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राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCRF) और राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) जैसे राष्ट्रीय ढांचों के अनुरूप मॉड्यूलर, लचीले और कौशल-उन्मुख पाठ्यक्रमों के डिजाइन पर विशेष ध्यान, मुक्त विश्वविद्यालय में रोजगार कौशल एवं परिणाम-आधारित प्रबंधन पर तीन दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन हुआ
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ”Graduate Employability and Result-Based Management (RBM) Framework”
हल्द्वानी: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने आज कहा कि संवादात्मक सत्रों और विशेषज्ञों के नेतृत्व में होने वाली चर्चाओं के माध्यम से, प्रतिभागी संकाय सदस्य परिणाम-आधारित शिक्षा (OBE), रोजगार योग्यता विशेषताओं, दक्षता मानचित्रण और उद्योग-प्रेरित पाठ्यक्रम विकास के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्राप्त करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यशाला में राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCRF) और राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) जैसे राष्ट्रीय ढांचों के अनुरूप मॉड्यूलर, लचीले और कौशल-उन्मुख पाठ्यक्रमों के डिजाइन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी और कॉमनवेल्थ एजुकेशनल मीडिया सेंटर फॉर एशिया (COL-CEMCA) के संयुक्त तत्वावधान में आज “Graduate Employability and Result-Based Management (RBM) Framework” (स्नातक रोजगार कौशल एवं परिणाम-आधारित प्रबंधन) पर तीन दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन हुआ। यह कार्यशाला 02 से 04 फरवरी 2026 तक विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित की जाएगी।कार्यशाला का उद्देश्य है रोजगार क्षमता बढ़ाने और शैक्षणिक कार्यक्रमों में कौशल एकीकरण के लिए रोजगार-अनुकूल, कौशल-आधारित पाठ्यक्रम तैयार करना। कार्यक्रम में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के शिक्षक ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता कर रहे हैं।उद्घाटन समारोह:कार्यशाला का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर उपस्थित थे:कुलपति: प्रो. (डॉ.) नवीन चंद्र लोहनी
निदेशक अकादमिक: प्रो. (डॉ.) पी. डी. पन्त
निदेशक, CEMCA, नई दिल्ली: डॉ. बी. शद्रक
प्रोजेक्ट सलाहकार, CEMCA: प्रो. (डॉ.) राजेश पी. खंबायत
आयोजन सचिव: डॉ. गोपाल दत्त, डॉ. विशाल कुमार शर्मा अतिथियों का स्वागत डॉ. गोपाल दत्त ने किया।
मुख्य संबोधन:प्रो. पी. डी. पन्त ने कहा कि यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रमों की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और रोजगार क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित की गई है। इसका लक्ष्य है कि स्नातक वास्तविक दुनिया में अकादमिक ज्ञान को लागू करने के लिए तैयार हों।



डॉ. बी. शद्रक ने कहा कि उच्च शिक्षा में स्नातकों की रोजगार क्षमता एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता बन गई है। RBM ढांचा संस्थानों को इनपुट और गतिविधियों से हटकर मापने योग्य शिक्षण परिणाम और दीर्घकालिक प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाता है।प्रो. राजेश पी. खंबायत ने कहा कि वर्तमान में रोजगार क्षमता और परिणाम-आधारित प्रबंधन की मांग बढ़ रही है। कार्यशाला प्रतिभागियों को पाठ्यक्रम संशोधन, समीक्षा और नए पाठ्यक्रम रूपरेखा विकसित करने में सक्षम बनाएगी।
प्रथम दिवस की गतिविधियाँ:कार्यशाला के पहले दिन चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें मुख्य विषय थे:
पाठ्यक्रम मूल्यांकन – मौजूदा पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता और प्रासंगिकता पर मंथन
योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम डिज़ाइन
रोजगार-केंद्रित मॉड्यूल और कौशल एकीकरण
पाठ्यचर्या संवर्द्धन
उद्योग की आवश्यकताओं और ODL मोड के अनुसार सुधार
प्रश्नोत्तर एवं संवाद सत्र – प्रतिभागियों द्वारा सक्रिय रूप से प्रश्न और अनुभव साझा किए गएकार्यक्रम का संचालन डॉ. गोपाल दत्त ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विशाल कुमार शर्मा ने किया।
उपस्थित प्रमुख सदस्य:विश्वविद्यालय के निदेशक गण: प्रो. गिरीजा पांडे, प्रो. पी. डी. पंत, प्रो. रेनू प्रकाश, प्रो. जीतेंद्र पांडे, प्रो. एम. एम. जोशी, प्रो. डिगर सिंह, प्रो. गगन सिंह, प्रो. राकेश रयाल, प्रो. मंजरी अग्रवाल, प्रो. आशुतोष भट्ट, प्रो. अरविंद भट्ट, प्रो. कमल देवलाल, प्रो. पी. के. सहगल।अन्य प्रमुख उपस्थितगण: डॉ. गोपाल दत्त, डॉ. विशाल कुमार शर्मा, डॉ. श्याम कुंजवाल, डॉ. बलम सिंह दफौटी, डॉ. नीलिमा बुधानी, डॉ. मनोज कुमार पांडे, डॉ. दिनेश कांडपाल, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. गीतांजलि शर्मा, श्री सुनील तिवारी, डॉ. राकेश पंत, डॉ. विनय रावत, डॉ. हरिमोहन भंडारी, डॉ. प्रदीप कुमार पंत, श्री मनोज पांडे, श्री अनुराग भट्ट, डॉ. प्रभा बिष्ट धोंडियाल, डॉ. प्रियंका शर्मा, डॉ. निर्मला तारागी, डॉ. नीरज जोशी, डॉ. पूजा हैरिया, डॉ. आशीष टमटा, सुश्री ललिता बिष्ट, श्री आशीष जोशी, रिया गिरी, डॉ. एस. एन. ओझा, हिमानी शाह, राजेश आर्य, विनीत पौरियाल, श्री मोहित रावत, श्री पवन कुमार, राकेश पापने, आकांक्षा रावत, ऋतु बोरा आदि।
कार्यशाला का उद्देश्य और अपेक्षित परिणाम:राष्ट्रीय ढांचों (NCRF, NSQF) के अनुरूप मॉड्यूलर, लचीले और कौशल-उन्मुख पाठ्यक्रम तैयार करनास्नातकों में रोजगार योग्यता और कार्यस्थल दक्षता बढ़ानाउच्च शिक्षा में OBE और परिणाम-आधारित शिक्षा को सुदृढ़ करनाODL मोड के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण और रोजगार-केंद्रित शिक्षा प्रदान करनाकार्यशाला अगले दो दिनों तक तकनीकी सत्रों, मॉड्यूलर पाठ्यक्रम अभ्यास और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के माध्यम से जारी रहेगी।






