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यूक्रेन के राष्ट्रपति की मौत भी हो जाए तो…….ऐसा क्यों कहा महाशक्ति अमेरिका ने

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यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का ठिकाना हाल के दिनों में रहस्य में है. युद्ध के बीच आखिर जेलेंस्की कहां है? उन्होंने दावा किया था कि वह देश की राजधानी कीव नहीं छोड़ेंगे. इससे पहले, ज़ेलेंस्की ने यह भी दावा किया था कि वह रूसी सैन्य अभियान का “नंबर 1 टारगेट” थे. उन्होंने यह भी कहा कि उनके जीवन और उसके परिवार के ये हमला सीधा खतरा था.

इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि यूक्रेनी अधिकारियों के पास एक योजना है, अगर राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की देश में चल रहे रूसी सैन्य अभियान का शिकार भी हो जाते हैं और उनकी मौत भी हो जाती है तो यूक्रेन के पास एक योजना है जिसकी वजह से यूक्रेन में वहां की सरकार कायम रहेगी.

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने एक इंटरव्यू में कहा, “यूक्रेनी के पास योजना है कि मैं इस बारे में बात नहीं करने जा रहा हूं या किसी भी डिटेल में नहीं जा रहा हूं कि लेकिन यह तय है कि यूक्रेन में सरकार की निरंतरता ‘continuity of government’जारी रहेगी. ऐसा किसी भी तरह से होगा ही.”
यूक्रेन के मारियुपोल शहर में स्थिति विकट हो गई है. इस शहर में भोजन, पानी, दवा और लगभग सभी अन्य सप्लाई की किल्लत हो गई है. यहां पहले तो रूसी और यूक्रेनी सेना के बीच 11 घंटे के संघर्ष विराम के लिए सहमति हुई थी, ताकि नागरिकों और घायलों को निकाला जा सकेगा. लेकिन यूक्रेन का आरोप है कि रूसी हमलों ने मानवीय गलियारे को जल्दी से बंद कर दिया और शहर में फिर से फायरिंग शुरू हो गई. यूक्रेन के एक अधिकारी ने कहा कि यहां ग्रीन कॉरिडोर बन ही नहीं सकता है क्योंकि रूस की फौजें तय करती है कि कब गोली चलानी है और किस पर चलानी है?
यूक्रेन की मीडिया एजेंसी द कीव इंडिपेंडेंट ने दावा किया है कि रूस अब सीरियाई लड़ाकों की भर्ती अपनी सेना में कर रहा है. रूस इन्हें कीव को कब्जा करने की जंग में भेज रहा है. हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ऐसे कितने सीरियाई लड़ाके हैं. लेकिन कुछ सीरियाई रूस पहुंच चुके हैं.

पोलैंड ने अपने विमान चालकों यूक्रेन भेजने और अपने हवाई क्षेत्रों के इस्तेमाल की इजाजत देने से इनकार कर दिया है. इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने ‘ग्रीन सिग्नल’ देते हुए कहा था कि नाटो के सदस्य यूक्रेन में लड़ाकू विमान भेज सकते हैं. लेकिन रूस पहले ही चेता चुका है कि अगर नाटो से जुड़े मुल्कों की तरफ से यूक्रेन को सैन्य मदद दी गई तो वो जवाबी कार्रवाई करेगा

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