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हल्द्वानी मंडी में अतिक्रमण का साम्राज्य… चिन्हिकरण होते ही क्यों मचा हड़कंप

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  • हल्द्वानी मंडी में अतिक्रमण बनाम प्रशासन
  • 212 दुकानों की लीज, चिन्हीकरण की कार्रवाई और वर्षों की लापरवाही पर सवाल

हल्द्वानी। हल्द्वानी कृषि मंडी समिति इन दिनों अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर सुर्खियों में है, लेकिन यह अभियान जितना अवैध दुकानों पर सवाल खड़े करता है, उससे कहीं ज़्यादा सवाल मंडी प्रशासन, राजनीतिक संरक्षण और वर्षों की चुप्पी पर उठाता है।मंडी परिसर में सामने आए तथ्य किसी एक-दो दुकानों की अनियमितता नहीं, बल्कि व्यवस्थित अव्यवस्था और संरक्षण प्राप्त अवैध साम्राज्य की ओर इशारा करते हैं।

20 अवैध दो मंजिला दुकानें — बिना अनुमति, बिना डरसूत्रों के अनुसार मंडी क्षेत्र में कम से कम 20 दुकानें ऐसी हैं जिन्हें बिना किसी अनुमति के दो मंजिला बना दिया गया।न नक्शा पासन निर्माण अनुमतिन सुरक्षा मानकों का पालनप्रश्न यह है कि क्या मंडी प्रशासन को यह निर्माण दिखाई नहीं दिया?या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?

150 हायर परचेज दुकानें — न लीज, न रिकॉर्ड

मामला यहीं खत्म नहीं होता।मंडी परिसर में करीब 150 दुकानें हायर परचेज पर संचालित हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश के पास कोई वैध लीज एग्रीमेंट ही नहीं है।यह स्थिति सीधे तौर पर सवाल उठाती है किबिना लीज के दुकानें वर्षों तक कैसे चलती रहीं?

मंडी के रिकॉर्ड में ये दुकानें आखिर किस आधार पर दर्ज हैं?

किराया वसूली किस नियम के तहत हुई — या हुई ही नहीं?

100 से ज्यादा दुकानों ने 50 से 100 फीट तक कब्जा

सबसे गंभीर मामला अतिक्रमण का है।जानकारी के अनुसार 100 से अधिक दुकानों ने अपनी दुकानों के आगे 50 से 100 फीट तक अवैध कब्जा कर रखा है।कहीं गोदाम बना लिए गएकहीं स्थायी शेडकहीं खुले रास्ते तक हड़प लिए गए। यह सब मंडी समिति से बिना पूछे और बिना अनुमति किया गया।

कार्रवाई का विरोध करने वाले कौन?

जैसे ही मंडी प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की बात की, विरोध शुरू हो गया। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि जिन दुकानों पर कार्रवाई होनी है, विरोध करने वालों में वही लोग सबसे आगे हैं।

सूत्र बताते हैं कि इनमें राजनीतिक दलों से जुड़े चेहरे, स्थानीय प्रभावशाली नेताऔर ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी दुकानें खुद नियमों के घेरे में हैं।

आरोप साफ है — ये लोग नहीं चाहते कि मंडी में कभी अतिक्रमण हटे।

सालों से किराया नहीं, फिर मंडी प्रशासन क्या करता रहा?यह सबसे बड़ा और सबसे असहज सवाल है।

अगर वर्षों सेदुकानों का किराया नहीं दिया गया, लीज एग्रीमेंट नहीं बने, अवैध निर्माण होते रहे तो अब तक मंडी प्रशासन क्या कर रहा था?

क्या जानबूझकर आंखें मूंदी गईं?

राजनीतिक दबाव में नियम ताक पर रखे गए? या फिर अंदरखाने कोई और ही खेल चलता रहा?

ईमानदार व्यापारी भुगत रहे सजा

मंडी के कई ऐसे व्यापारी जिन्होंने नियमों का पालन किया, तय सीमा में दुकान रखी, समय पर किराया दिया, उनका कहना है कि अवैध दुकानों और अतिक्रमण ने व्यापार असंतुलित किया, रास्ते बंद कर दिए और मंडी की छवि खराब कर दी। आज जब कार्रवाई की बात हो रही है, तो ईमानदार व्यापारी प्रशासन के साथ खड़े हैं, जबकि अवैध कब्जाधारी विरोध कर रहे हैं।

अब अग्निपरीक्षा मंडी प्रशासन की

अब सवाल सिर्फ अतिक्रमण हटाने का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का है।

क्या मंडी प्रशासन पुराने मामलों की जांच करेगा?

क्या वर्षों से किराया न देने वालों से वसूली होगी?

क्या अवैध निर्माण कराने वालों पर मुकदमे दर्ज होंगे?

या फिर कुछ नोटिस देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

जनता पूछ रही है सवाल

हल्द्वानी की जनता अब पूछ रही है —अगर आज कार्रवाई जरूरी है, तो कल क्यों नहीं थी?

और अगर कल गलत था, तो उसके जिम्मेदार कौन हैं?

मंडी समिति में अतिक्रमण का यह मामला अबसिर्फ दुकानों का नहीं, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी और राजनीतिक इच्छाशक्ति की असली परीक्षा बन चुका है।

हल्द्वानी कृषि मंडी समिति में अतिक्रमण को लेकर चल रही कार्रवाई अब केवल अवैध दुकानों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह मामला मंडी प्रशासन की वर्षों पुरानी कार्यशैली, लीज व्यवस्था की अनदेखी और राजनीतिक संरक्षण पर सीधा सवाल बन गया है।मंडी प्रशासन भले ही इसे अपनी संपत्ति के “चिन्हीकरण (डिमार्केशन)” की कार्रवाई बता रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं ज्यादा गंभीर नजर आ रही है।

212 दुकानें, 90 साल की लीज और रिन्यू न होने का सच

मंडी समिति के रिकॉर्ड के अनुसार 212 दुकानें वर्ष 1988 में 90 साल की लीज पर दी गई थीं। नियम के तहत इन दुकानों की हर 30 वर्ष में लीज रिन्यू होनी थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि दशकों बीत जाने के बावजूद यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। यानी लीज तो कागजों में है, लेकिन उसका नवीनीकरण वर्षों से लंबित है।

2022 में भेजा गया था नोटिस

मंडी प्रशासन का कहना है किसाल 2022 में इन दुकानों को एक बार नोटिस जारी किया गया था,लेकिन उसके बाद न तो लीज रिन्यू की प्रक्रिया पूरी हो सकीऔर न ही अतिक्रमण को लेकर ठोस कार्रवाई हुई।

यह सवाल स्वाभाविक है किअगर 2022 में नोटिस दिया गया था, तो 2026 में अचानक सख्ती क्यों? और फिर उसका विरोध क्यों

20 अवैध दो मंजिला दुकानें और 150 बिना लीज

सूत्रों के मुताबिक मंडी परिसर में 20 दुकानें बिना अनुमति के दो मंजिला बना दी गईं,150 से अधिक दुकानें हायर परचेज पर चल रही हैं, जिनकी कोई वैध लीज एग्रीमेंट नहीं है। इतना ही नहीं,100 से ज्यादा दुकानों ने अपनी दुकानों के आगे 50 से 100 फीट तक अतिक्रमण कर रखा है,जिससे मंडी के रास्ते, पार्किंग और मूल संरचना पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है।

कार्रवाई का विरोध और राजनीतिक छाया

जैसे ही मंडी प्रशासन ने चिन्हीकरण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की,वैसे ही विरोध तेज हो गया।गौर करने वाली बात यह है कि जिन दुकानों पर कार्रवाई प्रस्तावित है, विरोध करने वालों में वही लोग सबसे आगे हैं। आरोप है कि इनमें राजनीतिक दलों से जुड़े चेहरेऔर प्रभावशाली व्यापारी शामिल हैं,जो वर्षों से नियमों की अनदेखी करते आ रहे हैं।

हल्द्वानी मंडी सचिव दिग्विजय सिंह देव का कहना है—“मंडी समिति अपनी संपत्ति का चिन्हीकरण कर रही है। यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत है और किसी को निशाना बनाने के उद्देश्य से नहीं की जा रही।”

मंडी प्रशासन का दावा है कि अवैध अतिक्रमण हटाना अनिवार्य है और मंडी की जमीन को सुरक्षित करना उनकी जिम्मेदारी है। व्यापारियों की मांगों पर बैठक

दूसरी ओर व्यापारियों की मांगों को लेकर मंडी प्रशासक एवं सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल सिंह चौहान की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में मंडी प्रशासन के अधिकारी और व्यापारी प्रतिनिधि शामिल होंगे। मंडी प्रशासन का कहना है कि जो मांगें मंडी स्तर पर पूरी हो सकती हैं, उन्हें पूरा किया जाएगा,जबकि जो विषय परिषद स्तर के हैं, उन पर निर्णय इसी बैठक में लिया जाएगा।

सवाल अब भी कायम

हालांकि प्रशासन का पक्ष सामने आ चुका है, लेकिन जनता और व्यापारियों के बीच कुछ सवाल अब भी तैर रहे हैं—

वर्षों तक लीज रिन्यू क्यों नहीं की गई?

अवैध निर्माण होते समय कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

किराया नहीं देने वालों पर पहले सख्ती क्यों नहीं दिखाई गई?

क्या अब भी कुछ लोगों को राहत मिलेगी?

अतिक्रमण नहीं, सिस्टम कटघरे में

हल्द्वानी मंडी समिति का यह मामला अबसिर्फ दुकानों के अतिक्रमण का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का बन चुका है। अब देखना यह होगा कि चिन्हीकरण की कार्रवाई निष्पक्ष होती है या राजनीतिक और व्यापारी दबाव में एक बार फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। फिलहाल मंडी प्रशासन के लिए यह कार्रवाईसाख, ईमानदारी और पारदर्शिता की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुकी है।

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संपादक

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