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बन्दूक लेकर स्कूल क्यों जाते हैं यह शिक्षक, वो भी मात्र एक बच्चे को पढ़ाने… अजब कहानी सतेली डोईवाला प्राइमरी स्कूल की
जौलीग्रांट। डोईवाला विधानसभा और रायपुर ब्लॉक के दूरस्थ पहाड़ी गांव राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय सतेली में सिर्फ एक छात्र पढ़ाई करता है। यह छात्र भी टिहरी जिले से पढ़ने के लिए आता है। बंदूक और फावड़ा लेकर इस बच्चे को पढ़ाने सहायक अध्यापक जाते हैं।
वर्तमान में इस विद्यालय में दो शिक्षक और भोजन माता अपनी सेवाएं दे रही हैं। टिहरी से पढ़ने आने वाले एक छात्र के भरोसे विद्यालय चल रहा है।-छात्र कक्षा आठ में है। नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। जिस कारण सभी – विद्यालयों में प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है। लेकिन पलायन से पूरी तरह खाली हो चुके सतेली में छात्र संख्या बढ़ाना विद्यालय प्रशासन और शिक्षा विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
वर्तमान में इस विद्यालय में दो शिक्षक हैं, जिनमें से एक पिछले एक माह से मेडिकल अवकाश पर हैं। सहायक अध्यापक अरुण रावत ने बताया कि वो थानो से सतेली पढ़ाने के लिए आते हैं। रविवार या छुट्टी होने पर वो अपने घर जाते हैं। नाहीकला से लेकर सतेली तक वन्यजीवों के खतरे के कारण बंदूक लेकर ड्यूटी पर जाते सतेली के शिक्षक। पूमावि सतेली में एक ही छात्र पढ़ रहा है जो टिहरी से आता है।
करीब आठ किमी वन क्षेत्र से गुजरने वाले कच्चे मार्ग पर जब वो आवाजाही करते हैं तो भालू और जंगली जानवरों से अपने को बचाने के लिए लाइसेंसी बंदूक और हॉकी स्टिक साथ रखते हैं। बरसात में जब भूस्खलन के कारण पगडंडी वाला मार्ग भी बंद हो जाता है तो फावड़ा भी साथ में रखना पड़ता है। उनका कई बार भालू से सामना भी हो चुका है।
विद्यालय में छात्र संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। यदि छात्र संख्या नहीं बढ़ी तो विद्यालय को बंद भी किया जा सकता है। – हेमलता गौड़, खंड शिक्षा अधिकारी रायपुर।

