उत्तराखण्ड
Electricity Bill Uttarakhand:महंगी हुई उत्तराखंड में बिजली, इतने रुपये बढ़कर आएगा इस बार इलेक्ट्रिसिटी बिल
देहरादून: Uttarakhand Electricity Bill: उत्तराखंड में उपभोक्ताओं को बिजली और महंगी पड़ रही है। ऊर्जा निगम ने घाटे का हवाला देते हुए सरचार्ज में वृद्धि कर दी है। जिसके चलते इस बार आम उपभोक्ताओं का बिल पांच से लेकर 100 रुपये तक बढ़ा हुआ आएगा। मार्च तक उपभोक्ताओं को यह बढ़ा हुआ बिल मिलेगा। हालांकि, ऊर्जा निगम को इससे भी घाटे की भरपाई होने की उम्मीद नहीं है।
विद्युत दरों में ढाई प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की
अप्रैल में बिजली दरों में सालाना वृद्धि के तहत ऊर्जा निगम ने विद्युत दरों में ढाई प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की थी। जिसके बाद देश में उपजे बिजली संकट के बीच ऊर्जा निगम पर महंगी बिजली खरीद का भार बढ़ा और निगम ने करोड़ों की बिजली खरीदकर आमजन को निर्बाध आपूर्ति देने का प्रयास किया।
- इसके चलते निगम ने सरचार्ज में वृद्धि की अपील विद्युत नियामक आयोग से की।
उपभोक्ताओं के बिल में 100 रुपये तक बढ़े
हालांकि, निगम की ओर से करीब साढ़े 12 प्रतिशत सरचार्ज वृद्धि की मांग की गई थी। जिस पर सुनवाई और तमाम पहलुओं को देखते हुए आयोग ने साढ़े तीन प्रतिशत वृद्धि का अनुमोदन किया। इसके बाद प्रदेश में श्रेणीवार उपभोक्ताओं के बिल में पांच से 100 रुपये तक बढ़ गए हैं। हालांकि, विभिन्न श्रेणी के अघरेलू उपभोक्ताओं के बिल में दो सौ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हो सकती है।

घरेलू उपभोक्ताओं के बिल में इस प्रकार होगी वृद्धि
- 100 यूनिट तक पांच रुपये
- 101-200 यूनिट तक 20 रुपये
- 201-400 यूनिट तक 55 रुपये
- 400 यूनिट से अधिक पर 90 रुपये
- (यह वृद्धि एक किलोवाट के कनेक्शन पर है, दो किलोवाट पर यह दोगुनी हो जाएगी। इससे अधिक किलोवाट पर प्रति किलोवाट यह रकम बढ़ती जाएगी।)
12 रुपये की बिजली खरीदकर पांच रुपये में बेच रहा ऊर्जा निगम
बीते छह माह से प्रदेश में बिजली की डिमांड बढ़ने और देश में ऊर्जा संकट होने के कारण राष्ट्रीय बाजार में बिजली की दरें आसमान पर पहुंच गईं। ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार का कहना है कि काफी समय से राष्ट्रीय एक्सचेंज में महंगी बिजली खरीद की जा रही है।
पीक आवर्स में 10 से 12 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिल रही है। जबकि, प्रदेश में यह चार-पांच रुपये प्रति यूनिट की दर से उपभोक्ताओं को दी जा रही है। ऐसे में ऊर्जा निगम पर आर्थिक भार बढ़ता जा रहा है।







