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हाकम ने नकल कराने के लिए उत्तर प्रदेश के बिजनौर में किराये पर लिया था मकान !

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देहरादून: उत्तराखंड अधीनस्त चयन सेवा आयोग पेपर लीक मामले में हाकम सिंह को बड़ा खिलाड़ी माना जा रहा है। केवल बड़ा ही नहीं, बल्कि वह नकल कराने का माहिर खिलाड़ी भी माना जा रहा है। पेपर लीक मामले में अब जो खुलासा हुआ है, वो बेहद चौंकाने वाला है। हाकम ने नकल के लिए एक अड्डा बनाया था। यह अड्डा उसने पांच से 10 दिनों तक प्रयोग किया और भर्ती परीक्षा समाप्त होने के बाद किराए पर लिया कमान छोड़ दिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हाकम सिंह शातिराना ढंग से उत्तराखंड नहीं बल्कि सीमा क्षेत्र के बिजनौर जिले के ग्रामीण इलाके में एक किराये के मकान को नकल का सेंटर बनाया था। बताया जा रहा है कि अभ्यर्थियों को वहां ले जाकर हल किया हुआ पेपर मुहैया कराया गया था। पेपर लीक मामले में हिरासत में लिए गए। जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह के खिलाफ पहले भी मंगलौर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। यह मुकदमा भी आयोग की ही एक परीक्षा में नकल से संबंधित था।

यह परीक्षा कनिष्ठ सहायक की थी। आरोप था कि उसने कई परीक्षार्थियों को नकल कराई है, लेकिन वह बेहद चालाकी से इस मामले में बचहाकम सिंह नकल कराने का पुराना खिलाड़ी बताया जा रहा है। उसने बड़े ही शातिराना ढंग से उत्तराखंड नहीं बल्कि सीमा क्षेत्र के बिजनौर जिले के ग्रामीण इलाके में एक किराये के मकान को नकल का सेंटर बनाया था। बताया जा रहा है कि अभ्यर्थियों को वहां ले जाकर हल किया हुआ पेपर मुहैया कराया गया था।

पेपर लीक मामले में हिरासत में लिए गए जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह के खिलाफ पहले भी मंगलौर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। यह मुकदमा भी आयोग की ही एक परीक्षा में नकल से संबंधित था। यह परीक्षा कनिष्ठ सहायक की थी। आरोप था कि उसने कई परीक्षार्थियों को नकल कराई है, लेकिन वह बेहद चालाकी से इस मामले में बच निकला।

पुलिस को सबूत मिले नहीं या लिए नहीं, यह तो पता नहीं, लेकिन अंतिम रिपोर्ट लगाकर मामला बंद कर दिया गया। अब बताया जा रहा है कि इस मामले में एसटीएफ के पास पुख्ता सुबूत हैं। सूत्रों के मुताबिक, उसने बिजनौर के नगीना में एक देहाती इलाके में स्थित मकान को नकल के सेंटर के रूप में चुना ताकि यदि पुलिस तक बात पहुंचे तो उसकी लोकेशन परीक्षा वाले सेंटरों से अलग आए।

इस परीक्षा का बिजनौर से कोई लेनादेना नहीं था। ऐसे में यदि लोकेशन भी मिलती तो बिजनौर की और वह भी ग्रामीण इलाके की। यह इलाका कुमाऊं और गढ़वाल के बीच में आता है। ऐसे में उसे यह दिखाने में भी आसानी होती कि वह सफर में था, लेकिन इस बार पाला एसटीएफ से पड़ा था तो हाकम सिंह की यह चाल फेल हो गई।

पांच दिन पहले और एक दिन बाद तक
हाकम सिंह ने यह मकान परीक्षा के पांच दिन पहले किराये पर लिया था। परीक्षा दो दिनों तक हुई थी। यहीं पर अभ्यर्थी आते थे और नकल का पर्चा देखकर परीक्षा देने चले जाते थे। ऐसा दो दिनों तक चला। परीक्षा समाप्त हुई तो हाकम सिंह ने इस मकान को एक दिन बाद ही छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि यहां पर 20 से ज्यादा लोगों को नकल कराई गई थी। निकला।

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संपादक

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