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अन्नदाता की पुकार, बिन पानी ठप है कारोबार: यशपाल आर्य
सदन में सरकार का सिंचाई नहरों या नलकूपों से संबंधित हर प्रश्न के जबाब में परीक्षण किया जा रहा है,
देहरादून। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा है कि पहाड़ , तराई,भाबर क्षेत्र के अंतर्गत सिंचाई नहरें क्षतिग्रस्त हो रखी है। सिंचाई गूलों की मरम्मत नहीं हो पाई है। नहरें सूखी हैं और नलकूप खराब हैं। इस समय गर्मी में जब फसल पानी मांग रही है तब प्रदेश में सिंचाई के ये दोनों प्रमुख साधन सूखे के हालात में किसानों का साथ छोड़ रहे हैं । इसलिए किसान परेशान हैं। सरकार दावा कर रही है कि सूखे की स्थिति नहीं है, लेकिन हकीकत यह है कि किसानों की जेब और धरती की कोख दोनों ही सूख रहे हैं।
केंद्र और राज्य सरकारें खेती-किसानी पर जोर दे रही हैं, मगर खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने के मोर्चे पर पूर्ण रूप से फेल है। प्रदेश में कुल कृषि क्षेत्रफल 6.90 लाख हेक्टेयर के सापेक्ष 3.29 लाख हेक्टेयर क्षेत्रही सिंचित है । इसमें पर्वतीय क्षेत्र में 0.43 लाख हेक्टेयर और मैदानी क्षेत्र में 2.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र ही सिंचित है। साफ है कि फसलोत्पादन में बढ़ोतरी और किसानों की आय को यदि दोगुना करने के लिए खेतों तक सिंचाई पानी मुहैया कराना सबसे बड़ी जरूरत है।
गूलों के निर्माण में अनियमितताएं, कहीं सूखे स्रोत से योजना बनाने, एक ही गूल का कई-कई बार निर्माण समेत अन्य मामले लगातार सामने आ रहे है। इससे साफ है कि सरकार की नीति और नीयत में कहीं न कहीं खोट है।
बीती 17, 18 और 19 अक्टूबर को आसमानी आफत ने जमकर कहर बरपाया था. प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आई दैवीय आपदा में भारी जान-माल का नुकसान हुआ था । इस आपदा में कई सिंचाई क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गई हैं जिससे सिंचाई का संकट और गहरा गया है, लेकिन क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत और नष्ट नहरों के पुनर्निर्माण हेतु आज की तारीख़ तक भी बजट जारी नहीं हुआ है।
सरकार सदन में कह रही है इसका परीक्षण किया जा रहा है और योजना तैयार की जाएगी जो सरकार की किसानो के प्रति संवेदनहीनता दर्शाती है। हालात ये हैं कि हर साल सिंचाई का रकबा कम होता जा रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना भी काग़ज़ों में तैर रही है। आवश्यकता अनुसार समय पर पर्याप्त धन राशि उपलब्ध नहीं कराने से एक ओर योजना का व्यय भी बढ़ता चला जाता है दूसरी ओर फसलों का नुकसान होने से किसान बरबादी की ओर जाता है।