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भारतीय सैन्य अकादमी के पीछे डेमोग्राफी चेंज की साजिश? कांग्रेस काल की अनुमति, मदनी ट्रस्ट की ज़मीन पर प्लॉटिंग का आरोप

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  • आईएमए की सुरक्षा के साये में ज़मीन सौदे, देहरादून में महमूद मदनी के ट्रस्ट की भूमि पर मुस्लिम बस्ती बसाने की तैयारी?

देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी यानि आईएमए की सुरक्षा को ताक में रख कर इस्लामिक संस्था द्वारा कृषि भूमि को बिना लैंड यूज़ कराए बेच दिए जाने का मामला देहरादून में सामने आने से चर्चा में है।खास बात ये है कि उक्त प्रकरणशेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा है। इस ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ महमूद असद मदनी है। जिनका संबंध दारुल उलूम और जमीयत उलेमा ए हिंद से है।

आईएमए के पीछे डेमोग्राफी चेंज का मामला

आईएमए की आपत्ति के बाद नहीं खुला था इस्लामिक शिक्षण संस्थानजानकारी के मुताबिक नारायण दत्त तिवारी की कांग्रेस सरकार ने उक्त ट्रस्ट जिसका पता 1 बहादुर शाह जफर मार्ग दिल्ली बताया गया है ,उक्त ट्रस्ट को भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के पास इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने की प्रारंभित अनुमति दी थी।कहा जाता है कि ट्रस्ट यहां देवबंद दारुल उलूम की तरह विशाल मदरसा या मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने जा रहा था, जिसके लिए ट्रस्ट द्वारा 20 एकड़ भूमि ग्राम हरियावाला धौलास पछुवा दून परगना विकासनगर देहरादून में धारित भूमि किसानों से ली गई थी और साथ ही कुछ और ग्राम समाज और वन विभाग की सरकारी विभागों की भूमि पर भी कथित रूप से कब्जा किया गया था।इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) को जब यहां उक्त इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने के प्रयासों की जानकारी मिली तो उनके द्वारा उत्तराखंड की तत्कालीन कांग्रेस की तिवारी सरकार के समक्ष आपत्ति दर्ज की गई।जिसके बाद इस योजना पर कई माहों तक रोक लगी रही।

हाईकोर्ट की सख़्त टिप्पणी

संवेदनशील क्षेत्र में न बसावट, न व्यापारकांग्रेस सरकार के बाद आई बीजेपी सरकार के समय ये मामला ठंडे बस्ते में रहा उसके बाद जब पुनः कांग्रेस की सरकार आई तो एक बार फिर से यहां इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने के लिए हलचल तेज हुई।

उल्लेखनीय है कि ट्रस्ट के अध्यक्ष महमूद हसन मदनी द्वारा मामला उत्तराखंड उच्च न्यायालय में ले जाया गया जो कि कई माहों तक चला जहां उन्हें कोई राहत नहीं मिली और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह आईएमए की आपत्ति रही थी। हाई कोर्ट ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार को और ट्रस्ट को दिनांक ये निर्देश दिए थे कि उक्त भूमि का लैंड यूज़ चेंज नहीं किया जाएगा और ये कृषि भूमि ही रहेगी और यदि बेची जाएगी तो भी कृषि भूमि ही रहेगी और इससे जो पैसा आयेगा वो भी ट्रस्ट में सामाजिक कार्यों में लगाया जाएगा।

दरअसल इस निर्देश के पीछे तर्क ये दिया गया था कि आई एम ए एक संवेदनशील स्थान है आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से इसके कैंपस के आसपास न तो आबादी की बसावट की जानी चाहिए और न ही व्यापारिक गतिविधियां यहां से संचालित होनी चाहिए। शासनादेश और प्रशासनिक पत्राचार

गौरतलब बात ये है ट्रस्ट की ओर से हाई कोर्ट में दी गई याचिका संख्या 1918( एम एस)/2007 ट्रस्ट बनाम राज्य व अन्य के निर्देशों के बाद राज्य सरकार के राजस्व विभाग के अपर सचिव जे पी जोशी ने 19जुलाई 2016 को डीएम देहरादून को पत्र लिख कर कहा कि हाईकोर्ट के द्वारा पारित आदेश 8/6/2010 के अनुपालन में शासनादेश 150/राजस्व/2004/15/3/2004 के संदर्भ में उक्त ट्रस्ट की कृषि भूमि को अकृषि नहीं किया जाएगा।

अब ज़मीन पर प्लॉटिंग और बसावट?

पावर ऑफ अटॉर्नी देकर बिक्री का आरोपअब ये जानकारी मिली है कि ट्रस्ट ने देहरादून स्थित रईस अहमद नाम के व्यक्ति को पावर ऑफ अटॉर्नी दी हुई थी अब उक्त 20 एकड़ भूमि पर मुस्लिम बस्ती बसाने के लिए प्लॉटिंग की जा रही है।जानकारी के मुताबिक हरियाला वाला कि प्रधान रही रजनी देवी ने इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन के समक्ष 2016 में कई बार लिखित रूप में भी दर्ज करवाई गई थी। उस समय तो प्रशासनिक दबाव में ये प्रकरण ठंडे बस्ते में पड़ा था किंतु कुछ माह बाद उक्त भूमि को बेचा जाने लगा।

उत्तराखंड के किसानों से ली गई थी जमीन

जानकारी के मुताबिक यहां ट्रस्ट द्वारा इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने के उद्देश्य से वीर सिंह पुंडीर,मंगत राम,कला चंद, हितेंद्र नारायण,महेंद्र सिंह, रणबीर सिंह, लक्ष्मी थापा, कुंती देवी, विक्रम सिंह, बीना ठाकुर, चरण सिंह, सत्येंद्र कुमार, बलवीर सिंह, मदन सिंह, भगवान सिंह, आलोक कुमार, मनजीत सिंह, संदीप कुमार, धर्म सिंह, गुलाब सिंह, रतन देई, जोगेंद्र सिंह आदि से 20 एकड़ कृषि भूमि ली गई थी।

इन मुस्लिमों के नाम हो चुकी है रजिस्ट्री

ट्रस्ट द्वारा रईस अहमद को पावर आफ एटर्नी देकर मुस्लिम समुदाय को भूमि बेची जा रही है।अब तक मंजर आलम, शहजाद अली, आसिफ, ताहिर खान, अमजद अली, मोहम्मद तारिक,साहिल अहमद, मोहम्मद इरशाद, शहजाद अली, सलीम अहमद,नवाब नसीम, मोहम्मद शोएब आदि के नाम भूमि बिक्री के बाद दाखिल खारिज भी हो चुका है।

भू दस्तावेजों को देख कर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि हिंदू किसानों से ली गई भूमि पर मुस्लिम समुदाय की बसावट हो रही है, यानि योजनाबद्ध तरीकों से डेमोग्राफी चेंज की साजिश रची जा रही है तो क्या इसके पीछे दारुल उलूम, जमीयत उलेमा ए हिंद या महमूद मदनी का शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट की कोई योजना काम कर रही है ? स्मरण रहे कि ये आईएमए के साथ जुड़ी हुई है। यहां ज्यादातर वो मुस्लिम है जोकि बाहरी राज्यों से आए हुए है।ऐसी भी जानकारी मिली है कि आई एम ए द्वारा भी कई बार प्रशासन को इस बारे में शिकायत दर्ज करवाई गई किन्तु कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

हिंदूवादी टाइगर राजा का बयान

देहरादून में उक्त भूमि को लेकर हैदराबाद के हिंदूवादी नेता टी राजा सिंह जो की गोशामहल हैदराबाद से पांच बार के विधायक रहे हैं का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें उनके द्वारा जमीयत उलेमा हिंद के महमूद मदनी पर खुला आरोप लगाया है कि उनके द्वारा देहरादून में कांग्रेस शासनकाल में ली गई भूमि को बेच दिया गया।

वर्ष 2022 के विधान सभा चुनावों के दौरान बीजेपी ने कांग्रेस पर देवभूमि उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोले जाने पर सवाल उठाए थे और ये मुद्दा सुर्खियों में रहा और जनमानस में गहराया रहा, आज भी कांग्रेस नेता इस पर सफाई देते रहते है लेकिन शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा इस्लामिक शिक्षण संस्थान के लिए खरीदी गई हिंदू किसानों की भूमि इस बात का प्रमाण था कि इस्लामिक धार्मिक नेता डॉ महमूद मदनी और कांग्रेस सरकार के बीच कुछ न कुछ तो इस पर सहमति थी जिसे भारतीय सैन्य अकादमी प्रबंधन ने आगे बात बढ़ने नहीं दी। उस समय कांग्रेस नेता अकील अहमद ने ये बयान दिया था कि कांग्रेस सरकार आई तो वो मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाएगी। जिस पर कांग्रेस नेताओं की खासी फजीहत हुई थी।

भूमि प्रकरण पर क्या कहते हैं सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि ये मामला एक वीडियो के जरिए उनके संज्ञान में आया है ये संवेदनशील विषय है, हमने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट आने पर ही आगे की कारवाई की जाएगी। उत्तराखंड की डेमोग्राफी चेंज करने के साजिश कामयाब नहीं होने दी जाएगी।

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संपादक

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