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उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का पांचवां दिन सफलतापूर्वक संपन्न
एआई, डिजिटल लाइब्रेरी और शोध मेट्रिक्स पर शोधार्थियों को मिली नयी जानकारी उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में चल रहे फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के पांचवें दिन दो महत्वपूर्ण सत्रों का आयोजन किया गया। इन सत्रों में शोध मेट्रिक्स और डिजिटल लाइब्रेरी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग पर चर्चा की गई।पहले सत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, हरियाणा के सहायक प्रोफेसर प्रो. मनोज कुमार जोशी ने व्याख्यान दिया. उन्होंने शोध मेट्रिक्स की परिभाषा और उसके महत्व को स्पष्ट किया।

उन्होंने बताया कि किसी भी शोधकर्ता के योगदान का मूल्यांकन क्यों किया जाता है और शोध प्रभाव आकलन (Research Impact Assessment) की प्रक्रिया पर भी चर्चा की।उन्होंने शोध के प्रभाव को मापने के विभिन्न टूल्स और इंडेक्स के बारे में जानकारी दी, जिनमें प्रमुख रूप से H-index, G-index, I-10 index, Journal Impact Factor, CiteScore, SCImago Journal Rankings, और Altmetrics शामिल हैं। इन टूल्स की मदद से शोध की गुणवत्ता और प्रभावशीलता का आकलन किया जा सकता है।दूसरा सत्र प्रीति शर्मा, सहायक प्रोफेसर, स्कूल ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस (S.O.L.I.S.), उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी द्वारा लिया गया। उन्होंने ई-संसाधनों (e-resources) की परिभाषा, उनके उपयोग और लाभों पर प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने विभिन्न मुक्त (open access) ई-संसाधनों की जानकारी भी साझा की।उन्होंने सरकार द्वारा संचालित ओपन एक्सेस पाठ्यक्रमों और प्लेटफॉर्म्स के बारे में बताया, जिनमें प्रमुख रूप से DIKSHA, SWAYAM, SWAYAM-Prabha, Pathshala, Project Gutenberg, और W3 School शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने Hathi Trust Library, Librivox, Internet Archive, Spoken Tutorial जैसी डिजिटल लाइब्रेरी के उपयोग पर भी चर्चा की।प्रीति शर्मा ने शोध को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए Consensus, SCIspace, ResearchRabbit, और QuiltBot जैसे एआई-समर्थित टूल्स के बारे में बताया। उन्होंने ResearchRabbit और SCIspace टूल्स का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया, जिससे शोधकर्ता जटिल शोध पत्रों और थीसिस को आसानी से समझ और सारांशित कर सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने सत्रों को अत्यंत ज्ञानवर्धक और उपयोगी बताया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और शोधकर्ताओं को नवीनतम शोध प्रवृत्तियों और डिजिटल उपकरणों से परिचित कराना है, ताकि वे अपने शिक्षण और अनुसंधान कार्यों को अधिक प्रभावी बना सकें।

