उत्तराखण्ड
2022 में हल्द्वानी से चुनावी मंथन, 2026 में फिर हल्द्वानी से 2027 की तैयारी”
2022 में यहीं से बनी थी चुनावी रणनीति, अब 2027 से पहले फिर जुटेगा प्रदेश संगठन; क्या हल्द्वानी बनेगा भाजपा के लिए ‘लकी फैक्टर’?
2022 में हल्द्वानी से चुनावी मंथन, 2026 में फिर हल्द्वानी से 2027 की तैयारी”
चार साल बाद फिर हल्द्वानी में भाजपा का महामंथन
2022 में यहीं से बनी थी चुनावी रणनीति, अब 2027 से पहले फिर जुटेगा प्रदेश संगठन; क्या हल्द्वानी बनेगा भाजपा के लिए ‘लकी फैक्टर’?
हल्द्वानी। पहाड़ और मैदान के बीच सियासी सेतु माने जाने वाले हल्द्वानी में एक बार फिर भाजपा का बड़ा संगठनात्मक महामंथन होने जा रहा है। खास बात यह है कि करीब चार साल के अंतराल के बाद भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक फिर हल्द्वानी में प्रस्तावित है। संयोग देखिए—2022 में जब प्रदेश कार्यसमिति हल्द्वानी में जुटी थी, तब पार्टी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में थी और अब 2026 में उसी शहर में प्रदेश संगठन का जमावड़ा ऐसे समय होने जा रहा है, जब 2027 के विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।
यही समानता इस बैठक को सामान्य संगठनात्मक बैठक से कहीं अधिक राजनीतिक महत्व दे रही है।
2022 में हल्द्वानी में हुई प्रदेश कार्यसमिति के दौरान भाजपा ने विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन को सक्रिय करने, बूथ स्तर तक पहुंच मजबूत करने और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक ले जाने की रणनीति पर मंथन किया था। चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में आया और पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में पहुंची।
अब चार साल बाद तस्वीर फिर कुछ वैसी ही दिखाई दे रही है। चुनाव सामने है, संगठन को चुनावी मोड में लाने की जरूरत है और प्रदेश भाजपा का शीर्ष नेतृत्व एक बार फिर हल्द्वानी में बैठकर आगे की रणनीति पर विचार करने जा रहा है।
2022 का हल्द्वानी कनेक्शन, अब 2027 की बारी
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि क्या हल्द्वानी भाजपा के लिए एक बार फिर चुनावी रणनीति का ‘लकी फैक्टर’ साबित होगा?
2022 की प्रदेश कार्यसमिति और 2026 की प्रस्तावित बैठक के बीच चार साल का अंतर है, लेकिन दोनों बैठकों की राजनीतिक परिस्थितियों में एक दिलचस्प समानता है। दोनों ही मौकों पर पार्टी के सामने विधानसभा चुनाव की तैयारी का बड़ा लक्ष्य है।
अंतर सिर्फ इतना है कि 2022 में भाजपा सत्ता में वापसी के लिए मैदान तैयार कर रही थी, जबकि 2026 में पार्टी के सामने लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की चुनौती है।
इस बार दांव और बड़ा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा सरकार के सामने 2027 में अपनी उपलब्धियों को चुनावी मुद्दे में बदलने की चुनौती होगी। वहीं संगठन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सरकार की योजनाओं और फैसलों का संदेश बूथ स्तर तक पहुंचे।
प्रदेश कार्यसमिति में संगठन की स्थिति, मंडल और बूथ स्तर की सक्रियता, आगामी कार्यक्रमों, सरकार की उपलब्धियों और विपक्ष के मुद्दों पर रणनीति तैयार किए जाने की संभावना है।
इसके अलावा कुमाऊं की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण होगी। हल्द्वानी स्वयं कुमाऊं की राजनीति का प्रमुख केंद्र है और यहां प्रदेश संगठन की बैठक होना कार्यकर्ताओं के लिए भी बड़ा संदेश माना जा रहा है।
राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी बढ़ाएगी सियासी गर्मी
10 सितंबर को प्रस्तावित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के शामिल होने की चर्चा ने इसके महत्व को और बढ़ा दिया है। राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी में प्रदेश भाजपा के पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष और प्रमुख नेता एक मंच पर होंगे।
ऐसे में संगठनात्मक समीक्षा के साथ-साथ 2027 के लिए राजनीतिक रोडमैप पर भी गंभीर चर्चा होने की संभावना है।
राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से संगठन को चुनावी तैयारियों को लेकर क्या दिशा मिलती है, यह भी बैठक का महत्वपूर्ण पहलू रहेगा।
चार साल में बहुत कुछ बदला
2022 से 2026 के बीच उत्तराखंड की राजनीति में काफी बदलाव आया है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में सत्ता बरकरार रखी, लोकसभा चुनाव में भी अपना मजबूत प्रदर्शन जारी रखा और अब उसके सामने 2027 में सत्ता की हैट्रिक का लक्ष्य है।
दूसरी ओर विपक्ष भी आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सक्रिय हो रहा है। ऐसे में भाजपा के लिए संगठन को समय रहते पूरी तरह चुनावी मोड में लाना महत्वपूर्ण है।
यही वजह है कि हल्द्वानी में होने वाली यह बैठक 2027 के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत का संकेत भी मानी जा रही है।
सवाल सिर्फ बैठक का नहीं, संदेश का है
भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठकें संगठन की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन हर बैठक का राजनीतिक महत्व एक जैसा नहीं होता। इस बार स्थान और समय दोनों इसे खास बना रहे हैं।
चार साल पहले हल्द्वानी में मंथन हुआ था और उसके बाद भाजपा ने सत्ता में वापसी की थी। चार साल बाद फिर हल्द्वानी में मंथन होने जा रहा है।
अब राजनीतिक सवाल यही है कि क्या भाजपा इस बार भी हल्द्वानी से ऐसा चुनावी रोडमैप तैयार कर पाएगी, जो उसे 2027 में लगातार तीसरी जीत की ओर ले जाए?
हल्द्वानी की बैठक का जवाब केवल संगठन की बैठक में नहीं मिलेगा, इसकी असली परीक्षा 2027 के चुनावी मैदान में होगी।

