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चर्चा में कांट्रेक्टर: धनंजय के साथ धन संचय करने वाले और लोग कौन…धनंजय गिरी अकेला या पूरा नेटवर्क ?
हल्द्वानी। हल्द्वानी में प्रॉपर्टी के फील्ड में करोड़ों रुपये के हेरफेर और इन्वेस्टमेंट के नाम पर ठगी के आरोपों में घिरे धनंजय गिरी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, आरोप है कि धनंजय गिरी ने लोगों से इन्वेस्टमेंट के नाम पर बड़ी रकम ली लेकिन न तो उन्हें कोई प्रॉपर्टी दी गई और न ही उनका पैसा वापस किया गया।
वर्ष 2018 से लेकर अब तक धनंजय गिरी के खिलाफ कुल 9 मामले दर्ज हुए जिनमें चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है बावजूद इसके पीड़ितों को उनकी राशि नहीं मिल सकी, लगातार सामने आ रही शिकायतों और प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए नवंबर 2025 में इस पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया गया, एसआईटी द्वारा जब पीड़ितों की सूची तैयार की गई तो करीब 20 मामले सामने आए जिनमें धनंजय गिरी द्वारा 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि इन्वेस्टमेंट के नाम पर लिए जाने की बात सामने आई।
इसके बाद जांच का फोकस धनंजय गिरी के नाम पर ट्रांसफर हुई संपत्तियों पर केंद्रित किया गया और उसकी लिस्टिंग तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई जिसके लिए तहसील से संबंधित रिकॉर्ड और विवरण जुटाए जा रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ठगी की रकम से कौन-कौन सी संपत्तियां खरीदी गईं।
कुमाऊं रेंज की पुलिस महानिदेशक रिद्धिमा अग्रवाल के अनुसार जांच में धनंजय गिरी के नाम पर जो भी प्रॉपर्टी सामने आएगी उसे न्यायालय के आदेशों के बाद कुर्क किया जाएगा और उसके बाद उन संपत्तियों से प्राप्त धनराशि उन सभी पीड़ितों के बीच बराबर बांटी जाएगी जिनसे धनंजय गिरी ने पैसा लिया था।
पुलिस का कहना है कि एसआईटी जांच का उद्देश्य वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलाना है और पूरे मामले में कानून के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
धनंजय गिरी अकेला या पूरा नेटवर्क?
करोड़ों के निवेश घोटाले में साथियों पर बड़ा सवाल
हल्द्वानी। हल्द्वानी के चर्चित ठेकेदार धनंजय गिरी के खिलाफ जब इन्वेस्टमेंट और प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों की जांच शुरू हुई तो जांच के दौरान कुमाऊं रेंज की पुलिस महानिदेशक रिद्धिमा अग्रवाल ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बार-बार धनंजय गिरी और उसके साथियों का जिक्र किया, लेकिन इसके बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धनंजय गिरी के साथ धन संचय करने वाले उसके अन्य साथी आखिर कौन थे और वे इस समय कहां हैं।
धनंजय के साथी कौन?
करोड़ों के लेन-देन में अकेला कैसे संभव?सवाल यह है कि धनंजय गिरी के साथ धन संचय करने वाले उसके साथी अन्य लोग कौन थे और वे कहां हैं, क्योंकि किसी भी बड़े आर्थिक अपराध को अकेले अंजाम देना आसान नहीं होता, खासकर तब जब मामला करोड़ों रुपये के निवेश, जमीनों की खरीद-फरोख्त और प्रॉपर्टी ट्रांसफर से जुड़ा हो, ऐसे में यह स्वाभाविक सवाल उठता है कि धनंजय गिरी के साथ मिलकर इस पूरे सिस्टम को खड़ा करने वाले लोग कौन थे।
नाम सामने आना क्यों जरूरी? सच्चाई जानने का हक जनता को
धनंजय गिरी के साथ धन संचय करने वाले ऐसे लोगों के नाम भी सामने आना जरूरी हैं ताकि लोगों को इस पूरे प्रकरण की सच्चाई का पता चल सके, क्योंकि अभी तक सामने आई जांच में फोकस केवल एक व्यक्ति पर दिखाई देता है, जबकि आर्थिक अपराधों में आमतौर पर पूरा नेटवर्क काम करता है।
मामला इतना संवेदनशील कि पुलिस चौकी इंचार्ज निलंबित
जांच के दौरान बड़ी कार्रवाईयह मामला इतना संवेदनशील माना गया कि जांच के दौरान इस पूरे प्रकरण में भूतिया पड़ाव पुलिस चौकी के इंचार्ज को निलंबित किया जा चुका है, जो अपने आप में यह संकेत देता है कि जांच एजेंसियों को इस केस में गंभीर लापरवाही या संदिग्ध भूमिका नजर आई है।
फिर भी क्यों नहीं आ रहे साथियों के नाम?
जांच पर उठते सवालइसके बावजूद अब तक यह सवाल बना हुआ है कि आखिर धनंजय गिरी के साथियों के नाम सामने क्यों नहीं आ रहे हैं, जबकि जांच की दिशा और बयान इस ओर इशारा करते हैं कि धनंजय गिरी अकेला नहीं था।
शिकायतों में सिर्फ धनंजय का नाम, क्या यही है नाम न सामने आने की वजह?
इस पूरे मामले में अब तक जितनी भी शिकायतें दर्ज हुई हैं, उनमें शिकायतकर्ताओं ने धनंजय गिरी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कोई स्पष्ट शिकायत दर्ज नहीं कराई है, संभव है कि यही वजह हो कि जांच के दौरान धनंजय गिरी के साथियों के नाम औपचारिक रूप से सामने नहीं आ पा रहे हैं, क्योंकि जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ ठोस शिकायत या बयान दर्ज नहीं होता, तब तक जांच एजेंसियों के लिए उस दिशा में कार्रवाई करना आसान नहीं होता।
जमीन किन-किन के नाम कराई गई?असली लाभार्थी कौन?
मगर यह अपने आप में जांच का विषय है कि धनंजय गिरी के अलावा उसके साथ जिन लोगों ने जमीन अपने नाम कराई, वे लोग कौन थे और उन संपत्तियों के पीछे वास्तविक लाभार्थी कौन हैं, क्योंकि यदि जमीनें अन्य लोगों के नाम पर दर्ज हैं तो यह बेनामी लेन-देन, साझेदारी या संरक्षण की ओर भी इशारा कर सकता है।
नेटवर्क का खुलासा अभी बाकी
फिलहाल पूरा मामला इसी बिंदु पर आकर ठहर जाता है कि धनंजय गिरी सिर्फ एक चेहरा है या फिर उसके पीछे एक पूरा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था, जिसका खुलासा होना अभी बाकी है और यही इस पूरे प्रकरण की सबसे बड़ी और सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है।






