उत्तराखण्ड
तो 35 लाख में दलेर खाली होंठ हिलाने आए थे उत्तराखंड… दलेर मेहंदी विवाद पर सुबोध उनियाल की सफाई, बोले- कलाकार को अपनी ‘ग्रेविटी’ का ध्यान रखना चाहिए
मंच पर जाकर दलेर मेहंदी से की थी बात, आलोचना के बाद कैबिनेट मंत्री ने मीडिया के सामने रखा अपना पक्ष; बोले- अपशब्द नहीं कहे, मेरी मंशा कलाकार को ठेस पहुंचाने की नहीं थी
उत्तराखंड। गायक दलेर मेहंदी और उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच हुए विवाद के बाद मंत्री ने मीडिया के सामने अपनी सफाई दी है। मेले में दलेर मेहंदी की प्रस्तुति के दौरान मंच पर जाकर उनसे सवाल करने और उनकी परफॉर्मेंस पर टिप्पणी करने के बाद सोशल मीडिया पर सुबोध उनियाल की आलोचना हुई। इसके बाद मंत्री ने पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने दलेर मेहंदी से कोई अपशब्द नहीं कहा। उन्होंने केवल इतना कहा था कि वह बहुत बड़ा नाम हैं, लेकिन उनसे बोला नहीं जा रहा है। सुबोध उनियाल ने यह भी कहा कि उनकी मंशा किसी बड़े कलाकार को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। उनका तर्क है कि कलाकारों को सम्मान बनाए रखने के लिए स्वयं भी अपने व्यवहार और प्रतिष्ठा का ध्यान रखना चाहिए।
मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि दलेर मेहंदी एक बहुत बड़ा नाम हैं और बहुत बड़े गायक हैं। यही कारण था कि उन्हें मेले में आमंत्रित किया गया था। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान जब उन्हें लगा कि दलेर मेहंदी केवल लिपसिंग कर रहे हैं और वास्तव में गाना नहीं गा रहे हैं, तो वहां मौजूद लोगों में नाराजगी होने लगी। सुबोध उनियाल ने कहा कि वह स्थानीय जनप्रतिनिधि होने के साथ ही मेला कमेटी के संरक्षक भी हैं। लोगों का दबाव था कि इस बारे में कलाकार से सवाल किया जाए।
उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने एंकर को बुलाकर कहा कि लोग दलेर मेहंदी को सुनने आए हैं, उनकी टीम को सुनने नहीं आए हैं। टीम का संगीत सुनने के लिए तो लोग कहीं और भी जा सकते हैं। ऐसे में दलेर मेहंदी को स्वयं अपनी प्रस्तुति देनी चाहिए थी।
सुबोध उनियाल के मुताबिक, कुछ देर बाद जब उनकी एंकर से बातचीत हुई तो उन्हें लगा कि एंकर ने संबंधित लोगों को इशारों में समझाया और व्यक्तिगत रूप से उनके पास जाकर उन्हें कुछ निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि उन्हें ऐसा लगा कि कलाकारों से हाथों से एक्शन करने और बाकी प्रस्तुति सिस्टम के माध्यम से चलाने के लिए कहा गया। इसके बाद संगीत सिस्टम पर चलने लगा और कलाकार लिपसिंग करने लगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उन्होंने दोबारा कहा कि इस तरह नहीं चलेगा।
मंत्री ने बताया कि जब उन्होंने इस बारे में बात की तो उन्हें कुछ कहा गया, जिसके बाद वह मंच पर पहुंचे। वहां उन्होंने दलेर मेहंदी से कहा कि वह बहुत बड़ा नाम हैं और उन्हें अपने नाम की ग्रेविटी यानी प्रतिष्ठा का ध्यान रखना चाहिए। उन्हें इसलिए बुलाया गया है कि वह स्वयं प्रस्तुति दें। सुबोध उनियाल ने कहा कि उस समय उन्हें लगा कि दलेर मेहंदी ठीक से बोल नहीं पा रहे थे और चलने में भी परेशानी हो रही थी। यह सब देखने के बाद उन्हें लगा कि कलाकार नशे के प्रभाव में हैं।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह यह नहीं कह सकते कि कथित नशा किस चीज का था। उन्होंने कहा कि वह इतने बड़े कलाकार का मेडिकल परीक्षण तो नहीं कराते। बाद में उन्हें बताया गया कि दलेर मेहंदी की तबीयत खराब थी और इसी वजह से वह ठीक से चल-बोल नहीं पा रहे थे।
इस पर मंत्री ने सवाल उठाया कि यदि इतने बड़े कलाकार की तबीयत खराब थी तो उन्हें जनता को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। उन्हें मंच से बताना चाहिए था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और वह प्रस्तुति देने में सक्षम नहीं हैं। सुबोध उनियाल ने कहा कि यदि दलेर मेहंदी की तबीयत वास्तव में खराब थी तो उन्हें कार्यक्रम में आने से मना कर देना चाहिए था और आयोजकों को बता देना चाहिए था कि वह मेले में प्रस्तुति नहीं दे पाएंगे।
35 लाख रुपये और होटल बुकिंग का भी किया जिक्र
सुबोध उनियाल ने बातचीत में दलेर मेहंदी के कार्यक्रम के लिए किए गए भुगतान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूरा पैसा, एक-एक पैसा उनके खाते में डालने के लिए कहा गया था और 35 लाख रुपये खाते में डाल दिए गए थे। इसके बाद दलेर मेहंदी ने आने की बात कही। मंत्री के अनुसार, बाद में पूरे होटल की बुकिंग का खर्च देने की बात भी कही गई और वह रकम भी भेजी गई। इसके बाद दलेर मेहंदी कार्यक्रम में पहुंचे।
मंत्री ने कहा कि उनका, जिला कमेटी का या उनका व्यक्तिगत उद्देश्य दलेर मेहंदी को ठेस पहुंचाना नहीं था। उनका मानना है कि इतने बड़े कलाकार को भी अपनी प्रतिष्ठा का ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में उनकी अपनी भूमिका समाप्त होने के बाद भी करीब एक घंटे तक लोग प्रस्तुति सुनते रहे। उनके मुताबिक, लगभग 40 से 45 मिनट तक लोगों की ओर से लगातार यह शिकायत की जा रही थी कि कलाकार ठीक से प्रस्तुति नहीं दे रहे हैं। ऐसे में जनप्रतिनिधि होने के नाते उनके सामने लोगों को जवाब देने की जिम्मेदारी भी थी।
सुबोध उनियाल ने कहा कि दलेर मेहंदी का संगीत के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान है। यदि उनकी किसी बात से कलाकार को ठेस पहुंची है तो ऐसा करना उनकी भावना नहीं थी। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि कलाकारों का सम्मान बनाए रखने के लिए कलाकारों को भी उसी अनुरूप व्यवहार करना आवश्यक है।
सोशल मीडिया पर आलोचना को लेकर मंत्री ने क्या कहा?
मीडिया ने सुबोध उनियाल से सवाल किया कि म्यूजिक इंडस्ट्री और बॉलीवुड से जुड़े लोग लगातार यह कह रहे हैं कि उन्होंने मंच पर दलेर मेहंदी का अपमान किया। क्या उन्होंने इस संबंध में सोशल मीडिया पर चल रही वीडियो क्लिपिंग देखी है?
इसके जवाब में मंत्री ने कहा कि उन्होंने कोई अपशब्द नहीं कहा। उन्होंने दलेर मेहंदी से केवल यही कहा था कि वह बहुत बड़ा नाम हैं, लेकिन उनसे बोला नहीं जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कोई मंशा कलाकार को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। यदि उन्हें अपमानित ही करना होता तो उन्हें कार्यक्रम में बुलाया ही क्यों जाता? उन्हें इसलिए आमंत्रित किया गया था, क्योंकि वह एक बड़ा नाम हैं।
नौ दिन के मेले में स्थानीय कलाकारों को भी मिलता है मंच
सुबोध उनियाल ने मेले में स्थानीय कलाकारों को दिए जाने वाले अवसरों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नौ दिन के मेले में संगीता ढौंडियाल, मीना राणा, महिपाल जी, पांडव, नरेंद्र सिंह नेगी और प्रियंका मेहरा सहित तमाम स्थानीय कलाकारों को मंच पर बुलाया जाता है।
उन्होंने बताया कि मेले के दो दिन बॉलीवुड के कलाकारों को आमंत्रित किया जाता है, ताकि लोगों को दूसरे प्रदेशों के अच्छे और बेहतर कलाकारों की प्रस्तुति देखने-सुनने का अवसर मिले।
मंत्री ने कहा कि इससे पहले जुबिन नौटियाल को भी कार्यक्रम में बुलाया गया था। जब जुबिन नौटियाल की तबीयत खराब हुई तो उन्होंने पूरा पैसा वापस भिजवा दिया था। उनके नहीं आ पाने के बाद आयोजकों की टीम ने उनके हिसाब से दलेर मेहंदी से संपर्क किया था।
सुबोध उनियाल ने कहा कि यदि किसी कलाकार की तबीयत खराब है तो उसे आयोजकों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए। उनके मुताबिक, कई बार कलाकार के लिए स्वयं अपनी स्थिति स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि एक बार कोई बात कह देने के बाद उससे पीछे हटना कठिन हो जाता है।
‘जनता को बताना चाहिए था कि तबीयत ठीक नहीं है’
मंत्री ने फिर दोहराया कि कलाकार को जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि यदि कलाकार यह बता देता कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है और वह प्रस्तुति नहीं दे पा रहा है तो लोग उसकी स्थिति को समझ सकते थे। जनता कोई डॉक्टर नहीं है कि वह स्वयं कलाकार की तबीयत का आकलन कर सके।
उन्होंने दलेर मेहंदी के समर्थन में सामने आ रहे लोगों को लेकर भी टिप्पणी की। सुबोध उनियाल ने कहा कि दलेर मेहंदी के भाई कपिल शर्मा की तरह बहुत बड़े आदमी हैं। हर व्यक्ति और हर वर्ग का अपना नजरिया होता है। उन्होंने कहा कि किसी कलाकार के मित्र और करीबी उसके पक्ष में खड़े होंगे, यह स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दलेर मेहंदी बड़ा नाम होने के साथ-साथ संगीत के क्षेत्र में बड़ा योगदान रखने वाले कलाकार हैं।
अनुपम खेर के बयान का भी किया जिक्र
बातचीत के दौरान अनुपम खेर के बयान को लेकर भी सवाल उठा। बताया गया कि अनुपम खेर ने कहा है कि जिन चिकित्सक से दलेर मेहंदी का इलाज चल रहा था, वे उनके खास मित्र हैं और उनकी सर्जरी भी हुई है।
इस पर सुबोध उनियाल ने कहा कि अनुपम खेर का बयान घटना से पहले आया था या घटना के समय क्या स्थिति थी, यह महत्वपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन दलेर मेहंदी की ओर से ऐसी कोई जानकारी दी गई थी या नहीं।
मंत्री के पूरे बयान का सार यही है कि वह दलेर मेहंदी के संगीत और उनके योगदान का सम्मान करते हैं, लेकिन कार्यक्रम में हुई प्रस्तुति को लेकर जनता की नाराजगी के बीच जनप्रतिनिधि के तौर पर सवाल उठाना जरूरी समझते थे। दूसरी ओर, इस घटनाक्रम को लेकर उठी आलोचना के बीच उनका कहना है कि उनकी मंशा कलाकार का अपमान करना नहीं थी और उन्होंने मंच पर कोई अपशब्द नहीं कहा।