परंपराओं को जीवित रखने की पहल बनी खास

 

 

हल्द्वानी ।सफेद कोट पहनकर मरीजों का इलाज करना इन विद्यार्थियों का भविष्य है, लेकिन शनिवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के ऑडिटोरियम में इनका एक अलग ही रूप देखने को मिला। यहां चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई कर रहे एमबीबीएस के छात्र-छात्राएं भगवान श्रीराम के चरित्र को मंच पर जीवंत कर रहे थे। कोई राम के आदर्शों को अपने अभिनय से प्रस्तुत कर रहा था, तो कोई संवादों के माध्यम से मर्यादा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दे रहा था। ये वही विद्यार्थी हैं, जिनके हाथ भविष्य में मरीजों की जिंदगी बचाने और उनके चेहरों पर मुस्कान लौटाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।

 

आज मंच पर श्रीराम, कल मरीजों के लिए बनेंगे भगवान

यह भाव इस आयोजन को एक सामान्य सांस्कृतिक कार्यक्रम से आगे ले जाता है। चिकित्सा की पढ़ाई अपने आप में कठिन और समय मांगने वाली है। लंबे अध्ययन, प्रैक्टिकल, क्लीनिकल ट्रेनिंग और भविष्य की पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए समय निकालना आसान नहीं होता। ऐसे में एमबीबीएस के विद्यार्थियों का रामलीला का मंचन करना इस बात का संकेत है कि उनके लिए शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री हासिल करना ही नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना भी है।

 

आज के दौर में जब मेडिकल शिक्षा को अक्सर पाठ्यक्रम, परीक्षाओं और पेशेवर प्रतिस्पर्धा के नजरिए से देखा जाता है, तब मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों का रामलीला के मंच पर उतरना एक अलग तस्वीर प्रस्तुत करता है। यह पहल बताती है कि डॉक्टर बनने की तैयारी के साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों के प्रति रुचि भी बनाए रखी जा सकती है। रामलीला का मंचन करने वाले ये छात्र-छात्राएं केवल पात्रों की भूमिका नहीं निभा रहे थे, बल्कि उस सांस्कृतिक विरासत से जुड़ रहे थे, जो पीढ़ियों से समाज को मर्यादा, सत्य, त्याग और कर्तव्य का संदेश देती आई है।

 

राजकीय मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में रामलीला के मंचन का शुभारंभ कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. अजय आर्या ने दीप प्रज्वलित कर किया। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय और संवादों के जरिए भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों, मर्यादा और धर्म के प्रति समर्पण को प्रस्तुत किया। मंचन के दौरान ऑडिटोरियम का वातावरण भक्तिमय हो गया।

 

इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. डॉ. अजय आर्या ने विद्यार्थियों के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि रामलीला भारतीय संस्कृति और समृद्ध परंपराओं का अभिन्न अंग है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा, सत्य और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा के साथ विद्यार्थियों में मानवीय एवं नैतिक मूल्यों का विकास भी अत्यंत आवश्यक है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें अपनी संस्कृति तथा परंपराओं से जोड़ते हैं।

 

प्राचार्य ने यह भी रेखांकित किया कि शिक्षा के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में सहभागिता विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करती है। चिकित्सा क्षेत्र में ज्ञान और कौशल के साथ संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और मानवीय दृष्टिकोण का महत्व भी है। ऐसे में भगवान श्रीराम के आदर्शों से जुड़ने का यह प्रयास विद्यार्थियों के जीवन में नैतिक मूल्यों की अहमियत को सामने लाता है।

 

रामलीला के मंच पर आज श्रीराम का किरदार निभाने वाले ये विद्यार्थी कल डॉक्टर बनकर अस्पतालों में मरीजों की सेवा करेंगे। मरीज और उनके परिजन अक्सर डॉक्टर से केवल इलाज ही नहीं, बल्कि भरोसे, संवेदना और उम्मीद की भी अपेक्षा करते हैं। ऐसे में इस आयोजन का संदेश मंच तक सीमित नहीं रहता। यह याद दिलाता है कि चिकित्सा का पेशा केवल बीमारी का उपचार करना नहीं, बल्कि कठिन समय में इंसान के साथ खड़े रहना भी है।

 

हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों की यह पहल इसलिए भी उल्लेखनीय है कि उन्होंने अपनी व्यस्त पढ़ाई के बीच रामलीला जैसी पारंपरिक विधा के लिए समय निकाला। यह आयोजन उन संभावनाओं की ओर भी इशारा करता है, जिनमें मेडिकल कॉलेज केवल डॉक्टर तैयार करने वाले संस्थान न रहकर विद्यार्थियों के बौद्धिक, सांस्कृतिक और मानवीय विकास के केंद्र भी बन सकते हैं।

 

आज मंच पर श्रीराम के आदर्शों को जीवंत करने वाले ये विद्यार्थी कल सफेद कोट में मरीजों के लिए उम्मीद, भरोसे और जीवन की नई किरण बनेंगे। यही इस रामलीला का सबसे सुंदर संदेश है—चिकित्सा के ज्ञान के साथ संस्कृति से जुड़ाव और पेशेवर दक्षता के साथ मानवीय संवेदनाओं का संगम।

 

 

 

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