others
हमार गांव, हमार तीर्थ : गौड़ समाज ने मिलन समारोह में रिश्तों और परंपरा को दिया नया जीवन
- गढ़वाल की जड़ों से जुड़ने का उत्सव : धूमधाम से मना गौड़ भ्रातृमण्डल मिलन समारोह
- रिश्तों की डोर, संस्कृति की पहचान : गौड़ समाज ने गढ़वाल में रचा एकता का महोत्सव
- जहां गांव ही तीर्थ है : गौड़ समाज के मिलन समारोह में सजी गढ़वाल की लोकसंस्कृति
- जुड़ना है, जोड़ना है… गढ़वाल में गौड़ समाज ने मिलन समारोह से दिया सामाजिक एकता का संदेश
- वंशावली विमोचन के साथ पीढ़ियों को जोड़ने का संकल्प, प्रवासी और ध्याणी बंधुओं की रही उल्लेखनीय सहभागिता
- लोकगीत, परंपरा और सम्मान समारोह के बीच गढ़वाल में गौड़ समाज का भव्य आयोजन गढ़वाल में गौड़ समाज की जड़ों को सींचने का सामूहिक प्रयास है।”
- हमार गांव, हमार तीर्थ: गढ़वाल में गौड़ समाज का मिलन समारोह
कोटद्वार। “जुड़ना है, जोड़ना है और भ्रातृ भाव बढ़ाना है”—इस ध्येय वाक्य के साथ गौड़ भ्रातृमण्डल, सिमलना मल्ला, दुगड्डा (पौड़ी गढ़वाल) का भव्य मिलन समारोह धूमधाम और परंपरागत गढ़वाली रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। इस मौके पर “गौड़ वंशावली एवं गौड़ भ्रातृमण्डल” पुस्तक का भी विमोचन किया गया, जो नई पीढ़ी के लिए अपने पूर्वजों और जड़ों से जुड़ने का अमूल्य दस्तावेज है।
गढ़वाल में गौड़ समाज का इतिहास
गढ़वाल में गौड़ समाज एक प्राचीन और सम्मानित जाति के रूप में जाना जाता है। यह समाज मुख्य रूप से पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, टिहरी, चमोली और उत्तरकाशी में बसा हुआ है।
सामाजिक संगठन: गौड़ समाज सदियों से आपसी सहयोग, परिवार और समुदाय के संरक्षण के लिए जाना जाता है। उनके द्वारा बनाए गए भ्रातृमण्डल और वंशावली जैसे दस्तावेज रिश्तों की डोर मजबूत करने में मदद करते हैं।
आर्थिक योगदान: पारंपरिक रूप से गौड़ समाज कृषि, व्यापार और प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय रहा है। गढ़वाल की पहाड़ी अर्थव्यवस्था में इनका योगदान उल्लेखनीय है।
सांस्कृतिक योगदान: गौड़ समाज ने गढ़वाली लोककला, गीत-संगीत, त्योहार और रीति-रिवाज संरक्षित किए। उनका सामूहिक मिलन और उत्सव समाज में भाईचारे और अपनत्व की भावना को बनाए रखते हैं।
एतिहासिक संदर्भ: गढ़वाल के राजवंशों (गोरखा, कत्यूरी, परमार, पंवार) के समय भी गौड़ समाज ने सांस्कृतिक और सामाजिक स्थिरता बनाए रखने में योगदान दिया।
आधुनिक समय में भूमिका: आज भी समाज मिलन समारोह, वंशावली प्रकाशन और सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से अपनी परंपरा जीवित रखता है। युवा पीढ़ी शिक्षा, सामाजिक उत्तरदायित्व और पारिवारिक मूल्यों में सक्रिय है।
समारोह का आयोजन और भागीदारी
समारोह आशीर्वाद मोटल एंड वेडिंग प्वाइंट, मवाकोट (भाबर) में आयोजित हुआ। इसमें सिमलना मल्ला, धूरा, नरई, खुण्डरा, डांडा विनक, सरा, जोगी झलड़ सहित आसपास के गांवों से गौड़ बंधु पहुंचे। दिल्ली, लुधियाना, नोएडा, देहरादून, ऋषिकेश, हल्द्वानी, पुणे आदि शहरों में बसे प्रवासी बंधुओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही।गढ़वाल की लोकधर्मिता और पारंपरिक आदर-सत्कार के अनुसार समारोह की शुरुआत देवी-देवताओं के आह्वान, पूजन और हवन से हुई। दीप प्रज्वलन और शंखध्वनि आचार्य सुमन गौड़, गौरव गौड़, भुवनेश गौड़, ओम प्रकाश गौड़ और रमेश चंद्र गौड़ द्वारा की गई।
नन्हीं छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मांगल टीम ने “दैणा होयां खोली का गणेशा” गढ़वाली गीत की प्रस्तुति देकर समारोह को और जीवंत बनाया।
मुख्य अतिथियों की गरिमा
उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूड़ी भूषण मुख्य अतिथि रहीं। नगर निगम कोटद्वार के मेयर शैलेंद्र रावत अति विशिष्ट अतिथि थे। प्रो. सत्यव्रत रावत (प्राचार्य, हिन्दू कॉलेज, मुरादाबाद) और प्रो. दशम सिंह नेगी (प्राचार्य, स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोटद्वार) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।सभी वक्ताओं ने रिश्तों की डोर मजबूत करने और परंपराओं को जीवित रखने पर जोर दिया।
गौड़ वंशावली: जड़ों से जुड़ने का दस्तावेज
संपादन एवं संकलन: डॉ. अरविंद कुमार गौड़
प्रारंभिक प्रयास: स्व. रामेश्वर प्रसाद गौड़ और नारायण दत्त गौड़
आगे बढ़ाया: राजेंद्र कुमार गौड़ (ग्राम प्रधान, सिमलना मल्ला)
पुस्तक की भूमिका: बुद्धि प्रकाश पेटवाल (प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज बनचूरी)
संपादन सहयोग: वीरेंद्र प्रसाद गौड़ और श्रीमती सुलोचना गौड़
पुस्तक में सिमलना मल्ला गांव का इतिहास, भौगोलिक स्थिति, रहन-सहन, व्यवसाय, खेती-बाड़ी, पारंपरिक खान-पान, महिलाओं की भूमिका, सामाजिक सहभागिता और संस्मरण शामिल हैं। यह नई पीढ़ी के लिए अपने पूर्वजों और समाज की जड़ों से जुड़ने का महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
सम्मानित वरिष्ठजन और समाजिक गरिमा
राजेंद्र प्रसाद गौड़ एवं सुमन गौड़ (नई दिल्ली) द्वारा वरिष्ठ नागरिकों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
सम्मानित वरिष्ठजन:चंद्रमोहन गौड़ (मवाकोट), प्रो. रंजन गौड़ (खुर्जा-देहरादून), रिटायर्ड प्रधानाचार्य दिनेश चंद्र गौड़ (देहरादून), दिनेश चंद्र गौड़ (कलालघाटी), राजीव गौड़ (देहरादून), वीरेंद्र प्रसाद गौड़ (कोटद्वार), वेदप्रकाश गौड़ (हरिद्वार), दाताराम गौड़ (नई दिल्ली), ग्राम प्रधान राजेंद्र कुमार गौड़ (सिमलना मल्ला), निवर्तमान अध्यक्ष शशिकांत गौड़ (देहरादून), अनिल गौड़ (नोएडा), सतीश चंद्र गौड़ (सिमलना मल्ला)।
अन्य प्रतिष्ठित उपस्थित लोग:
पराग गौड़, पुनीत गौड़, ऊषाकांत गौड़, राजेश्वर प्रसाद गौड़, सुरेन्द्र गौड़, वीरेंद्र गौड़, दीपिका गौड़, कमलेश गौड़, अरविंद गौड़, हरीश गौड़, राजेश गौड़, जगदीश गौड़, ओमप्रकाश गौड़, पंकज गौड़, सुभाष गौड़, अनूप गौड़, धीरेंद्र गौड़, आशीष गौड़, तेजप्रकाश गौड़, अजय गौड़, प्रमोद गौड़, नवल गौड़, रमेश चंद्र गौड़, एकेश्वर गौड़।
कार्यकारिणी और संगठन की भागीदारी
सिनियर्स उपाध्यक्ष अशोक गौड़, महिला उपाध्यक्ष श्रीमती प्रतिभा देवी और श्रीमती सुमन देवी, सचिव आचार्य सुमन चंद्र गौड़, सहसचिव श्रीकांत गौड़ (मवाकोट), संजीव गौड़ (नई दिल्ली), संगठन सचिव संजीव गौड़ (देहरादून), दीपेन्दु गौड़ (सिमलना मल्ला) सहित पूरी कार्यकारिणी मौजूद रही।
नन्हीं बालिकाओं ने बांधा समा
नन्हीं बालिकाओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने गढ़वाली लोक-संस्कृति की झलक पेश की।
बालिकाएं: कीर्ति नेगी, काव्या नेगी, आद्या नेगी, अनुष्का नेगी, वागमिता बहुगुणा, अस्मिता बहुगुणा, आकृति चौहान, पावनी भट्टप्रस्तुति निर्देशन: दीपिका गौड़, सहयोग: आशीष बहुगुणा और श्रीमती सुमित्रा बहुगुणा
मुख्य संदेश और समाजिक दृष्टिकोण
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण: “रिश्तों की जड़ें को खाद-पानी देकर मजबूत करना होगा।
”इतिहासकार डॉ. सुशील कोटनाला: “परिवार और रिश्तों को जोड़ना समाज की मजबूती के लिए आवश्यक है। ऐसे मिलन समारोह मील का पत्थर साबित होंगे।”
समारोह ने गढ़वाल की लोक-संस्कृति और गौड़ समाज की परंपरा को जीवित रखा और पीढ़ियों के बीच संवाद और अपनत्व को मजबूती दी। अध्यक्ष सोमप्रकाश गौड़ ने सभी अतिथियों और उपस्थित समाजजन का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन भारत मोहन गौड़ और डॉ. अरविंद गौड़ ने किया।





