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उत्तराखण्ड

स्टिंग से सत्ता के संकट तक, अब खानपुर में आमने-सामने की पटकथा! उमेश कुमार का इस्तीफा और हरीश रावत की चुनावी इच्छा ने बढ़ाई सियासी हलचल

2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग ऑपरेशन से सुर्खियों में आए थे उमेश कुमार, अब खानपुर के विधायक हैं। इस्तीफे के ऐलान के बीच हरीश रावत ने भी इसी सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है।**

 

देहरादून/खानपुर। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर 2016 के चर्चित स्टिंग ऑपरेशन की यादें ताजा हो गई हैं। कभी पत्रकार के रूप में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत का स्टिंग ऑपरेशन कर प्रदेश की सियासत में भूचाल लाने वाले उमेश कुमार आज खानपुर से निर्दलीय विधायक हैं। लेकिन अब उनकी विधायकी से इस्तीफा देने की घोषणा और दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की खानपुर से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा ने आने वाले चुनावों को लेकर नए राजनीतिक कयासों को जन्म दे दिया है।

 

उमेश कुमार ने मंगलवार को घोषणा की कि वह बुधवार को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि साढ़े चार साल तक विपक्ष के साथ खड़े रहने के बावजूद भ्रष्टाचार, किसानों की समस्याओं और जनहित के मुद्दों पर उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उन्होंने साफ किया कि वह भाजपा या कांग्रेस में शामिल होने के लिए इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। साथ ही उन्होंने भविष्य में अपने जैसे कुछ और लोगों को विधानसभा तक पहुंचाने की इच्छा भी जताई।

 

इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की खानपुर से चुनाव लड़ने की इच्छा चर्चा में है। रावत पहले ही हरिद्वार क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा चुके हैं और खानपुर से चुनाव लड़ने का संकेत दे चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले विधानसभा चुनाव में खानपुर उत्तराखंड की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में से एक का केंद्र बन सकता है?

 

### स्टिंग ऑपरेशन जिसने हिला दी थी उत्तराखंड की राजनीति

 

इस कहानी की जड़ें वर्ष 2016 में हैं। उस समय हरीश रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे और कांग्रेस के भीतर बगावत के कारण उनकी सरकार गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रही थी। इसी दौरान उमेश कुमार, जो उस समय समाचार प्लस चैनल के संपादक थे, एक ऐसे स्टिंग ऑपरेशन के कारण सुर्खियों में आए जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री को कथित तौर पर विधायकों के समर्थन से जुड़े लेनदेन की बातचीत करते दिखाया गया था।

 

इस स्टिंग के सामने आने के बाद उत्तराखंड की राजनीति में भारी उथल-पुथल मची। कांग्रेस की सरकार पर संकट गहराया और राज्य में राष्ट्रपति शासन भी लागू हुआ। हालांकि बाद में हरीश रावत ने विधानसभा में बहुमत साबित कर अपनी सरकार बहाल कराई। स्टिंग से जुड़े आरोपों और जांच की प्रक्रिया ने इस प्रकरण को लंबे समय तक राजनीतिक बहस का विषय बनाए रखा। हरीश रावत ने उस समय वीडियो को लेकर सवाल उठाए थे और आरोपों को खारिज किया था।

 

इस घटनाक्रम ने उमेश कुमार को प्रदेश की राजनीति में एक अलग पहचान दी। समय बदला, राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और 2022 के विधानसभा चुनाव में उमेश कुमार खानपुर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गए।

 

### हरीश रावत के मन में अब भी उस प्रकरण की कसक?

 

करीब एक दशक बाद भी 2016 का स्टिंग ऑपरेशन हरीश रावत और उमेश कुमार के बीच राजनीतिक विमर्श का अहम हिस्सा बना हुआ है। हाल ही में हरीश रावत ने उमेश कुमार को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि जिस व्यक्ति को वह अपनी सरकार के संकट और कांग्रेस के राजनीतिक नुकसान से जोड़कर देखते हैं, उसे आज कुछ लोग नायक के रूप में पेश कर रहे हैं।

 

रावत की इस टिप्पणी से स्पष्ट है कि उनके लिए यह प्रकरण केवल पुरानी राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने के दौर की एक महत्वपूर्ण स्मृति भी है। दूसरी ओर उमेश कुमार अब एक निर्वाचित विधायक हैं और अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर अलग रास्ता तलाशने की बात कर रहे हैं।

 

अब जब रावत ने खानपुर से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है, तो दोनों नेताओं के पुराने राजनीतिक टकराव को नए चुनावी संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों के बीच सीधा चुनावी मुकाबला तय हो गया है। कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार घोषित होना बाकी है और उमेश कुमार के इस्तीफे के बाद उनकी अगली राजनीतिक रणनीति भी अहम होगी।

 

### खानपुर में किसके लिए खुलेगा सियासी मैदान?

 

खानपुर विधानसभा सीट पर उमेश कुमार की मौजूदा राजनीतिक पकड़, हरीश रावत का अनुभव और कांग्रेस की स्थानीय रणनीति—तीनों आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उमेश कुमार के इस्तीफे के ऐलान के बाद यह सवाल भी उठेगा कि यदि इस्तीफा स्वीकार होता है, तो आगे की राजनीतिक प्रक्रिया क्या होगी और चुनावी समीकरण किस दिशा में जाएंगे।

 

हरीश रावत के लिए खानपुर से चुनाव लड़ने की इच्छा केवल एक सीट चुनने का मामला नहीं मानी जा रही। यह उनके हरिद्वार क्षेत्र में दोबारा सक्रिय होने और कांग्रेस के लिए नई राजनीतिक जमीन तलाशने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है। दूसरी ओर उमेश कुमार का यह कहना कि वह कांग्रेस या भाजपा में शामिल नहीं होंगे, उनके अलग राजनीतिक रास्ते की ओर संकेत करता है।

 

अब नजर बुधवार को उमेश कुमार के अगले कदम पर रहेगी। इस्तीफे की घोषणा वास्तव में किस रूप में आगे बढ़ती है, यह स्पष्ट होने के बाद ही खानपुर की राजनीति की अगली तस्वीर साफ होगी।

 

**एक दशक पहले स्टिंग ऑपरेशन ने हरीश रावत की सरकार को संकट में डाल दिया था। अब उसी प्रकरण से चर्चा में आए उमेश कुमार के इस्तीफे के ऐलान और हरीश रावत की खानपुर से चुनाव लड़ने की इच्छा ने राजनीति को फिर एक दिलचस्प मोड़ पर ला खड़ा किया है। सवाल यही है—क्या 2016 की सियासी कहानी का अगला अध्याय 2027 में खानपुर की चुनावी जमीन पर लिखा जाएगा?**

 

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