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छुट्टी के दिन ड्राइविंग टेस्ट का स्लॉट, हल्द्वानी RTO में अव्यवस्था — दर्जनों अभ्यर्थी लौटे मायूस
हल्द्वानी। परिवहन विभाग की ऑनलाइन व्यवस्था की बड़ी खामी शनिवार को हल्द्वानी आरटीओ कार्यालय में सामने आई, जब दूसरे शनिवार (सेकंड सैटरडे) की सरकारी छुट्टी के दिन ड्राइविंग टेस्ट का स्लॉट जारी कर दिया गया। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे दर्जनों युवा खुद को ठगा महसूस करते हुए बिना टेस्ट कराए वापस लौट गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन करने पर एक निजी कंपनी द्वारा संचालित पोर्टल ने शनिवार की तारीख में ड्राइविंग टेस्ट का स्लॉट आवंटित कर दिया। अभ्यर्थियों ने प्रति स्लॉट ₹250 शुल्क भी ऑनलाइन जमा किया था। तय तारीख के अनुसार युवा सुबह से ही हल्द्वानी आरटीओ कार्यालय पहुंच गए, लेकिन वहां पता चला कि दूसरे शनिवार को कार्यालय में अवकाश रहता है और कोई भी ड्राइविंग टेस्ट नहीं हो रहा है।
दूर-दराज से आए युवा, खर्च और समय दोनों बर्बाद
रामनगर, लालकुआं, भीमताल, अल्मोड़ा और नैनीताल जनपद के विभिन्न इलाकों से पहुंचे युवाओं ने बताया कि उन्होंने छुट्टी लेकर, किराया खर्च कर आरटीओ पहुंचा, लेकिन कार्यालय बंद मिला। कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि अगर छुट्टी के दिन टेस्ट संभव ही नहीं था तो ऑनलाइन सिस्टम में ऐसी तारीख क्यों दिखाई गई।
सवालों के घेरे में ऑनलाइन सिस्टम
अभ्यर्थियों का कहना है कि परिवहन विभाग ने ड्राइविंग टेस्ट की पूरी प्रक्रिया एक निजी कंपनी के माध्यम से ऑनलाइन कर दी है, लेकिन सरकारी अवकाश की जानकारी सिस्टम में अपडेट न होने से आम जनता परेशान हो रही है।
लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जब टेस्ट नहीं हुआ तो ली गई ₹250 फीस का क्या होगा और दोबारा स्लॉट के लिए फिर से शुल्क देना पड़ेगा या नहीं।
प्रशासनिक लापरवाही या तकनीकी चूक?
इस पूरे मामले ने आरटीओ प्रशासन और ऑनलाइन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की समस्या सामने आई हो, इससे पहले भी स्लॉट, सर्वर और टेस्ट तिथियों को लेकर शिकायतें आती रही हैं।
अभ्यर्थियों की मांग
पीड़ित युवाओं ने मांग की है किछुट्टी के दिनों में स्लॉट जारी करने की गलती सुधारने के लिए तत्काल वैकल्पिक तारीख दी जाए,₹250 शुल्क की वापसी या उसी शुल्क पर नया स्लॉट दिया जाए,और भविष्य में सरकारी छुट्टियों को सिस्टम में स्पष्ट रूप से ब्लॉक किया जाए ताकि किसी को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।फिलहाल इस मामले में आरटीओ प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अव्यवस्था से नाराज युवाओं में रोष साफ देखा गया।






