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पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का ऐतिहासिक संकल्प: नेत्रदान, अंगदान और पूर्ण देहदान से मानवता की अनुपम सेवा

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देहरादून। मानवता, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की सशक्त मिसाल प्रस्तुत करते हुए उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व सांसद महामहिम श्री भगत सिंह कोश्यारी जी ने अपने जीवन के पश्चात नेत्रदान, सभी प्रत्यारोपण योग्य अंगदान तथा पूर्ण देहदान का ऐतिहासिक संकल्प लिया है। यह निर्णय न केवल समाज के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि चिकित्सा विज्ञान, शोध और शिक्षा के क्षेत्र में भी दूरगामी प्रभाव डालेगा।

महामहिम श्री कोश्यारी जी ने यह संकल्प दधीचि देह दान समिति, देहरादून (उत्तराखंड) के माध्यम से विधिवत पंजीकृत कराया है। यह संस्था वर्षों से नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान जैसे महापुण्य कार्यों के प्रति जन-जागरूकता फैलाने में अग्रणी भूमिका निभा रही है।

भारतीय संस्कृति और दधीचि परंपरा का जीवंत उदाहरण

श्री कोश्यारी जी का यह निर्णय भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा को सजीव करता है, जिसमें व्यक्ति अपने शरीर तक को समाज और राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर देता है। महर्षि दधीचि की त्याग और बलिदान की परंपरा से प्रेरित यह संकल्प चिकित्सा शिक्षा के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और चिकित्सकों के लिए अमूल्य सिद्ध होगा।नेत्रदान और अंगदान के माध्यम से जहां अनेक दृष्टिहीनों और गंभीर रोगियों को नया जीवन मिलेगा, वहीं पूर्ण देहदान चिकित्सा शिक्षा को सशक्त आधार प्रदान करेगा।

भ्रांतियों के दौर में विश्वास की नई रोशनी

आज के समय में अंगदान और देहदान को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां और संकोच व्याप्त हैं। ऐसे समय में एक वरिष्ठ, अनुभवी और जनप्रिय सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तित्व द्वारा लिया गया यह संकल्प समाज में विश्वास, जागरूकता और सकारात्मक सोच को मजबूती प्रदान करेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के उदाहरण अंगदान आंदोलन को गति देने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

युवाओं और समाज के लिए सशक्त संदेश

महामहिम श्री भगत सिंह कोश्यारी जी का यह कदम विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणादायी संदेश है कि सेवा केवल जीवनकाल तक सीमित नहीं होती। मृत्यु के पश्चात भी मानवता, समाज और राष्ट्र की सेवा संभव है।उनका यह संकल्प यह दर्शाता है कि सच्ची राष्ट्रसेवा वही है, जिसमें व्यक्ति अपने अस्तित्व को भी लोककल्याण के लिए समर्पित कर दे।

दधीचि देह दान समिति की प्रतिक्रिया

इस अवसर पर दधीचि देह दान समिति, देहरादून ने महामहिम श्री कोश्यारी जी के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका यह निर्णय देहदान और अंगदान आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा देगा।समिति ने आशा जताई कि इस प्रेरणादायी उदाहरण से समाज के विभिन्न वर्गों—विशेषकर शिक्षित युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों—में इस पुण्य कार्य के प्रति रुचि और सहभागिता बढ़ेगी।

सामान्य जन से अपील

दधीचि देह दान समिति ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे आगे आकर नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान जैसे मानवीय कार्यों के लिए संकल्प लें, ताकि जीवन के पश्चात भी समाज और राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान बना रहे।महामहिम श्री भगत सिंह कोश्यारी जी का यह संकल्प निस्संदेह मानवता, संवेदना और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का एक प्रेरणास्रोत दस्तावेज़ बनकर आने वाली पीढ़ियों को सेवा, त्याग और राष्ट्रनिर्माण के मार्ग पर अग्रसर करेगा।

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संपादक

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