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तो क्या फर्जी निकला हल्द्वानी के गौलापार में प्रस्तावित क्रिकेट टूर्नामेंट!!!! आयोजक पर ठगी के गंभीर आरोप

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हल्द्वानी।क्रिकेट प्रेमियों और टीम मालिकों के लिए बड़ी निराशा की खबर सामने आई है। हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में कराए जाने का दावा किया जा रहा एक बहुप्रचारित क्रिकेट टूर्नामेंट अब पूरी तरह फर्जी निकलता प्रतीत हो रहा है। टूर्नामेंट के आयोजक विकास ढाका पर कई टीम मालिकों, खिलाड़ियों और प्रायोजकों से लाखों रुपये की ठगी और जालसाजी करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

टूर्नामेंट को EVCL (एवोक क्रिकेट लीग) जैसे आकर्षक नाम से प्रचारित किया गया था, जिससे स्थानीय और बाहरी टीमों को यह एक पेशेवर और विश्वसनीय आयोजन प्रतीत हुआ। लेकिन आयोजक की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है।

बड़े दावों के साथ किया गया प्रचार

आरोप है कि आयोजक विकास ढाका ने गौलापार में बड़े स्तर पर क्रिकेट टूर्नामेंट कराने का दावा करते हुए सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और व्यक्तिगत संपर्कों के जरिए टीम मालिकों से संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि टूर्नामेंट में:नामी खिलाड़ी हिस्सा लेंगेलाइव स्ट्रीमिंग होगीआकर्षक इनामी राशि दी जाएगीप्रायोजकों के लिए प्रचार की व्यवस्था होगीआयोजन पूरी तरह प्रोफेशनल होगाइन दावों के आधार पर कई टीम मालिकों से एंट्री फीस और अन्य खर्चों के नाम पर मोटी रकम वसूली गई।

टूर्नामेंट की तारीखें बार-बार बदली गईं

शुरुआत में टूर्नामेंट की एक तय तारीख बताई गई, लेकिन जैसे-जैसे आयोजन का समय नजदीक आया, आयोजक ने अपने पार्टनर की मौत का बहाना बनाया। मगर बुधवार को यह कहकर टूर्नामेंट स्थगित कर दिया गया कि अभी पिच तैयार नहीं हुई है।

टीम मालिकों का कहना है कि जब उन्होंने आयोजन स्थल, मैदान बुकिंग, अंपायर, स्कोरर और प्रशासनिक अनुमति से जुड़े दस्तावेज मांगने शुरू किए तो आयोजक टालमटोल करने लगा।

लाखों रुपये की ठगी का आरोप

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, विकास ढाका ने EVCL टूर्नामेंट कराने के नाम पर कई लोगों से लाखों रुपये एकत्र किए। इनमें टीम एंट्री फीस, स्पॉन्सरशिप अमाउंट और अन्य खर्च शामिल हैं।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि हल्द्वानी के प्रमुख व्यवसायी और पूर्व विधायक नारायण पाल से भी टूर्नामेंट के नाम पर लाखों रुपये की ठगी की गई है। बताया जा रहा है कि उन्हें बड़े स्तर पर प्रचार और आयोजन में भागीदारी का भरोसा दिलाया गया था, जो अब झूठा साबित होता दिख रहा है।

बृहस्पतिवार को मीडिया से बातचीत में पूर्व विधायक नारायण पाल का कहना था कि लगातार तारीख पर तारीख आयोजकों की तरफ से दी जा रही थी। शुरुआती तौर पर उन्होंने आयोजन में शामिल होने के लिए उत्तराखंड सोल्जर टीम खरीदी और इसके लिए शुरूआत में 3 लाख रुपया दिया।

पुलिस कप्तान से की गई शिकायतमामले के तूल पकड़ने के बाद पीड़ित टीम मालिकों और अन्य लोगों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टी.सी. से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की शिकायत की है।

स्थानीय क्रिकेट जगत में आक्रोश

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों के क्रिकेट खिलाड़ियों, कोचों और टीम मालिकों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि ऐसे फर्जी आयोजनों से न केवल खिलाड़ियों का मनोबल टूटता है, बल्कि खेल की साख को भी नुकसान पहुंचता है।कई खिलाड़ियों ने बताया कि उन्होंने इस टूर्नामेंट के लिए अन्य आयोजनों से दूरी बनाई, अभ्यास और संसाधनों पर खर्च किया, लेकिन अब उन्हें ठगा हुआ महसूस हो रहा है।

कानूनी कार्रवाई की तैयारी

पीड़ितों का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी राशि वापस नहीं की जाती और आयोजक के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो वे सामूहिक रूप से धोखाधड़ी, जालसाजी और विश्वासघात की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराएंगे।कुछ टीम मालिकों ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ी तो वे इस मामले को साइबर सेल और आर्थिक अपराध शाखा तक ले जाएंगे, क्योंकि भुगतान ऑनलाइन माध्यमों से किए गए हैं।

पूर्व में भी विवादों में रहा है नाम

सूत्रों का दावा है कि विकास ढाका का नाम पहले भी कुछ छोटे आयोजनों में विवादों से जुड़ चुका है, हालांकि इस बार मामला कहीं अधिक बड़ा और संगठित प्रतीत हो रहा है। पुलिस अब यह भी जांच कर सकती है कि कहीं यह एक सुनियोजित ठगी नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं है।एसएसपी ने दिए जांच के संकेतशिकायत मिलने के बाद पुलिस कप्तान डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने मामले को गंभीरता से लेने का भरोसा दिया है। सूत्रों के अनुसार, प्राथमिक जांच के आदेश दिए जा सकते हैं और यदि आरोप सही पाए गए तो आयोजक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

खेल प्रेमियों के लिए चेतावनी

यह मामला खेल आयोजनों के नाम पर हो रही ठगी का एक और उदाहरण बनकर सामने आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी टूर्नामेंट में भाग लेने या प्रायोजन देने से पहले:आयोजक की पृष्ठभूमि जांचेंआधिकारिक अनुमति देखेंलिखित अनुबंध करेंकेवल मौखिक आश्वासन पर भरोसा न करें।

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संपादक

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