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सुप्रीम कोर्ट में कॉर्बेट पार्क का मामला, उत्तराखंड के अफसरों से होंगे कठिन सवाल, बड़ा एक्शन होगा?

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देहरादून. दुनिया भर में प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क में तमाम नियमों को ताक पर रखकर कॉर्बेट सफारी का निर्माण, राजाजी टाइगर रिज़र्व के बफर ज़ोन में कंडी रोड का निर्माण, कॉर्बेट के जलाशय निर्माण के लिए बिना अनुमति पेड़ों की कटाई जैसी अनियमितताएं अब फॉरेस्ट अफसरों के लिए गले की हड्डी बनती जा रही हैं. पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद उत्तराखंड वन विभाग के आला अफसरों को शीर्ष कोर्ट ने तलब किया है, तो राज्य की नौकरशाही में हलचल है क्योंकि गंभीर एक्शन हो सकता है.

दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी ने शुक्रवार को मीटिंग बुलाई है. इस मीटिंग में उत्तराखंड से चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन और वन विभाग के प्रमुख सचिव समेत फॉरेस्ट के संबंधित अफसरों को तलब किया गया है. हालांकि इस पूरे मामले के सामने आने के बाद ही दोनों अफसरों को डिपार्टमेंट का चार्ज मिला है, लेकिन आज दिल्ली में होने जा रही इस मीटिंग में अफसरों से बिंदुवार पूछताछ हो सकती है. यह कमेटी पार्क में तमाम घपले-घोटाले सामने आने के बाद 28, 29 व 30 मार्च को निरीक्षण के लिए कॉर्बेट पहुंची थी.

सस्पेंड किए जा चुके हैं दो IFS
इस पूरे मामले में इसी हफ्ते 27 अप्रैल को राज्य सरकार कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के डायरेक्टर राहुल पर एक्शन लेते हुए उन्हें अटैच कर चुकी है. दूसरी ओर तत्कालीन चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जेएस सुहाग, कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के अधीन कालागढ़ फॉरेस्ट डिवीजन के तत्कालीन डीएफओ किशन चंद को सस्पेंड कर चुकी है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से ठीक पहले प्रमुख वन सचिव आरके सुधांशु के आदेश पर यह कार्रवाई की गई.

क्यों है इतना हंगामा, आखिर क्या है मामला?
कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के पाखरो में राज्य सरकार ने पिछले साल 106 हेक्टेयर में टाइगर सफारी का निर्माण कार्य शुरू किया था. यहां टाइगर रखने के लिए 3 बाड़े बनाए गए, जिसके लिए स्वीकृत 167 पेड़ों की जगह सैकड़ों पेड़ों पर आरियां चला दी गईं. मामला उछला तो और गड़बड़ियां भी सामने आईं. कॉर्बेट में बिना अनुमति के जलाशय निर्माण के लिए कई पेड़ काटने, रेस्क्यू सेंटर, गेस्ट हाउस के निर्माण में भी घपले दिखे.

इस पर नेशनल टाइगर कंज़र्वेशन अथॉरिटी ने जांच की. राज्य सरकार की ओर से तत्कालीन फॉरेस्ट चीफ राजीव भरतरी ने भी मामले की जांच की और दोनों ही जांचों में भारी अनियमितताओं की पुष्टि हुई. इसी बीच मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी ने जिम कॉर्बेट का दौरा करने के बाद अफसरों से जवाब भी तलब किए थे.

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