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देहरादून में मारा गया स्टोन क्रशर कारोबारी निकला झारखंड गैंग का मास्टरमाइंड, जमशेदपुर कनेक्शन आया सामने, मार्शल आर्ट की आड़ में खड़ा किया था आपराधिक नेटवर्क
जमशेदपुर/देहरादून। सिल्वर सिटी मॉल में शुक्रवार सुबह हुए गोलीकांड के बाद मारे गए स्टोन क्रशर संचालक विक्रम शर्मा के अतीत को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। अब तक एक शांत, व्यवस्थित और प्रभावशाली कारोबारी के रूप में पहचाने जाने वाले विक्रम की पृष्ठभूमि झारखंड के संगठित अपराध से जुड़ी बताई जा रही है। जांच में सामने आया है कि उसका संबंध झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह से रहा और अपराध जगत में उसे स्थापित करने में विक्रम की अहम भूमिका थी।
बताया जा रहा है कि करीब दस वर्ष पहले विक्रम शर्मा ने अपनी पहचान बदलकर देहरादून में ठिकाना बना लिया था। यहां उसने कारोबारी के रूप में खुद को स्थापित किया, स्थानीय प्रभावशाली लोगों से संपर्क बढ़ाए और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय दिखने लगा। लेकिन इससे पहले जमशेदपुर पुलिस उसे देहरादून के एक किराये के फ्लैट से गिरफ्तार कर चुकी थी। उस समय उसका नाम कई चर्चित आपराधिक मामलों में सामने आया था।2 नवंबर 2007 को साकची आमबागान के पास श्रीलेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या ने जमशेदपुर को हिला दिया था। इस मामले में अखिलेश सिंह के साथ विक्रम शर्मा का नाम भी जांच में उभरा। इसके बाद व्यापारियों, ठेकेदारों और प्रभावशाली व्यक्तियों को निशाना बनाने की घटनाएं तेज हो गईं।
टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जयराम सिंह की बिष्टुपुर में हत्या, ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की गोली मारकर हत्या, पूर्व जज आरपी रवि पर फायरिंग, कांग्रेसी नेता नट्टू झा के कार्यालय पर गोलीबारी और कई अन्य हमलों ने गिरोह की सक्रियता को उजागर किया। वर्ष 2008 के दौरान साकची, बिष्टुपुर और बर्मामाइंस जैसे इलाके लगातार गोलियों की आवाज से दहलते रहे।पुलिस सूत्रों के अनुसार विक्रम सीधे तौर पर सामने कम आता था, लेकिन रणनीतिक भूमिका निभाने में माहिर था। अखिलेश सिंह को उसने गिरोह का चेहरा बनाया, जबकि खुद पर्दे के पीछे रहकर संचालन करता रहा। उसे ‘मैनेजमेंट गुरु’ कहा जाता था, क्योंकि वह पुलिस, नेताओं और मीडिया के साथ समीकरण साधने में दक्ष माना जाता था। वर्ष 2004 से 2009 के बीच जमशेदपुर में कई थाना प्रभारियों से लेकर डीएसपी स्तर तक के अधिकारियों से उसके संबंधों की चर्चा रही।होटल कारोबारी अशोक शर्मा की हत्या के मामले में भी उसका नाम सामने आया। आरोप था कि संपत्ति विवाद में पत्नी पिंकी शर्मा ने साजिश रची और इस षड्यंत्र में विक्रम, अखिलेश सिंह तथा अन्य सहयोगी शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया कि बाद में पिंकी की शादी विक्रम के छोटे भाई से कराई गई।
विक्रम ब्लैक बेल्ट धारक था और बच्चों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देता था। बताया जाता है कि अखिलेश सिंह भी उसके पास प्रशिक्षण लेने आता था। प्रशिक्षण के दौरान वह विदेशी एक्शन फिल्मों के माध्यम से तकनीक समझाता था। बाहर से अनुशासन और आत्मरक्षा की शिक्षा देने वाला यह व्यक्ति अंदर ही अंदर आपराधिक नेटवर्क को दिशा दे रहा था।जमशेदपुर में बढ़ते दबाव के बाद उसने उत्तराखंड को सुरक्षित ठिकाना बनाया। पहले काशीपुर और फिर देहरादून में कारोबार खड़ा किया। सामाजिक दायरा बढ़ाया और खुद को सामान्य व्यवसायी के रूप में स्थापित कर लिया। स्थानीय स्तर पर उसके प्रभाव और संपर्कों ने उसकी वास्तविक पृष्ठभूमि पर वर्षों तक पर्दा डाले रखा।शुक्रवार को हुई घटना के बाद जैसे ही उसका नाम सार्वजनिक हुआ, झारखंड कनेक्शन की परतें खुलती चली गईं। पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खंगाली जा रही हैं और विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के बीच समन्वय तेज हो गया है।
यह मामला केवल एक व्यक्ति के दोहरे जीवन की कहानी नहीं, बल्कि उस चुनौती का संकेत भी है जिसमें अपराधी पहचान बदलकर नए शहरों में सहजता से खुद को स्थापित कर लेते हैं। गोलीकांड में विक्रम की मौत हो चुकी है, लेकिन कई ऐसे सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं जिनका जवाब पुलिस और प्रशासन को देना होगा। सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या उत्तराखंड अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के लिए नया सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है?






