उत्तराखण्ड
सहकारिता की सियासत में निश्छल पांडे की दस्तक, नैनीताल डीसीबी अध्यक्ष पद के लिए जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट को सौंपा आवेदन
सहकारिता की सियासत में निश्छल पांडे की दस्तक
नैनीताल डीसीबी अध्यक्ष पद के लिए प्रताप बिष्ट को सौंपा आवेदन, लंबे समय बाद फिर सक्रिय हुए पांडे; सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत से करीबी के मायने भी तलाशे जा रहे
हल्द्वानी। कुमाऊं की राजनीति में पिछले कुछ समय से अपेक्षाकृत शांत दिखाई दे रहे निश्छल पांडे ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक सक्रियता का संकेत दिया है। उन्होंने नैनीताल डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष पद के लिए भारतीय जनता पार्टी के नैनीताल जिला अध्यक्ष प्रताप बिष्ट को अपना आवेदन प्रस्तुत किया। इस दौरान विजय मनराल, जितेंद्र मेहता, प्रकाश रावत और चन्द्र प्रकाश तिवारी भी मौजूद रहे।
निश्छल पांडे की इस पहल को केवल एक पद के लिए आवेदन के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। सहकारिता उत्तराखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है और नैनीताल डीसीबी अध्यक्ष का पद संगठनात्मक एवं राजनीतिक दोनों दृष्टि से अहम माना जाता है। ऐसे में पांडे की दावेदारी ने कुमाऊं की राजनीतिक हलचल को लेकर चर्चाओं को भी हवा दे दी है।
लंबे समय बाद फिर सक्रियता
निश्छल पांडे पिछले काफी समय से कुमाऊं की सक्रिय राजनीति में पहले की तरह प्रमुखता से दिखाई नहीं दे रहे थे। उनकी राजनीतिक गतिविधियां अपेक्षाकृत सीमित नजर आ रही थीं। ऐसे में सहकारी बैंक जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी सामने रखना उनकी राजनीतिक सक्रियता की वापसी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के लिए खास बात यह भी है कि पांडे ने जिस क्षेत्र में अपनी दावेदारी पेश की है, वह सीधे तौर पर सहकारिता से जुड़ा है। इसलिए इस कदम को महज एक प्रशासनिक या संस्थागत पद की इच्छा के बजाय व्यापक राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
डॉ. धन सिंह रावत से नजदीकी के मायने
निश्छल पांडे की इस दावेदारी को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उत्तराखंड के वर्तमान सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के साथ उन्हें लंबे समय से नजदीकी रखने वाले नेताओं में गिना जाता है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय संगठन और संबंधित चुनावी प्रक्रिया के तहत ही होगा, लेकिन राजनीतिक हलकों में पांडे और सहकारिता मंत्री के बीच समीकरणों को लेकर चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज हो गई है।
यही वजह है कि डीसीबी अध्यक्ष पद के लिए पांडे की ओर से आवेदन को सामान्य राजनीतिक गतिविधि से थोड़ा अलग नजरिए से देखा जा रहा है। सहकारिता विभाग की कमान धन सिंह रावत के पास होने और पांडे के साथ उनके करीबी राजनीतिक संबंधों की चर्चाओं के बीच यह दावेदारी कई संभावित राजनीतिक संकेतों की ओर इशारा करती है।
सहकारिता के रास्ते मजबूत हो सकती है भूमिका
उत्तराखंड में जिला सहकारी बैंक केवल बैंकिंग संस्थान नहीं हैं। इनका सीधा जुड़ाव किसानों, सहकारी समितियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से है। यही कारण है कि सहकारी संस्थाओं के शीर्ष पदों को राजनीतिक दृष्टि से भी प्रभावशाली माना जाता है।
निश्छल पांडे यदि इस दौड़ में आगे बढ़ते हैं तो यह उनके लिए लंबे अंतराल के बाद किसी महत्वपूर्ण संस्थागत भूमिका में लौटने का अवसर हो सकता है। साथ ही इससे कुमाऊं में सहकारिता के क्षेत्र में उनकी भूमिका भी मजबूत हो सकती है।
आवेदन के साथ दिखा समर्थन का दायरा
भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट को आवेदन सौंपने के दौरान विजय मनराल, जितेंद्र मेहता, प्रकाश रावत और चन्द्र प्रकाश तिवारी की मौजूदगी ने भी राजनीतिक चर्चा को बढ़ाया है। इससे यह संदेश गया है कि पांडे अपनी दावेदारी को व्यक्तिगत प्रयास तक सीमित नहीं रख रहे हैं, बल्कि समर्थकों और राजनीतिक संपर्कों के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि भाजपा संगठन और सहकारिता से जुड़े राजनीतिक समीकरणों में उनकी दावेदारी को कितना समर्थन मिलता है। फिलहाल आवेदन ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि लंबे समय से अपेक्षाकृत शांत दिख रहे निश्छल पांडे ने एक बार फिर कुमाऊं की राजनीतिक पिच पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है।
और यदि इस दावेदारी को सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत के साथ उनके बताए जाने वाले करीबी राजनीतिक संबंधों के संदर्भ में देखा जाए, तो यह कदम आने वाले दिनों में कुमाऊं की सहकारिता और भाजपा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत साबित हो सकता है।

