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प्रो. लोहनी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय बन रहा उच्च शिक्षा का मजबूत स्तंभ, मुख्यमंत्री से कुलपति की भेंट दूरस्थ शिक्षा के समावेशी विस्तार की ओर कदम
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी की शिष्टाचार भेंट राज्य में उच्च शिक्षा के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक संवाद के रूप में सामने आई। मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस भेंट में विश्वविद्यालय की अकादमिक प्रगति, नवाचारों और दूरदर्शी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री का शॉल, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर गरिमामय स्वागत किया। भेंट के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित शैक्षणिक कार्यक्रमों, डिजिटल शिक्षा पहलों, शोध गतिविधियों, नवाचार आधारित पाठ्यक्रमों तथा हाल के वर्षों में प्राप्त उल्लेखनीय उपलब्धियों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय ने दूरस्थ और मुक्त शिक्षा के माध्यम से राज्य के अंतिम छोर तक शिक्षा पहुँचाने का सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने कुलपति प्रो. लोहनी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अकादमिक गुणवत्ता और प्रशासनिक सुदृढ़ता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।
दूरदर्शी नेतृत्व में नई पहचान
कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी आज केवल एक प्रशासक नहीं, बल्कि मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा को नई दिशा देने वाले दूरदर्शी शिक्षाविद के रूप में पहचाने जाते हैं। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने अकादमिक अनुशासन, पारदर्शी प्रशासन और छात्र-केंद्रित शिक्षा प्रणाली को अपनी प्राथमिकता बनाया है। प्रो. लोहनी का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल उपाधि प्रदान करना नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल और आत्मनिर्भरता का विकास है। इसी सोच के साथ उन्होंने विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप पाठ्यक्रम सुधार, मूल्यांकन प्रणाली में नवाचार और गुणवत्ता उन्नयन की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।

डिजिटल लर्निंग में अग्रणी भूमिका
प्रो. लोहनी के कार्यकाल में उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय ने डिजिटल लर्निंग और ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। ई-कंटेंट, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, वर्चुअल प्लेटफॉर्म और तकनीक आधारित शिक्षण ने विश्वविद्यालय को पर्वतीय, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का भरोसेमंद केंद्र बना दिया है। यह पहल उन छात्रों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हुई है, जो भौगोलिक या आर्थिक कारणों से पारंपरिक शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
शोध, गुणवत्ता और जवाबदेही पर जोर
कुलपति प्रो. लोहनी ने विश्वविद्यालय में शोध संस्कृति को प्रोत्साहित करने, अकादमिक गुणवत्ता सुधारने और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय में समयबद्ध निर्णय, पारदर्शी प्रक्रियाएँ और सकारात्मक कार्य-संस्कृति विकसित हुई है।उन्होंने शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के बीच संवाद को मजबूत कर विश्वविद्यालय को एक सशक्त, संवेदनशील और उत्तरदायी संस्थान के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य किया है।
मुख्यमंत्री को भेंट कीं प्रमुख पत्रिकाएं
इस अवसर पर दीक्षांत समारोह के उपलक्ष्य में प्रकाशित विश्वविद्यालय की प्रमुख पत्रिकाएँ— “उड़ान” और “प्रगति के सोपान”—तथा विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेंट की गई। मुख्यमंत्री जी ने इन प्रकाशनों के माध्यम से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोधपरक दृष्टिकोण और संस्थागत विकास प्रयासों की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय द्वारा हाल में किए गए कार्यों की जानकारी प्राप्त की, उनकी सराहना की तथा आगामी शैक्षणिक सत्र में विकास, विस्तार और नवाचार की संभावनाओं पर भी सकारात्मक चर्चा की। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से विश्वविद्यालय को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत भरोसा
मुख्यमंत्री से हुई यह भेंट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता की ओर अग्रसर है, बल्कि राज्य की उच्च शिक्षा नीति का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभर रहा है।यह मुलाकात विश्वविद्यालय के उज्ज्वल भविष्य और उत्तराखण्ड में समावेशी शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।






