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आत्मनिर्भर बनने के लिए पुस्तके जरूरी: पीडी पंत

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*131वीं जयंती पर पद्मश्री डॉ एस आर रंगनाथन को किया याद* *राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस के रुप में मनाया पद्मश्री रंगनाथन का जन्मदिवस

हल्द्वानी*। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में भारतीय पुस्तकालय जगत के पितामह पद्मश्री डॉ. एस. आर. रंगनाथन की 131वीं जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस मनाया गया।  शुक्रवार को पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विद्याशाखा के तत्वाधान में राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. पीडी पंत, प्रो.ए.के.नवीन व डाॅ. अरविंद भट्ट ने संयुक्त रूप से डॉ. एस. आर. रंगनाथन की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

अपने संबोधन में कुलसचिव प्रो. पीडी पंत ने कहा पद्मश्री डॉ. रंगनाथन के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके पुण्य कृत्यों के लिए अकादमिक एवं शोध समाज सदैव उनका ॠणी रहेगा। वनस्पति विज्ञान में एसोसिएट प्रोफेसर व उपनिदेशक शोध एवं नवाचार डा. पी.के. सहगल ने कहा कि सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनने के लिए पुस्तकों का सतत्  अध्ययन बेहद जरूरी है।

असिसटेंट डायरेक्टर कंप्युटर एवं आईसीटी अनुराग भट्ट ने कहा कि डिजीटल लाइब्रेरी पर विस्तार से बात रखी. उन्होने परंपरागत लाइब्रेरी से लेकर डिजीटल लाइब्ररी तक के सभी तकनीकों ओपेक, आईसीटी और इंस्टीट्यूशनल रिपोजेटरी, प्लेजेरिज्म व आर्टिफिसिलयल इंटेलीजेंस पर विस्तार से बात रखी. इस दौरान बीएलआईएस के शिक्षार्थियों तारा देवी व मंजू पुनेरा ने एस.आर. रंगनाथन के लाइब्रेरी पर दिए गए नियमों को विस्तार से बताया। पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विद्याशाखा की प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर ने कहा कि पुस्तकालय एक ऐसा मंदिर है जहां व्यक्ति साहित्य, समाज, अर्थव्यवस्था, कला एवं संस्कृति को पढ़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाता है। उन्होंने बताया कि यूं तो लाइब्रेरियन दिवस दुनिया भर में 16 अप्रैल को मनाया जाता है पर एसआर. रंगनाथन के लाइब्रेरी साइंस में योगदान को देखते हुए उनके जन्मदिवस को ही भारत में राष्ट्रीय लाइब्रेरियन दिवस के तौर पर मनाया जाता है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु द्वारा दिल्ली प्रगति मैदान में दो दिवसीय फेस्टवल ऑफ लाइब्रेरी प्रोग्राम में दिए गए लाइब्रेरी इस दौरान उन्होंने पद्मश्री रंगनाथन द्वारा दिए गए अध्ययन के मूल मंत्रों से प्रतिभागियों को परिचित कराया।

कार्यक्रम में  विवि के डा. सीता विश्वकर्मा, डा. दिनेश कुमार, डा. देवकी सिरोला, डा. मनीषा पंत, राजेश आर्या, विभु कांडपाल, शोधार्थी जीवन परगॉई, समेत बीएलआईएस के स्टूडेंट्स गोविंद, शगुफ्ता, सबेअसरा व रेखा बिष्ट मौजूद रही.

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