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डॉ. महेश शर्मा: जहां अनुभव, तकनीक और संवेदना एक साथ काम करते हैं… कारगिल युद्ध विजेता को दिया नया जीवन

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  • अनुभव, विशेषज्ञता और संवेदनशीलता का संगम हैं डॉ. महेश शर्मा

हल्द्वानी। विवेकानंद हॉस्पिटल, हल्द्वानी के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. महेश शर्मा उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे कुमाऊं मंडल में रीढ़ और मस्तिष्क शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में एक विश्वसनीय नाम माने जाते हैं। वर्षों का अनुभव, अत्याधुनिक तकनीकों पर पकड़ और मरीजों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण उन्हें विशिष्ट बनाता है।डॉ. महेश शर्मा अब तक हजारों सफल न्यूरो और स्पाइन सर्जरी कर चुके हैं, जिनमें जटिल डिस्क प्रोलैप्स, स्पाइनल नर्व कंप्रेशन, ब्रेन इंजरी और ट्रॉमा से जुड़े कई चुनौतीपूर्ण केस शामिल रहे हैं। उनकी पहचान ऐसे सर्जन के रूप में है जो ऑपरेशन को अंतिम विकल्प मानते हैं, लेकिन जब सर्जरी आवश्यक हो, तो उसे सबसे सुरक्षित और आधुनिक तरीके से अंजाम देते हैं।

जटिल मामलों में भी सटीक निर्णय क्षमता

कारगिल युद्ध विजेता कुंदन बिष्ट का यह मामला बेहद संवेदनशील था। पैर की ताक़त लगातार घट रही थी, जो स्थायी विकलांगता का संकेत हो सकता था। ऐसे मामलों में समय पर और सटीक निर्णय बेहद आवश्यक होता है।डॉ. महेश शर्मा ने बीमारी की गंभीरता को तुरंत भांपते हुए एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी का निर्णय लिया और अत्यंत सूक्ष्मता के साथ ऑपरेशन को सफल बनाया।विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की सर्जरी में नसों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होती है, जिसमें ज़रा-सी चूक भी गंभीर परिणाम दे सकती है। डॉ. शर्मा की क्लिनिकल समझ और तकनीकी दक्षता ने इस जटिलता को सफलता में बदला।

मरीज पहले, ऑपरेशन बाद में—यही है कार्यशैली

डॉ. महेश शर्मा की कार्यशैली का सबसे बड़ा गुण यह है कि वे हर मरीज को केवल एक केस नहीं, बल्कि एक इंसान के रूप में देखते हैं। वे इलाज से पहले मरीज और परिजनों को बीमारी, संभावित जोखिम और उपचार की हर प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाते हैं।उनका मानना है—“हर दर्द का इलाज ऑपरेशन नहीं होता, लेकिन जब ऑपरेशन जरूरी हो जाए, तो उसे टालना भी नुकसानदेह हो सकता है।”

उत्तराखंड के चिकित्सा जगत में जब भी न्यूरो सर्जरी और स्पाइन ट्रीटमेंट की बात होती है, तो डॉ. महेश शर्मा का नाम पूरे भरोसे के साथ लिया जाता है। विवेकानंद हॉस्पिटल, हल्द्वानी के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. शर्मा ने अपने लंबे अनुभव और आधुनिक तकनीकी दक्षता से हजारों मरीजों को नया जीवन दिया है।डॉ. महेश शर्मा उन चुनिंदा सर्जनों में शामिल हैं, जो ऑपरेशन को अंतिम विकल्प मानते हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि जब तक दवाइयों, फिजियोथेरेपी और व्यायाम से मरीज को राहत मिल सकती है, तब तक सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन जब बीमारी जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने लगे या स्थायी नुकसान का खतरा हो, तब वे बिना देरी सटीक और सुरक्षित निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं।

आधुनिक तकनीक को पहाड़ तक पहुंचाने का संकल्प

जहां पहले इस तरह की उन्नत स्पाइन सर्जरी के लिए मरीजों को दिल्ली या बड़े महानगरों की ओर रुख करना पड़ता था, वहीं डॉ. महेश शर्मा ने विवेकानंद हॉस्पिटल, हल्द्वानी में आधुनिक न्यूरो सर्जरी सुविधाओं को सशक्त किया है। इससे पहाड़ी और दूरदराज़ क्षेत्रों के मरीजों को अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय इलाज मिल रहा है।

मानवता और चिकित्सा—दोनों में समान प्रतिबद्धता

कारगिल युद्ध विजेता जैसे सम्मानित मरीज का सफल इलाज न केवल चिकित्सा कौशल का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि डॉ. महेश शर्मा अपने पेशे को सेवा मानते हैं।आज जब मरीज दर्द से मुक्त होकर दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो पाया है, तो यह सिर्फ एक सर्जरी की सफलता नहीं, बल्कि अनुभव, संवेदना और आधुनिक चिकित्सा का संयुक्त परिणाम है।

डिस्क बल्ज क्या है और यह बीमारी क्यों गंभीर हो जाती है?

मानव शरीर की रीढ़ की हड्डी कई छोटी-छोटी हड्डियों (वर्टिब्रा) से बनी होती है। इन हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क शरीर को झटकों से बचाने और लचीलापन बनाए रखने का काम करती है।जब किसी कारणवश यह डिस्क अपनी सामान्य स्थिति से बाहर की ओर उभर जाती है, तो उसे डिस्क बल्ज (Disc Bulge) कहा जाता है।डिस्क बल्ज की स्थिति में यह उभरी हुई डिस्क रीढ़ की नसों पर दबाव डालने लगती है, जिससे—कमर या पैर में तेज और लगातार दर्दझनझनाहट, सुन्नपन या जलनपैर की मांसपेशियों में कमजोरीचलने, खड़े होने या बैठने में परेशानीजैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यदि समय रहते इलाज न हो, तो नसों को स्थायी नुकसान और चलने-फिरने की क्षमता खोने का खतरा भी रहता है।

कब दवाइयों से नहीं, सर्जरी से ही होता है इलाज?

विशेषज्ञों के अनुसार, डिस्क बल्ज के 80–90 प्रतिशत मामले दवाइयों, आराम, फिजियोथेरेपी और व्यायाम से ठीक हो जाते हैं।लेकिन जब—दर्द असहनीय हो जाएपैर की ताक़त लगातार कम होने लगेनसों पर दबाव बढ़ने के लक्षण दिखेंकई हफ्तों तक दवाइयों का असर न होतो सर्जरी ही अंतिम और जरूरी विकल्प बन जाती है।

दूरबीन (एंडोस्कोपिक) स्पाइन सर्जरी: क्यों है यह ऑपरेशन जटिल?

डिस्क बल्ज की सर्जरी बेहद सूक्ष्म और संवेदनशील मानी जाती है। इस केस में की गई एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी आधुनिक तकनीक होने के बावजूद कई स्तरों पर जटिल होती है—

1. नसों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौ

तीरीढ़ की नसें अत्यंत संवेदनशील होती हैं। ऑपरेशन के दौरान एक मिलीमीटर की चूक भी—पैरालिसिसस्थायी कमजोरीसंवेदना खत्म होनेजैसे गंभीर परिणाम दे सकती है।

2. सीमित दृश्य क्षेत्र

दूरबीन सर्जरी में बहुत छोटे छेद से कैमरे और उपकरण डाले जाते हैं। सर्जन को सीमित दृश्य में बेहद सटीक निर्णय लेने होते हैं।

3. दबाव हटाते समय संतुलन

डिस्क के उस हिस्से को हटाना पड़ता है जो नस पर दबाव डाल रहा हो, लेकिन अधिक हिस्सा हटाने से रीढ़ की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। यह संतुलन बनाए रखना तकनीकी रूप से कठिन होता है।

4. मरीज की न्यूरोलॉजिकल स्थिति

इस केस में मरीज की पैर की ताक़त पहले ही घट चुकी थी। ऐसे मरीजों में ऑपरेशन के दौरान और बाद में न्यूरोलॉजिकल मॉनिटरिंग बेहद जरूरी होती है।

सफलता का आधार: अनुभव और सही समय पर निर्णय

डॉ. महेश शर्मा के अनुसार,“डिस्क बल्ज की सर्जरी तभी सफल होती है, जब सही समय पर सही तकनीक और अनुभवी हाथों से की जाए।”इस ऑपरेशन में सही समय पर दबाव हटने से नसों को राहत मिली, जिससे मरीज को दर्द से मुक्ति मिली और चलने की क्षमता लौट सकी।संदेश: डर नहीं, जागरूकता जरूरीडिस्क बल्ज कोई छोटी समस्या नहीं है, लेकिन यह हर बार ऑपरेशन की मांग भी नहीं करती।समय पर जांच, विशेषज्ञ सलाह और आधुनिक तकनीक से आज यह बीमारी पूरी तरह नियंत्रित और इलाज योग्य है।जरूरत सिर्फ इतनी है कि दर्द को नजरअंदाज न किया जाए और सही समय पर विशेषज्ञ तक पहुंचा जाए।

पेश है इस मुद्दे पर डॉक्टर महेश शर्मा से बातचीत

सवाल : डिस्क बल्ज क्या बीमारी है?

जवाब:रीढ़ की हड्डी की हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क जब अपनी जगह से बाहर की ओर उभर जाती है और नसों पर दबाव बनाने लगती है, तो इसे डिस्क बल्ज कहा जाता है। यह समस्या कमर, गर्दन या पैर तक दर्द फैला सकती है।

सवाल : डिस्क बल्ज होने पर शरीर में क्या लक्षण दिखते हैं?

जवाब:डिस्क बल्ज के प्रमुख लक्षण होते हैं—कमर या पैर में तेज और लगातार दर्दझनझनाहट या सुन्नपनपैर की ताक़त कम होनाचलने, बैठने या खड़े होने में कठिनाईयदि नसों पर दबाव अधिक हो जाए तो मरीज चलने में असमर्थ भी हो सकता है।

सवाल : क्या हर डिस्क बल्ज में ऑपरेशन जरूरी होता है?

जवाब:नहीं। लगभग 80 से 90 प्रतिशत मामलों में डिस्क बल्ज दवाइयों, आराम, फिजियोथेरेपी और व्यायाम से ठीक हो जाता है।लेकिन जब दर्द असहनीय हो जाए, कई हफ्तों तक दवाइयों का असर न दिखे या पैर की ताक़त घटने लगे, तब सर्जरी जरूरी हो जाती है।सवाल

सवाल: इस केस में सर्जरी क्यों जरूरी हो गई थी?

जवाब:मरीज पिछले 2–3 हफ्तों से लगातार दर्द में थे और पैर की ताक़त तेजी से घट रही थी। यह नसों के गंभीर दबाव का संकेत था। ऐसी स्थिति में देर करने से स्थायी कमजोरी या लकवे का खतरा रहता है, इसलिए ऑपरेशन जरूरी हो गया।

सवाल : दूरबीन (एंडोस्कोपिक) स्पाइन सर्जरी क्या होती है?

जवाब:यह एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें बहुत छोटे छेद से कैमरा और सूक्ष्म उपकरण डालकर नस पर पड़ रहे दबाव को हटाया जाता है। इसमें बड़ा चीरा नहीं लगता और रिकवरी तेज होती है।

सवाल : यह ऑपरेशन जटिल क्यों माना जाता है?

जवाब:डिस्क बल्ज की सर्जरी बेहद संवेदनशील होती है क्योंकि—रीढ़ की नसें अत्यंत नाज़ुक होती हैंएक मिलीमीटर की गलती भी स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैसीमित जगह और सीमित दृश्य में काम करना पड़ता हैसही मात्रा में डिस्क हटाना बेहद तकनीकी चुनौती होती है

सवाल : ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ा खतरा क्या होता है?

जवाब:सबसे बड़ा खतरा नसों को नुकसान पहुंचने का होता है, जिससे—पैरालिसिसस्थायी कमजोरीसंवेदना खत्म होनेजैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए यह सर्जरी केवल अनुभवी न्यूरो सर्जन द्वारा ही की जानी चाहिए।

सवाल : इस सर्जरी के क्या फायदे होते हैं?

जवाब:दर्द से तुरंत राहतनसों पर से दबाव हटता हैपैर की ताक़त वापस आने की संभावनाकम रक्तस्रावकम दिनों में चलने की क्षमता

सवाल : ऑपरेशन के बाद मरीज कितनी जल्दी सामान्य हो पाता है?

जवाब:दूरबीन सर्जरी के बाद अधिकांश मरीज कुछ ही दिनों में चलने लगते हैं। सही देखभाल और फिजियोथेरेपी से रिकवरी और बेहतर होती है।

सवाल: इस केस से आम लोगों को क्या संदेश मिलता है?

जवाब:कमर या पैर के दर्द को हल्के में न लें।समय पर जांच और विशेषज्ञ से सलाह लेने पर गंभीर से गंभीर समस्या भी सफल इलाज से ठीक हो सकती है।आधुनिक तकनीक के चलते अब स्पाइन सर्जरी सुरक्षित है—डर की नहीं, जागरूकता की जरूरत है।

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